VIDEO: यूपी के इस गांव में नहीं मनाया जाता है दशहरा, जानिए क्‍या है कारण

a1103-300x233 (1)नोएडा, 23 अक्‍टूबर. समूचे देश में गुरुवार को बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक दशहरा पर्व धूमधाम से मनाया गया। शहरों में जगह-जगह चल रही रामलीलाओं में रावण के पुतले का दहन किया गया, लेकिन ग्रेटर नोएडा के बिसरख गांव में इस दिन मातम छाया रहा। इस गांव में लोग दशहरा नहीं मनाते और न ही रामलीला का मंचन करते हैं। इसकी वजह बिसरख से जुड़ी एक मान्यता है।

माना जाता है कि रावण का जन्म बिसरख गांव में हुआ था। रावण के पिता विशरवा मुनि के नाम पर ही गांव का नाम पड़ा। गांव में रावण का मंदिर बना हुआ है। यहां के लोग भगवान राम की पूजा करते हैं और उनके आदर्शो को मानते हैं, लेकिन रावण को वह गलत नहीं मानते। उसे विद्वान पंडित मानते हैं, इसलिए गांव में रावण के पुतले का दहन नहीं किया जाता है।

जानिए क्‍या है मान्‍यता
मान्यता है कि रावण के पिता विशरवा मुनि ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए बिसरख गांव में अष्टभुजा धारी शिवलिंग स्थापित कर मंदिर का निर्माण किया था। पूर्व में यह क्षेत्र यमुना नदी के किनारे घने जंगल में आच्छादित था।

अब भी स्‍थापित है शिवलिंग
विशरवा मुनि ने घने जंगल के कारण इसे अपना तप स्थान बनाया था। इसी मंदिर पर अराधना के बाद रावण का जन्म हुआ था। गांव में अष्टभुजा धारी शिवलिंग अब भी स्थापित है। इस तरह का शिवलिंग आसपास किसी मंदिर में नहीं है।

मंदिर को मिलता है अच्‍छा फंड
पिछले एक दशकों से मीडिया और सोशल मीडिया में चर्चा होने के बाद इस मंदिर की लोकप्रियता बढ़ी है और अच्‍छा फंड भी मिलने लगा है। जिसके चलते बाबा मोहनराम मंदिर में रावण की प्रतिमा की स्‍थापना का विरोध होता रहा है। लेकिन शिव मंदिर के महंत अब शिव मंदिर में रावण और अनके परिवार के चित्र लगाने के साथ, रावण स्‍तुति के लिए भजन गीत तैयार करने में जुटे हैं। रावण की मूर्ति और रावण के मंदिर को देखने के लिए लोग यहां आते रहते हैं। कुछ आस्‍था के कारण तो कुछ अपनी जिज्ञासा को शांत करने के लिए।

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