उत्तराखंड में उत्तर प्रदेश के कब्जे वाली जमीन का संयुक्त सर्वे

देहरादून: उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच परिसंपत्तियों के बंटवारे का विवाद अब सुलझता नजर आ रहा है। शनिवार को दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों के बीच हुई बैठक में पंचेश्वर बांध के पुनर्वास के लिए उत्तराखंड की सीमा में आने वाली बनबसा की 909 हेक्टेयर भूमि का सर्वे करने का निर्णय लिया गया। प्रदेश के अन्य जिलों में उत्तरप्रदेश के स्वामित्व वाली तकरीबन 660 एकड़ जमीनों का भी सर्वे कर इसकी वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाएगा।उत्तराखंड में उत्तर प्रदेश के कब्जे वाली जमीन का संयुक्त सर्वे

इसके अलावा उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच तकरीबन तीन हजार करोड़ की पेंशन देनदारियों को लेकर भी दोनों प्रदेशों के महालेखाकारों के बीच बैठक होगी। बैठक में अधिकांश मामलों में सहमति भी बनी। अब दोनों प्रदेशों के मुख्य सचिवों के बीच एक माह बाद लखनऊ में बैठक होगी। दोनों मुख्य सचिवों ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही परिसंपत्तियों से संबंधित मामले निस्तारित कर लिए जाएंगे।

  शनिवार को राजपुर रोड स्थित सिविल सर्विसेज इंस्टीट्यूट (सीएसआइ) में उत्तराखंड के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव राजीव कुमार की अध्यक्षता में दोनों प्रदेशों के अधिकारियों की बैठक हुई। बैठक के बाद दोनों मुख्य सचिवों ने संयुक्त रूप से प्रेस ब्रीफिंग भी की। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच परिसंपत्तियों के बंटवारे का रोडमैप तैयार किया गया। कुछ मामलों में तो बैठक में ही सहमति बन गई।

शेष मामलों का एक बार फिर विभागीय स्तर से परीक्षण करने के बाद एक माह बाद प्रस्तावित बैठक में रखने का निर्णय लिया गया। उत्तर प्रदेश सरकार ने बदरीनाथ में उत्तर प्रदेश के यात्रियों के लिए भवन बनाने के लिए जमीन की मांग की है, इस पर सकारात्मक कदम उठाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव राजीव कुमार ने कहा कि पंचेश्वर बांध के लिए पुनर्वास कार्यों के लिए जमीन को लेकर संयुक्त सर्वे करने का निर्णय लिया गया है। इसके बाद यह देखा जाएगा कि आवश्यकता कितनी है और जमीन का स्वरूप क्या है इसके बाद निर्णय लिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि देनदारियों के अधिकांश प्रकरण पहले ही निस्तारित हो चुके हैं। पेंशन के मसलों पर दोनों राज्यों के महालेखाकार आपस में बैठेंगे। इसके बाद दोनों सरकारों के बीच रिजर्व बैंक और इंडिया के माध्यम से आगे की कार्यवाही होगी। उन्होंने कहा कि कार्मिकों का मसला लगभग समाप्त हो चुका है। जो थोड़ा बहुत बचा है उसे भी जल्द निस्तारित कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि 95 प्रतिशत मामलों का निराकरण हो चुका है और अवशेष मामलों पर भी शीघ्र हल निकाला जाएगा। 

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