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उत्तराखंड के इस युवक ने जल संरक्षण के लिए किया कुछ ऐसा

देहरादून: ग्रामीण ने गांव में दूर से पानी पहुंचाया और जल संरक्षण की मिसाल पेश की। अब वह पानी से कई उद्योगों को चला रहे हैं। यह उनकी इनकम का जरिया भी बन गया। आमतौर में हम अव्यवस्थाओं का दोष सरकार पर डालकर अपनी जिम्मेदारी से भी पल्ला झाड़ लेते हैं। वहीं, कुछ लोग इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाकर सरकार को तो आइना दिखाते ही है साथ ही समाज के लिए भी प्रेरणास्रोत का काम करते हैं। उत्तराखंड के इस युवक ने जल संरक्षण के लिए किया कुछ ऐसा

उनमें से ही एक हैं नागल हटनाला ग्राम पंचायत वांडावाली गांव के निवासी 65 वर्षीय बुजुर्ग आलम सिंह कंडारी। जल संचय की मुहिम में वर्षों से लगे कंडारी आज अपने परिवार के साथ गांव के लोगों को भी लाभांवित कर रहे हैं। 75 लाख लीटर क्षमता के हौज में जलस्रोत के पानी का संचय पर कंडारी  इसका उपयोग पनचक्की चलाने, बिजली उत्पादन और मछली पालने में भी कर रहे हैं। जिससे उन्हें आर्थिक लाभ भी हो रहा है। आलम सिंह कंडारी बताते हैं करीब 42 वर्ष पूर्व जब गांव में पेयजल लाइन नहीं थी। तब लोग दूर-दूर जाकर पानी लाते थे। पानी के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता था। 

पानी की दिक्कत को देखकर उन्होंने इसके समाधान के लिए अपने खेत में एक हौज बनवाया। उन्होंने बताया कि गांव के आसपास कई जलस्रोत मौजूद थे। उनमें से करीब डेढ़ किमी दूर स्थित एक जलस्रोत को उन्होंने पाइप लाइन के माध्यम से हौज तक जोड़ा। इस काम के लिए उन्होंने अपनी जाम पूंजी तक लगा दी। कंडारी ने बताया कि इस दौरान परिजनों को आर्थिक परेशानियों से भी जूझना पड़ा, लेकिन उन्होंने हमेशा उनका साथ दिया। उन्होंने बताया उस समय उनकी मुहिम में गांव वालों ने साथ नहीं दिया, लेकिन अब सब उनके प्रयास की सराहना करते हैं।

जल संचय ने आमदनी के भी खोले रास्ते

जल संचय की इस मुहिम से उनकी पानी की दिक्कत तो दूर हुई साथ ही यह उनके आर्थिक लाभ का भी साधन बना। कंडारी बताते हैं हौज में पर्याप्त पानी होने के कारण वह खेतों में सब्जी उत्पादन भी कर रहे हैं, साथ ही मछली पालन और  पनचक्की के प्रयोग से वह आटा और मसाले पीसने का काम भी करते हैं। 

पेयजल किल्लत में ग्रामीणों की करते हैं मदद

गर्मियों के दिनों में जब गांव में पेयजल किल्लत होती है तो ग्रामीणों को पानी उपलब्ध कराकर उनकी मदद भी करते हैं। ग्रामीण शिवराज, पदम सिंह भंडारी, सूरजमणि और गजेंद्र ने बताया कि जरूरत पड़ने पर वे लोग कंडारी के बनाए हौज से पानी लेकर जरूरत पूरी करते हैं। उन्होंने कहा कि यह हौज उनके लिए काफी मददगार साबित होता है।

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