मोदी सरकार ने कैदियों को दिया ये बड़ा तोहफा, सजा काट रही महिलाएं तथा 60 साल के पुरुषों…

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देशभर की जेलों में बंद 55 साल या उससे अधिक की ऐसी महिला कैदियों और 60 साल या उससे अधिक के ऐसे पुरुष कैदियों जिन्होंने अपनी आधी सजा पूरी कर ली है उन्हें विशेष माफी योजना के तहत रिहा करने का आज फैसला किया. इसका लाभ कुछ अन्य श्रेणी के कैदियों को भी मिलेगा.मोदी सरकार ने कैदियों को दिया ये बड़ा तोहफा, सजा काट रही महिलाएं तथा 60 साल के पुरुषों...

केंद्रीय विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद ने संवाददाताओं को बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महात्‍मा गांधी की 150 वीं जयंती के अवसर पर कारागारों से कैदियों को विशेष माफी देने के प्रस्‍ताव को मंजूरी दी. हालांकि, दहेज हत्या, बलात्कार, मानव तस्करी और पोटा, यूएपीए, टाडा, मनी लॉन्ड्रिंग, फेमा और अन्य गंभीर अपराधों के दोषी कैदियों को इस योजना के तहत रिहा नहीं किया जाएगा.

तीन चरणों में रिहा होंगे कैदी

कैदियों को विशेष माफी देकर उन्हें तीन चरणों में रिहा किया जाएगा. पहले चरण में कैदियों को 02 अक्‍टूबर, 2018 (महात्‍मा गांधी की जयंती) को रिहा किया जाएगा. दूसरे चरण में कैदियों को 10 अप्रैल, 2019 (चम्‍पारण सत्‍याग्रह की वर्षगांठ) को रिहा किया जाएगा. तीसरे चरण में कैदियों को 02 अक्‍टूबर , 2019 (महात्‍मा गांधी की जयंती) को रिहा किया जाएगा.

55 वर्ष या इससे अधिक की महिला कैदी को फायदा

एक आधिकारिक वक्तव्य में बताया गया कि 55 वर्ष या इससे अधिक की महिला कैदी, आयु 55 वर्ष या इससे अधिक की किन्नर कैदियों और ऐसे पुरुष कैदी जिसकी आयु 60 वर्ष या इससे अधिक हो और जिसने अपनी 50 फीसदी वास्‍तविक सजा अवधि पूरी कर ली हो, उन्हें रिहा किया जाएगा. ऐसे दिव्‍यांग/शारीरिक रूप से 70 प्रतिशत या इससे अधिक अक्षमता वाले कैदी जिन्होंने अपनी 50 फीसदी वास्‍तविक सजा अवधि पूरी कर ली है और ऐसे दोष सिद्ध कैदी जिन्होंने अपनी दो तिहाई (66%) वास्‍तविक सजा अवधि पूरी कर ली है, उन्हें भी रिहा किया जाएगा.

गंभीर अपराध वालों को नहीं मिलेगी माफी

ऐसे कैदियों को विशेष माफी नहीं दी जाएगी जो मृत्‍युदंड की सजा काट रहे हैं अथवा जिनकी मृत्‍युदंड की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया है. इसके अलावा दहेज हत्या, बलात्‍कार, मानव तस्‍करी और पोटा, यूएपीए, टाडा, एफआईसीएन, पॉक्सो एक्‍ट, मनी लॉन्ड्रिंग, फेमा, एनडीपीएस, भ्रष्‍टाचार रोकथाम अधिनियम आदि के तहत दोषियों को रिहा नहीं किया जाएगा. 

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