ये है लालू-राबड़ी 45 साल का सफर, हैं दोनों एक-दूसरे के लिए खास

पटना। बिहार के राजनीति की सबसे हिट और पॉपुलर जोड़ी की बात करें तो वो है लालू-राबड़ी की एवरग्रीन जोड़ी, जिनकी शादी की को 45 साल हो चुके हैं। एक जून 1973 को अपने से 11 साल छोटी राबड़ी से लालू ने सात फेरे लिए थे। आज भले ही लालू, राबड़ी से दूर हैं लेकिन अपने 45 साल के सफर में अच्छे-बुरे दिनों में दोनों ने एक-दूसरे का साथ पूरी मजबूती से दिया है और इसी वजह से ये सदाबहार जोड़ी बिहार का पॉवर कपल कही जाती है।ये है लालू-राबड़ी 45 साल का सफर, हैं दोनों एक-दूसरे के लिए खास

लालू-राबड़ी बने एक दूजे के लिए

राजद अध्यक्ष लालू यादव और राबड़ी की व्यक्तिगत जिंदगी जितनी साधारण रही है उनका राजनीतिक सफर उतना ही दिलचस्प रहा है। अपनी बेबाकी और मसखरी भरे अंदाज की वजह से लालू की अगर अपनी अलग ही पहचान है तो हर हाल में राबड़ी का मुस्कुराता चेहरा और बात करने का गंवई अंदाज, पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए प्यार उन्हें अन्य लोगों से जुदा करता है।

राजनीतिक जीवन से इतर व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो लालू ने एक पति के रुप में पत्नी राबड़ी को इज्जत, प्यार और भरपूर सम्मान दिया तो राबड़ी ने भी एक सच्चा हमसफर और खुद को एक अच्छी पत्नी के रुप में लालू के सम्मान और उनकी इच्छा को सर्वोपरि माना।

एक जून 1973 में हुई थी लालू-राबड़ी की शादी

गरीब परिवार में जन्मे लालू की शादी मध्य वर्गीय परिवार में जन्मी राबड़ी से एक जून साल 1973 में हुई थी। राबड़ी लालू से 11 साल छोटी थी। लालू जहां एमए पास और एलएलबी हैं तो वहीं राबड़ी 8वीं ही पास हैं। जब उनकी शादी हुई थी तब लालू मिट्टी के बने घर में रहते थे और बारिश के दिनों में घर से पानी टपकता था लेकिन राबड़ी ने कभी लालू से कोई शिकायत नहीं की। शादी के दौरान लालू को ससुराल से 20 हजार रुपए नकद, पांच बीघा जमीन और दो जर्सी गाय के साथ ही ज्वेलरी के रुप में सोना भी मिला था।

फिल्मी कहानी से कम नहीं लालू-राबड़ी की लव स्टोरी

उनकी शादी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही। 25 साल के लालू और 14 साल की राबड़ी की शादी तो अरेंज मैरिज थी। लेकिन हंगामा लव मैरेज से भी ज्यादा हुआ। कारण लालू ठहरे साधारण परिवार से और राबड़ी के मायके वालों के पास थोड़ी धन-संपत्ति थी। राबड़ी के घर वाले इस शादी को तैयार नहीं थे। क्योंकि लालू के पास एक-एक पैसे की तंगी थी। घर जो था वो भी झोपड़ी का, लेकिन राबड़ी ने कभी कोई शिकायत नहीं की। लालू अपनी पत्नी राबड़ी के इस व्यवहार के कारण ही उनके दीवाने हैं।

राबड़ी बताती हैं कि उनके वैवाहिक जीवन की शुरुआत के समय से ही उनके पति न्यायिक हिरासत में थे। शादी के तीन साल बाद उनका गौना हुआ था, लेकिन इसी बीच इमरजेंसी के खिलाफ छात्र आंदोलन के दौरान 1974 से 1977 के दरम्यान लालू कई बार गिरफ्तार हुए और जेल गए।  

शादी के शुरुआती दिनों से ही लालू को जेल जाते देखा

राबड़ी ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि मैंने अपनी पूरी जिंदगी में अपने पति को संघर्ष करते और जेल जाते ही देखा है। चारा घोटाले के मामलों में साहब को किसी न किसी बहाने जेल में बंद कर दिया जाता था और मुझे अपने छोटे-छोटे बच्चों की देखभाल करनी पड़ती थी, जिन्हें यह भी पता नहीं था कि जेल क्या होती है या उनके पिता उनके साथ क्यों नहीं रहते हैं? मुझे सरकार और परिवार दोनों की देखभाल करनी पड़ती थी।

लालू-राबड़ी के बीच की गजब है केमिस्ट्री

दोनों के बीच की केमिस्ट्री इतनी अच्छी है कि दोनों शायद एक-दूसरे के मन को पढ़ना जानते हैं। तभी तो विपरीत परिस्थितियों में भी राबड़ी लालू यादव के लिए हमेशा एक मजबूत दीवार की तरह खड़ी रहीं तो वहीं लालू भी राबड़ी की सलाह बिना कोई काम नहीं करते। कई बार तो लालू को  राबड़ी की जिद के आगे भी झुकना पड़ा है। 

लालू की जिंदगी में पत्नी राबड़ी ने कई रोल अदा किए हैं। एक पत्नी, बच्चों की आदर्श मां तो वहीं भारतीय राजनीति में अचानक सत्ता की विरासत थामकर बिहार की पहली मुख्यमंत्री बन परिवार, पार्टी और सत्ता एक साथ चलाने की। जब अचानक चारा घोटाला मामले में सीबीआइ की ओर से दाखिल चार्जशीट के बाद लालू प्रसाद को मुख्यमंत्री पद छोडऩे के लिए मजबूर होना पड़ा और राजनैतिक हलकों से पूरी तरह अनजान राबड़ी देवी को बिहार के मुख्यमंत्री के पद पर बिठा दिया गया और ठीक से बोल नहीं पाने वाली राबड़ी ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई।

घर-परिवार संभालने वाली राबड़ी को लालू ने बना दिया सीएम

राबड़ी के लिए यह बिल्कुल नाटकीय दृश्य था जब मात्र आठवीं पास घर-परिवार को संभालने वाली नौ बच्चों की मां राबड़ी देवी को 25 जुलाई, 1997 को बिहार का मुख्यमंत्री बना दिया गया था। वे बिहार की पहली महिला और अकेली मुख्यमंत्री हैं जो आंखों में आंसू भरे अपने शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचीं थीं।

2000 में आरजेडी ने विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की। राबड़ी देवी फिर से मुख्यमंत्री बनी। उस वक्त भी राबड़ी देवी को खुद को संभालना था और बच्चों को भी। साथ ही सत्ता और अपनी ही पार्टी को भी एकजुट रखने की बड़ी जिम्मेदारी उन पर थी। लेकिन अपने पति की विरासत को संभालने और उसे बचाए रखने की जिम्मेदारी भी राबड़ी ने बखूबी निभाई।

बहुत सुलझी और मजबूत महिला हैं राबड़ी

उस दौरान लिए गए इंटरव्यू के दौरान राबड़ी कहती ”हां, मुझे अकेलापन लगता है. कौन पत्नी अपने पति के जेल जाने पर खुश रह सकती है? लालू के जेल में होने के जिक्र पर राबड़ी एक पल के लिए उदास हो जाती और उनकी आंखें नम दिखतीं, लेकिन तुरंत खुद को संभाल लेतीं और चेहरे पर रूखी मुस्कान बिखेरते हुए कहतीं, ”मुझे तो उनके जेल जाने की आदत-सी हो गई है।” 1997 से दिसंबर, 2001 तक लालू को छह बार न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका था। उस दौरान राबड़ी देवी ही बिहार की मुख्यमंत्री थीं, लेकिन वे कभी अपने पति को देखने जेल नहीं गईं। पार्टी के लोगों का कहना है कि वे उन्हें ऐसी हालत में नहीं देख सकतीं।

लालू के हर संकट में साथ दिया राबड़ी ने

यह बात अलग है कि लालू ने पत्नी से कोई प्रेरणा ली है या नहीं,  पर संकट की स्थिति में उन्होंने हमेशा राबड़ी का सहारा लिया और उसके सकारात्मक नतीजों का लाभ भी उठाया। 2010 के विधानसभा चुनाव में हारने के बाद राबड़ी एक तरह से रिटायर हो गई थीं, लेकिन लालू ने मई, 2012 को उन्हें विधान परिषद के सदस्य के रूप में नामांकित कर राजनीति की मुख्यधारा में वापस खींच लिया और आज राबड़ी देवी अपने संतुलित बयान से जहां विरोधियों के सवालों का जवाब देती नजर आती हैं तो वहीं पार्टी को एकजुट रखने में अपनी भूमिका बखूबी निभाती हैं।

पति की खुशी के लिए छोड़ दिया मायका

एक-दूसरे की समझ ही कहेंगे कि हर महिला को अपना भाई और मायका प्यारा होता है लेकिन कुछ राजनीतिक वजहों से लालू प्रसाद ने अपने ससुराल पक्ष से संबंध तोड़ लिया और धीरे-धीरे दोनों परिवारों के बीच बातचीत और आना-जाना भी बंद हो गया था। लालू प्रसाद ने खुद ही अपने साले प्रभुनाथ, साधु और सुभाष यादव के आने-जाने पर पाबंदी लगा दी तो पति के लिए राबड़ी ने भी अपने भाईयों से संबंध विच्छेद कर लिया।

हर मौके पर लालू देते हैं राबड़ी को रेड रोज

लालू अपनी पत्नी राबड़ी को हर खुशी के मौके पर लाल गुलाब का फूल देते हैं। चाहे उनका जन्मदिन हो या दोनों की शादी की सालगिरह, लेकिन आज राबड़ी लालू से दूर हैं तो जाहिर है उन्हें बहुत याद कर रही होंगी क्योंकि राबड़ी जब भी लालू के लिए व्रत रखतीं हैं तो लालू कहीं भी हो उनका व्रत खुलवाने के लिए तय समय पर अपने घर जरूर पहुंच जाते हैं। इसी तरह छठ पूजा के दौरान भी लालू घर पर ही होते हैं। एक टीवी कार्यक्रम में राबड़ी ने बताया कि लालू हीरो हैं। उनके फैन तो पूरे देश में हैं, लेकिन जब कोई उन्हें देखता है तो मुझे अच्छा नहीं लगता है।

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