बिहार में इस बार फिर हुआ दो गुटों में महाभारत

पटना। मधेपुरा संसदीय क्षेत्र का इतिहास बताता है कि यादव मतदाता सारे समीकरणों पर भारी हैं। 1967 में क्षेत्र के गठन से अबतक यहां से जितने सांसद चुने गए, वे सब इसी समुदाय से आते हैं। एक-दो अपवादों को छोड़कर मुख्य प्रतिद्वंद्वी भी यादव ही रहते आए हैं। अबकी फिर इसी समुदाय के दो नेताओं में लड़ाई है। दोनों पुराने प्रतिद्वंद्वी भी हैं।बिहार में इस बार फिर हुआ दो गुटों में महाभारत

जदयू से अलग होने के बाद शरद यादव ने मधेपुरा से ही चुनाव लडऩे का एलान कर रखा है। दूसरी ओर स्थानीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव पहले से सक्रिय हैं। जाहिर है, मुकाबला कठिन होगा। पिछले चुनाव में पप्पू ने शरद को लगभग 50 हजार वोटों से मात दी थी। 

इस बार के हालात अलग हैं। 2014 में पप्पू यादव राजद के प्रत्याशी के रूप में मैदान में थे। उनके साथ लालू की भी ताकत थी। इस बार पप्पू अपने बूते शरद से मुकाबला करेंगे। ऐसे में पप्पू के प्रभाव की परीक्षा भी हो जाएगी। पप्पू मिशन में जुटे हैं।

मिलने-मिलाने और वक्त पर अपनों के काम आने का सिलसिला तो उनका वर्ष भर जारी रहता है। चुनाव का मौसम आने वाला है तो विधानसभा वार मीटिंग भी कर रहे हैं। पेंच को कस रहे हैं। 

अब शरद की बात। जदयू से अलग होने के बाद उन्होंने लोकसभा पहुंचने का रास्ता बना लिया है। नई दोस्ती कर ली है।

पिछली बार जिन वजहों से पप्पू के सामने पस्त हो गए थे, उन्हें दूर कर लिया है। इतना करने के बाद शरद ने पर्दा उठा दिया है। एलान कर दिया है कि मधेपुरा से महागठबंधन के वही प्रत्याशी होंगे। राजद खेमे से भी खबर आ रही है कि लालू भी मान गए हैं। मुस्लिम-यादव बहुल क्षेत्र में शरद जैसे समाजवादी नेता को इससे ज्यादा और क्या चाहिए। सो वह इत्मीनान हैं, किंतु पप्पू परेशान हैं। 

पप्पू की परेशानी भाजपा-जदयू के गठबंधन से ही दूर हो सकती है। राजग ने अगर समर्थन दे दिया तो दूसरे पक्ष की परेशान बढ़ सकती है, क्योंकि शरद यहां जिस लालू को अपना वोट बैंक समझ रहे हैं, वह भी कभी यहां से हार चुके हैं। 1999 में खुद शरद ने ही लालू को हराया था।

स्पष्ट है कि राजग का साथ मिलने पर पप्पू भी पहलवान बन सकते हैं। पेंच दोनों तरफ है। पिछली बार भाजपा ने शरद और पप्पू से मुकाबले के लिए विजय कुमार सिंह पर दांव लगाया था। तीसरे नंबर पर रहे। पत्नी रेणु कुशवाहा का प्रभाव भी काम नहीं आया। रेणु इसी संसदीय सीट के बिहारीगंज की विधायक और राजग की पूर्व सरकार में मंत्री थी। विजय फिर भी विजय से दूर रहे। इसीलिए विजय को ज्यादा उम्मीद नहीं है। सक्रियता कम है। 

लालू-शरद भी टकरा चुके हैं यहां 

बीपी मंडल, लालू प्रसाद, शरद यादव और अब पप्पू यादव तक सभी की जड़ों का वास्ता एक ही समुदाय से रहा है। यहां राजद प्रमुख लालू प्रसाद और शरद यादव एक-दूसरे को एक-एक बार हरा चुके हैं। 1999 में शरद से लालू हार गए थे, लेकिन अगले ही चुनाव में 2004 में लालू ने शरद को पछाड़ दिया था। हालांकि बाद में लालू ने दो सीटों से जीतने के कारण मधेपुरा छोड़ दिया था। यहां से राजेंद्र प्रसाद यादव और महावीर प्रसाद यादव भी सांसद बन चुके हैं। 

सत्ता संग्राम -मधेपुरा संसदीय क्षेत्र

2014 के महारथी और वोट 

राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव : राजद : 368937

शरद यादव : जदयू : 312728

विजय कुमार सिंह : भाजपा : 252534

विधानसभा क्षेत्र : आलमनगर, मधेपुरा, सहरसा, बिहारीगंज, सोनबरसा, महिषी 

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