पर्यटन स्थलों की कारोबारी सूरत बदलेंगे पीएसयू

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सार्वजनिक उपक्रमों के जरिये देश के कुछ खास पर्यटन स्थलों की कारोबारी सूरत बदलने के लिए केंद्र सरकार ने कमर कस ली है। इनमें महाराष्ट्र में अजंता-एलोरा के पास औरंगाबाद, बिहार में बोधगया, कर्नाटक के हम्पी, मध्य प्रदेश के खजुराहो और तमिलनाडु के महाबलिपुरम जैसे यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल पर्यटन स्थल शामिल हैं। दरअसल, केंद्र सरकार ने सभी सार्वजनिक उपक्रमों को साल में निदेशक मंडल की एक-दो बैठक इन्हीं पर्यटन स्थलों पर कराने का आदेश दिया है। जाहिर है, जब पीएसयू के निदेशक मंडल की बैठक ऐसे जगहों पर होगी, तो वहां कारोबारी गतिविधियां बढ़ेंगी और बेहतर ढांचागत सुविधाएं जुटाने के लिए व्यवसायियों को प्रोत्साहन मिलेगा।पर्यटन स्थलों की कारोबारी सूरत बदलेंगे पीएसयू

केंद्रीय वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि सार्वजनिक उपक्रम विभाग की तरफ से इस बारे में एक आधिकारिक आदेश निर्गत किया जा चुका है। उनका कहना है कि देश के नामचीन पर्यटन स्थलों पर तो देशी-विदेशी पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है, लेकिन अजंता-एलोरा, हम्पी, खजुराहो, महाबलिपुरम, बोधगया जैसे विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों पर आज भी पर्याप्त संख्या में पर्यटक नहीं पहुंच रहे हैं। हालांकि सरकार के प्रोत्साहन पैकेज से वहां लक्जरी होटलों की उपस्थिति हो गई है और कुछ ढांचागत संरचनाएं विकसित हो गई हैं। इसलिए सरकार की कोशिश है कि इन पर्यटन स्थलों पर सरकारी कंपनियों को निदेशक मंडल की बैठक या कोई अन्य कार्यक्रम आयोजित करने को प्रोत्साहित किया जाए। 

प्रधानमंत्री की सलाह पर हुआ ऐसा 
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी साल नौ अप्रैल को सीपीएसई कॉन्क्लेव में कहा था कि साल में कम से कम एक-दो बैठक या कंपनी की आम बैठक पर्यटन स्थलों पर आयोजित करनी चाहिए। इसके बाद सार्वजनिक उपक्रम मंत्रालय की तरफ से इस तरह का आदेश बीते मई के अंतिम दिनों में जारी हुआ है। फिलहाल सार्वजनिक उपक्रम विभाग ने पांच पर्यटन स्थलों को शार्ट लिस्ट किया है जिनमें औरंगाबाद, बोधगया, हम्पी, खजुराहो और महाबलिपुरम शामिल हैं। इन स्थलों का चयन केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय से मंत्रणा के बाद किया गया है। हो सकता है कि पर्यटन स्थलों की दूसरी सूची भी आए। 
 
ढांचागत सुविधाओं की है कमी 
एक नवरत्न कंपनी के निदेशक ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि उन्हें इस बारे में सरकारी आदेश प्राप्त हो गया है। इसके साथ ही शॉर्ट लिस्टेड पर्यटन स्थलों पर निदेशक मंडल की बैठक की कवायद भी शुरू हो गई है। लेकिन दिक्कत यह है कि इन स्थानों पर पर्याप्त ढांचागत संरचना नहीं है। इसके अलावा, इन पर्यटन स्थलों पर कनेक्टिविटी की भी दिक्कत है, मतलब दिल्ली से सीधी या दैनिक उड़ानें नहीं है। कहीं हवाई कनेक्टिविटी तो है, लेकिन सप्ताह के सातों दिन नहीं है। किसी मार्ग पर उपलब्ध हवाई सेवा में बिजनेस क्लास की सीटें नहीं हैं।  

दूर की जाएंगी दिक्कतें 
इन पर्यटन स्थलों पर ढांचागत सुविधाओं की कमी के बारे में केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी से जब सवाल किया गया तो उनका कहना था कि धीरे-धीरे ढांचागत सुविधाएं विकसित की गई हैं। अभी जिन पर्यटन स्थलों की सूची जारी की गई है, वहां आतिथ्य क्षेत्र की बड़ी-बड़ी कंपनियों ने होटल शुरू किए हैं। इसलिए निदेशक मंडल की बैठक में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।  

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