मध्यप्रदेश के डाकघरों में नहीं हैं शौचालय, अभी तक सो रहा था विभाग

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भोपाल। केंद्र सरकार देशभर में भले ही स्वच्छता मिशन पर अरबों रुपए खर्च कर जागरूकता फैलाने में जुटी हो, लेकिन मध्यप्रदेश के ज्यादातर डाकघरों में शौचालय की सुविधा तक नहीं है। छोटे शहर व गांवों में तो स्टाफ भी परेशान देखे जा सकते हैं। हालांकि महिलाओं व दिव्यांगों के मामले में अपवादस्वरुप कुछ डाकघरों में यह सुविधा है। फिर भी इतने सालों बाद विभाग ने अब 22 शहरों में दिव्यांगों के लिए शौचालय बनाने का निर्णय लिया है।

मध्यप्रदेश के डाकघरों में नहीं हैं शौचालय, अभी तक सो रहा था विभागराजधानी सहित बड़े शहरों के ज्यादातर डाकघर ऐसे हैं जहां आने वाले नागरिकों को भी यह सुविधा नहीं मिलती। महिलाओं और दिव्यांगों के लिए तो अब तक सोचा ही नहीं गया। देशभर में चल रहे स्वच्छता मिशन को लेकर प्रदेश के गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन देशभर में फैले नेटवर्क के कारण अहम स्थान रखने वाले केंद्र सरकार के प्रमुख डाक विभाग ने अब इस संबंध में पहल की है।

प्रदेश में हैं 1017 डाकघर

 

मप्र में छोटे-बड़े 1017 डाकघर हैं, लेकिन ज्यादातर में शौचालय की सुविधा नहीं हैं। डाक विभाग अपने निजी भवनों से इसकी शुरुआत कर रहा है। मप्र में डाक विभाग ने 22 शहरों के हेड पोस्ट ऑफिस में दिव्यांगों के लिए शौचालय बनाने का निर्णय लिया है। राजधानी सहित कुछ बड़े डिविजन में डाक विभाग अब महिलाओं के लिए भी यह सुविधा शुरू कर रहा है। इसकी शुरुआत बड़े डाकघरों से होगी।

इन शहरों को किया शामिल

भोपाल हेड ऑफिस एवं जीपीओ, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, रीवा, दमोह, शहडोल, होशंगाबाद, विदिशा, इंदौर जीपीओ, धार, जबलपुर, रतलाम, मंदसौर, गुना, उज्जैन, शाजापुर, मुरैना एवं ग्वालियर के मुरार व लश्कर हेड पोस्ट ऑफिस में पहली बार दिव्यांगों के शौचालय की सुविधा शुरू होगी।

दिव्यांगों के लिए 22 शहरों में

डाक विभाग ने प्रदेश के 22 हेड पोस्ट ऑफिस में दिव्यांगों के लिए शौचालय बनाने का निर्णय किया है। अन्य शहरों में भी विभाग अपने भवनों में यह सुविधा विकसित कर रहा है।

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