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पंजाब में मंत्री न बनाए जाने से खफा तीन कांग्रेस विधायकों ने दिया विधानसभा कमेटियों से इस्तीफा

चंडीगढ़। कैबिनेट विस्तार के बाद पार्टी में उठी बगावत की आग अभी ठंडी नहीं पड़ी है। ओबीसी और वाल्मीकि समुदाय के बाद अब कांग्रेस के तीन वरिष्ठ विधायक लुधियाना नार्थ के राकेश पांडे, अमलोह के रणदीप सिंह नाभा और समराला के विधायक अमरीक सिंह ढिल्लों ने विधानसभा की कमेटियों से इस्तीफा दे दिया है। इन तीनों ही विधायकों ने सामूहिक रूप से अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष राणा कंवरपाल सिंह केपी को सौंप दिया।पंजाब में मंत्री न बनाए जाने से खफा तीन कांग्रेस विधायकों ने दिया विधानसभा कमेटियों से इस्तीफा

शाहकोट उपचुनाव से पूर्व विधानसभा कमेटी से दिया गया इस्तीफा कांग्रेस के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि इसका असर चुनाव पर भी पड़ सकता है। तीनों ही विधायकों ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह व पार्टी हाईकमान पर उनकी वरिष्ठता को नजरंदाज करने आरोप लगाया है। 7 मई को विधानसभा की घोषित की गई कमेटी में राकेश पांडे को सरकारी कारोबार कमेटी का चेयरमैन और अमरीक सिंह ढिल्लों को लाइब्रेरी कमेटी का चेयरमैन लगाया गया था, जबकि रणदीप सिंह नाभा इन दोनों ही कमेटियों में सदस्य थे।

पिछले माह हुए कैबिनेट विस्तार के बाद से ही पंजाब कांग्रेस में बगावत के सुर फूट गए थे। ओबीसी समुदाय को प्रतिनिधित्व नहीं दिए जाने को लेकर अमरगढ़ के विधायक सुरजीत सिंह धीमान और उड़मुड़ के संगत सिंह गिलजियां ने पार्टी के पदों से इस्तीफा दे दिया था तो वाल्मीकि समुदाय को नजरंदाज किए जाने के कारण राजकुमार वेरका नाराज हो गए थे। अभी यह मामला पूर्ण रूप से शांत भी नहीं हुआ था कि छह बार के विधायक राकेश पांडे और चार-चार बार के विधायक अमरीक सिंह ढिल्लों और रणदीप सिंह नाभा ने विधानसभा की कमेटियों से इस्तीफा दे दिया।

पार्टी ने नजरंदाज किया : राकेश पांडे

राकेश पांडे का कहना है कि पार्टी ने उनकी वरिष्ठता को सिरे से नजरंदाज किया। इस स्थिति में विधानसभा की कमेटी की सदस्य रहने का कोई औचित्य नहीं रह जाता है। मैं मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, ब्रह्म मोहिंदरा के बाद सदन में ऐसा विधायक हूं जो कि 1999 का उपचुनाव और पांच चुनाव जीत चुका हूं। छह जीत के बावजूद पार्टी ने वरिष्ठता का ध्यान नहीं रखा। राकेश पांडे एक उप चुनाव और उसके बाद 1992, 1997, 2002, 2012 और 2017 का चुनाव जीते।

शाहकोट जाऊंगा चुनाव प्रचार के लिए : ढिल्लों

समराला के विधायक अमरीक सिंह ढिल्लों का कहना है चार बार विधानसभा चुनाव जीतने के बावजूद पार्टी ने उनकी वफादारी मान नहीं किया। इसलिए विधानसभा की कमेटी से इस्तीफा दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि वह कांग्रेसी हैं और मंगलवार को शाहकोट में चुनाव प्रचार के लिए जाएंगे और पार्टी के लिए वोट मांगेंगे। साथ ही ढिल्लों ने कहा कि वरिष्ठता का ध्यान पार्टी ने नहीं रखा तो चेयरमैनशिप लेकर उनकी कोई रुचि नहीं है। अमरीक सिंह ढिल्लों 1997, 2002, 2012 और 2017 का विधान सभा चुनाव जीते।

मुख्यमंत्री को क्या दिख नहीं रहा पार्टी में क्या चल रहा: नाभा

रणदीप सिंह नाभा का मंत्री न बनाए जाने से काफी खफा हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को दिख नहीं रहा है कि पार्टी में क्या चल रहा है। वरिष्ठ कांग्रेसियों को नजरंदाज किया जा रहा है, जबकि कई ऐसे विधायकों को मंत्री बनाया गया है जो कि चुनाव से पहले पार्टी में आए या कुछ समय पहले दूसरी पार्टी से थे। आज वह मंत्री है। रणदीप सिंह नाभा 2002 से लेकर 2017 तक लगातार चुनाव जीतते आ रहे है। 2002 का चुनाव वह नाभा से जीते थे। 2007 में नाभा सीट रिजर्व होने के कारण वह अमलोह से लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं।

यह भी है नाराजगी का वजह

चुनाव से पहले मनप्रीत बादल, नवजोत सिंह सिद्धू कांग्रेस में आए और इन दोनों को ही पार्टी ने मंत्री बनाया, जबकि नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी को वेयरहाउस का चेयरपर्सन बनाया गया। वहीं, चरणजीत सिंह चन्नी 2007 में चमकौर साहिब से आजाद जीते थे। बाद वह कांग्रेस में आ गए थे और कांग्रेस के टिकट पर 2012 और 2017 का चुनाव जीते।

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