औरंगाबाद: यहां बिजली बिल की वजह से एक व्यक्ति की जान चली गई. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक सरकारी कर्मचारी की लापरवाही की वजह से ऐसा हुआ. सब्जी बेचने वाले एक शख्स को लाखों रुपए का बिजली बिल थमा दिया गया. इससे निराश और परेशान व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली. व्यक्ति के मार्च महीने का बिजली बिल आठ लाख 64 हजार रुपये आया था , हालांकि बिजली वितरक कंपनी ने बाद में बताया कि यह बिल गलत है.महारास्ट्र के टीन के छप्पर वाले 2 कमरों घर में आया 8.64 लाख एक महीने का बिल, दी जान

मृतक के परिजन ने बताया कि जगन्नाथ नेहाजी शेलके (36) ने गुरुवार तड़के फांसी लगाकर कथित रूप से आत्महत्या कर ली. वह बिजली बिल को लेकर चिंतित था और महाराष्ट्र राज्य बिजली वितरक कंपनी ( एमएसईडीसीएल ) के स्थानीय कार्यालय का कई बार चक्कर काट चुका था. घटना पुंडलिकनगर पुलिस थाना अंतर्गत भारतनगर इलाके की है. अधिकारियों ने बताया कि ड्यूटी में कथित लापरवाही बरतने के लिये बिजली कंपनी के लेखा सहायक सुशील काशीनाथ को निलंबित कर दिया गया है.

जगन्नाथ नेहाजी शेलके (36) दो कमरे के टीन के छप्पर वाले घर में रहते थे. बिजली बिल के मुताबिक उन्होंने 55519 यूनिट बिजली खर्च की थी जो कि आठ लाख 64 हजार रुपये की बैठ रही थी. बिल देखकर वह घबरा गए और उन्होंने फांसी लगाकर जान दे दी. उन्होंने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है जिसमें लिखा है कि लाखों रुपए का बिल देखने के बाद उन्होंने जान देने का फैसला किया है. क्लर्क ने मीटर रींडिग्स 6,117.8 KWH की जगह 61,178 KWH लिख दीं। इस कारण जगन्नाथ का बिल 8,64,781 रुपये बन गया.

परिजनों ने कलर्क के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में केस दर्ज करने की मांग की है लेकिन पुलिस ने दुर्घटना में मौत का केस दर्ज किया है. परिजनों का ये भी आरोप है कि बिजली विभाग के अधिकारी जगन्नाथ को धमकाते थे और बिजली बिल भरने के लिए दबाव डालते थे. परिजनों का ये भी आरोप है कि अधिकारी घर छीनने की धमकी देते थे.