तेजी से बढ़ रहा उत्तर हरियाणा की राजनीति का पारा

चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा में सबसे अधिक विधायक चुनकर भेजने वाली जीटी रोड बेल्ट पर फिर से सभी राजनीतिक दलों की निगाह है। भाजपा जहां अपनी पार्टी की जीत बरकरार रखने की कोशिश में जुटी है, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने जीटी रोड के रास्ते सत्ता तक पहुंचने का रोडमैप तैयार किया है। हुड्डा की अगली तमाम गतिविधियां उत्तर हरियाणा की जीटी रोड बेल्ट के विधानसभा क्षेत्रों में नजर आएंगी। इनेलो-बसपा का भी इस बेल्‍ट पर पूरा ध्‍यान है।तेजी से बढ़ रहा उत्तर हरियाणा की राजनीति का पारा

मिशन 2019 की तैयारियों में जुटे राजनीतिक दलों की जीटी रोड बेल्ट पर निगाह

हरियाणा की 90 सदस्यीय विधानसभा में जीटी रोड बेल्ट के लगभग 30 विधायकों में सबसे ज्यादा भाजपा के हैैं। मिशन 2019 के मद्देनजर सभी राजनीतिक दलों ने अपनी गतिविधियां जीटी रोड बेल्ट से शुरू करने का अहम निर्णय लिया है। इसके तहत पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने इस बार उत्तर हरियाणा की जीटी रोड बेल्ट में अपना प्रभाव बढ़ाने की कार्ययोजना तैयार की है। हुड्डा दक्षिण हरियाणा से पहले ही जनक्रांति रथयात्रा शुरू कर चुके हैं, जबकि जाट बेल्ट में उनका असर किसी से छिपा नहीं है।

3 जून से पानीपत जिले के समालखा से आरंभ होने वाली जनक्रांति रथयात्रा भी हुड्डा की गैर जाटों को साधने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पूर्व विधायक धर्म सिंह छौक्कर के इस हलके में दमदार शो कर हुड्डा पूरे उत्तर हरियाणा को संदेश देना चाह रहे हैं। हुड्डा जीटी रोड बेल्ट के हर जिले में तीन से पांच दिनों तक डेरा डालने की तैयारी में हैैं।

जाट और गैर जाट की राजनीति दिखाएगी असर

हुड्डा साफ तौर पर कह चुके कि हरियाणा की सत्ता का रास्ता जीटी रोड बेल्ट से होकर गुजरता है। इसका साफ मतलब है कि जाट नेता के रूप में पहचाने जाने वाले हुड्डा की कोशिश अब गैर जाट मतों में सेंधमारी की रहेगी। वहीं भाजपा की संगठनात्मक बैठकों में पूरा फोकस गैर जाट वोटबैंक को साधने पर है।

इनेलो-बसपा और आप की निगाह भी इसी बेल्ट पर

विधानसभा में विपक्ष के नेता अभय सिंह चौटाला ने भी उत्तर हरियाणा में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैैं। एसवाईएल नहर के निर्माण के लिए इनेलो-बसपा द्वारा दी जा रही गिरफ्तारियों में उत्तर हरियाणा के जिलों पर भी खास फोकस है। आम आदमी पार्टी ने भी अपने चुनाव अभियान की शुरुआत उत्तर हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले से की है। वहां तीन दिन पहले ही नवीन जयहिंद ने अरविंद केजरीवाल को बुलाकर अपनी पार्टी की उपस्थिति दर्ज कराई है।

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