सरकार के इन फैसलों से गदगद हुआ शेयर बाजार, 24 सालों में पहली बार…

बजट से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि इस बार का बजट पिछले 100 वर्षों की तुलना में बिल्कुल अलग होगा. अभी इकोनॉमी के जानकार आंकलन कर रहे हैं कि बजट कैसा है? लेकिन इस बीच भारतीय शेयर बाजार को बजट सबसे ज्यादा पसंद आया है. बजट की घोषणाओं से निफ्टी और सेंसेक्ट में जोरदार तेजी देखने को मिली. 

आंकड़ों के मुताबिक पिछले दो दशक में यानी 20 वर्षों में बजट के दिन इस तरह की शेयर बाजार में तेजी देखने को नहीं मिली थी. कारोबार के अंत में सेंसेक्स 5 फीसदी यानी 2314 अंक बढ़कर 48,600.61 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 646 अंक यानी 4.74 फीसदी चढ़कर 14281 अंक पर बंद हुआ. वहीं बैंक निफ्टी 2523 अंक यानी 8.26 फीसदी बढ़कर 33089 पर बंद हुआ. 

वैसे बजट के दिन सुबह तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत हुई थी. सेंसेक्स 400 अंक से ज्यादा की तेजी के साथ खुला है. जबकि निफ्टी में शुरुआती कारोबार के दौरान 115.45 अंक की तेजी दर्ज की गई थी. लेकिन बजट शुरू होते ही एकतरफा रैली को देखने को मिली. 

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दरअसल सरकार ने बजट में कुछ बड़े ऐलान किए हैं. जो बाजार और निवेशकों को पसंद आए. खासकर बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के लिए बजट में बड़े ऐलान हुए हैं. सरकार ने दो सरकारी बैंकों का विनिवेश, एलआईसी का आईपीओ और बैंकों के री-कैपिटलाइजेशन का फैसला लिया है.

बैड बैंक के गठन पर ऐलान 
बजट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने  BAD Bank की स्थापना करने का ऐलान किया. इस संस्था क गठन Bad Loan की समस्या से जूझ रहे बैंकों को राहत दिलाना है. बैड बैंक एक एसेट रिकंस्ट्रशन कंपनी (ARC) मॉडल पर आधारित होगा. बैड बैंक फाइनेंशियल सिस्टम से डूब चुके कर्जों को निपटाने में अहम भूमिका अदा करेगा. 

इंश्योरेंस सेक्टर में 75 फीसदी तक FDI
केंद्र सरकार ने इंश्योरेंस सेक्टर में विदेशों निवेशकों के लिए बजट में दरवाजे खोल दिए. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण के दौरान बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा (FDI) बढ़ाकर 74 फीसदी करने का ऐलान किया है. पहले 49 फीसदी थी. सरकार के इस फैसले से इंश्योरेंस सेक्टर को काफी बढ़ावा मिलेगा और दूर दराज के इलाकों तक इंश्योरेंस कंपनियों की पहुंच बढ़ सकती है. 

ऑटो स्टॉक्स में तेजी की वजह
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट 2021-22 में पुराने वाहनों को सड़कों से हटाने के लिए ‘स्क्रैप पॉलिसी’ की घोषणा की है. अब 20 साल पुरानी निजी गाड़ियों और 15 साल पुरानी कमर्शियल गाड़ियों को सड़कों पर दौड़ने के लिए फिटनेस टेस्ट पास करना होगा. स्क्रैपिंग पॉलिसी की वजह से नई गाड़ियां आएंगी और नए वाहन ज्यादा माइलेज देंगे. वहीं पुराने वाहनों के बदले ई-वाहनों की खपत भी बढ़ेगी. 

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