मेरठ : नाले ढकते ही बदल जाता है नजारा

- in उत्तरप्रदेश

मेरठ। शहर में मुसीबत का सबब बने नालों को ढकने की योजना पर भले ही शासन और अधिकारी गंभीर न हों, लेकिन शहर में ही कई स्थान ऐसे हैं जहां नाले ढके होने के कारण हालात बिल्कुल जुदा हैं। यहां नाले से उठने वाली दुर्गध, गंदगी में पनपने वाले मच्छर, बीमारियां नहीं होती। साथ ही किसी दुर्घटना का अंदेशा भी नहीं होता है। शहर में डीएम आवास के आसपास, महिला थाने के बाहर तथा पल्लवपुरम से गुजर रहे हाइवे पर नाले ढके हैं। इन सभी स्थानों से लोग बिना किसी परेशानी के गुजरते हैं।मेरठ : नाले ढकते ही बदल जाता है नजारा

पल्लवपुरम हाइवे

एनएचएआइ द्वारा हाइवे निर्माण की योजना में हाइवे के दोनों ओर सर्विस रोड तथा दो दो नालों का निर्माण शामिल किया। एक नाला मुख्य मार्ग और सर्विस रोड के बीच में तथा दूसरा नाला सर्विस रोड के दूसरी ओर बनाया गया है। हालांकि जिस समय यहां नालों का निर्माण किया जा रहा था तो स्थानीय जनता ने खुले नालों में दुर्घटनाओं का अंदेशा जताते हुए विरोध किया। लेकिन जैसे ही नाला निर्माण के बाद उसे ऊपर से ढका गया तो लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अब यहां पानी कहां से गुजर जाता है किसी को पता तक नहीं चल पाता। न ही कहीं नाला अटा है और न ही नाले से कोई दुर्गध आती है। इन नालों में मच्छर भी पैसा नहीं होते।

डीएम आवास के आसपास का क्षेत्र

एमडीए ने लगभग दो साल पहले डीएम आवास तथा कलक्ट्रेट के चारो ओर की सड़क का चौड़ीकरण का कार्य किया। नई सड़क बनाई गई और नाला बना। सभी भवनों की चारदीवारी भी ऊंची हुई। यहां नाले के साथ साथ बिजली, फोन व अन्य लाइनों के केबिल को गुजारने के लिए नाले की भांति विशेष निर्माण किया गया है। इस निर्माण के बाद इस पूरे इलाके का नजारा ही बदला हुआ है।

महिला थाना और पुलिस लाइन के बाहर

कचहरी के अंबेडकर मूर्ति चौराहा से महिला थाना तथा पुलिस लाइन होते हुए बड़ा नाला बना है। लेकिन वह दिखाई तक नहीं देता। यहां खानपीन की तमाम दुकानें, ठेले और फड़ लगे हैं। बड़ी संख्या में वाहन भी खड़े रहते हैं। महिला थाने में आने वाले लोगों के वाहनों की पार्किग भी यहीं होती है। यह सब कुछ ढके नाले के ऊपर होता है। यहां से नाला भी गुजरता है इस बात की जानकारी बड़े ध्यान से देखने के बाद ही होती है।

नगर स्वास्थ्य अधिकारी

डा. कुंवरसैन ने कहा कि यह बात सही है कि शहर में अंदर नालों को ढकने से कई समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है। लेकिन निगम के पास संसाधन सीमित हैं। शासन को योजना बनाकर भेजी भी गई। उसका जवाब नहीं मिला। हमें शासन की स्वीकृति की प्रतीक्षा है।

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