बच्चों से जुड़े ये अंधविश्वास हर घर में है कायम, जिनका सच जानना है बेहद

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दोस्तों लोग चाहे जितने भी आधुनिक हो गये हो लेकिन आज भी कुछ ऐसी चीजें हैं जिन्हें लोग बिना सोचे समझे या उसका अंजाम जाने करने लगते हैं. हैरानी की बात तो ये भी होती है कि कुछ अंधविश्वासों लोग बढ़ावा देते हैं और तर्क पैदा कर देते हैं जिसका कोई वैज्ञानिक समाधान भी नहीं होता है.

बच्चों से जुड़े ये अंधविश्वास हर घर में है कायम, जिनका सच जानना है बेहददोस्तों भारत में अभी भी कुछ ऐसे अंधविश्वास हैं जिन्हें बड़े तो बड़े लेकिन छोटे बच्चे भी बचपन से देखते, सुनते हैं और फिर उनपर भरोसा करते हैं. अंधविश्‍वास, दुनिया के कोने-कोने में फैले हुए हैं. आज हम आपके लिए एक ऐसे ही अंधविश्वासों के बारे में बताया जा रहा है जो कि बच्चों से जुड़े हुए हैं.

तो चलिए बात करते हैं उन अंधविश्वासों के बारे में :-
बुरी नजर से बचाना :- लगभग हर घर में देखने को मिलता है कि छोटे बच्चों को बुरी नजर से बचाने के लिए काजल लगाया जाता है. अक्सर इसके कारण बच्चों में सीसे का जहर फैलने की सम्भावना होती है. सीसा हड्डियों में जमा हो जाता है और रक्त के निर्माण में अवरोध खड़ा करता है. यह सीसे का दुष्प्रभाव ही है कि इससे लकवा, शारीरिक और मानसिक वृद्धि में रूकावट इत्यादि जैसे लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं.

नवजात को शहद चटाना :- बच्चा पैदा होने के बाद उसे शहद चटाया जाता है. लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए शहद में क्लोस्ट्रिडियम बोटुलिनम नामक जीवाणु के बीजाणु हो सकते हैं. इससे बोटुलिज्म नामक एक दुर्लभ, मगर काफी गंभीर प्रकार की फूड पॉइजनिंग हो सकती है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है जब तक शिशु एक साल का न हो जाए, उसे शहद नहीं दिया जाना चाहिए. एक साल की उम्र के बाद शहद देने में कोई रिस्क नहीं हैं.

तकिये के नीचे चाकू रखना :- बच्चों को रात में चमकने, घबराने की आदत होती है वे रात में कई बार चौंक के उठ जाते हैं. कहा जाता है कि बच्चे बुरे सपनों के कारण नींद में डर जाते हैं ऐसे में बुरे सपनों से दूर रखने के लिए कई लोग तकिये के नीचे चाकू रखते हैं लेकिन यह एक गलत प्रथा है.

बच्चा सो रहा हो तो पंखा न चलाएं :- मान्यता है कि इससे उनकी असामयिक मौत हो सकती है. लेकिन बिना तर्क साबित किए ऐसा करना बच्चों के लिए अच्छा नहीं है. जब बड़े ही गर्मी बर्दाश्त नहीं कर सकते तो बच्चे कैसे कर सकते हैं. गर्मियों में एक सामान्य स्पीड में पंखा चलने से बच्चा ओवरहीटिंग का शिकार नहीं होगा. एक थंब रूल जरूर फॉलो करें कि बच्चे को कपड़े का एक लेयर आपसे ज्यादा पहनाया हो.

लहसुन की माला :- लहसुन की कलियों की माला बनाना और उसे बच्चे के गले में पहनाने से सर्दी दूर हो जाती है. इसमें कोई शक नहीं कि सर्दी-खांसी के लिए लहसुन बहुत प्रभावी नुस्खा है. लेकिन यह तभी लाभकारी है जब इसे खाया जाए. वहीं दूसरी तरफ लहसून के कलियों की माला से सेंसिटिव स्किन पर रैशेस हो सकते हैं.

शिशु के खाने की शुरूआत :- सदियों से चली आ रही प्रथा है कि छह महीने तक मां का दूध और फिर दाल के पानी से अन्न की शुरूआत. लेकिन आपको ये समझना होगा की ये केवल पानी का दूसरा रूप है जिसमें बहुत कम पोषण तत्व होते हैं. हालांकि ये आपके बच्चे के पेट को काफी जल्द भर देगा लेकिन उतनी ही जल्द उसके शरीर से पोषण तत्व निकल भी जाएंगे. दाल के पानी से बेहतर है की आप अपने बच्चे कप मसल कर दाल पिलाएं, इससे उसे ताकत मिलेगी.

 

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