अपने गुरु भगवान सूर्य की आज्ञा के अनुसार हनुमान शादी के लिए राजी हो गए, लेकिन उन्हें कोई नहीं मिली. तभी भगवान सूर्य ने अपनी परम तेजस्वी पुत्री सुवर्चला से हनुमान को शादी करने की प्रस्ताव दिया. हनुमान और सुवर्चला की शादी हो गई. सुवर्चला परम तपस्वी थींं. शादी होने के बाद सुवर्चला तपस्या में मग्न हो गई. उधर हनुमान जी अपनी बाकी चार विद्याओं के ज्ञान को हासिल करने में लग गए. इस तरह से भगवान हनुमान की शादी जरूर हुई थी, मगर उनका ब्रह्मचर्य कभी नहीं टूटा.

मारुती से कैसे बने हनुमान:
हनुमान जी जब छोटे थे तब एक दिन उनका ध्यान सूर्य पर गया. उन्हें सूर्य एक लाल मीठे फल की तरह लगा. सूर्य को देखते ही हनुमान जी सूर्य को खाने पहुंच गए. जैसे ही उन्होंने सूर्य को खाने के लिए अपना मुंह खोला इंद्र देव ने मारुति पर वज्र प्रहार कर दिया. वज्र जाकर मारुति की हनु यानी कि ठोड़ी पर लगा और तब से ही मारुती
का नाम हनुमान पड़ गया.