दिल्ली विधानसभा के विशेष सत्र का दूसरा दिन आज, इन मुद्दों पर बात के आसार

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नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा के तीन दिवसीय विशेष सत्र के दूसरे दिन गुरुवार को दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने का प्रस्ताव पर चर्चा होगी। इससे पहले बुधवार से विधानसभा का विशेष शुरू हो गया। सत्ता पक्ष की ओर से उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सदन में चर्चा के लिए दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने का प्रस्ताव रखा। तीन दिन तक चर्चा कराकर इसे पास कराने के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा।दिल्ली विधानसभा के विशेष सत्र का दूसरा दिन आज, इन मुद्दों पर बात के आसार

इस पर चर्चा करने के दौरान उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार की विभिन्न योजनाओं का जिक्र किया तथा इनके शुरू नहीं हो पाने का ठीकरा उपराज्यपाल अनिल बैजल के सिर फोड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार के हर कार्य में उपराज्यपाल अड़ंगा लगाते हैं। उनका काम सिर्फ दिल्ली सरकार के कार्य को रोकना है, मगर यदि दिल्ली पूर्ण राज्य होती तो उपराज्यपाल कुछ नहीं कर पाते।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि आज दिल्ली विकास प्राधिकरण दिल्ली के विकास के लिए काम नहीं कर रहा है। वह सिर्फ प्रॉपर्टी डीलर बनकर बैठा है। उसे दिल्ली की जनता से कोई लेना देना नहीं है। आज दिल्ली सरकार के पास पुलिस नहीं है। दिल्ली में अपराध बढ़ रहे हैं। मगर दिल्ली सरकार कुछ नहीं कर सकती है। इसके अलावा घर पर ही राशन पहुंचाने की योजना दिल्ली सरकार लागू नहीं कर पाई है। विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्र भी घर पर पहुंचाने की योजना लागू नहीं हो सकी। हमारी सरकार ने जनलोकपाल बिल पर काम करना शुरू किया। मगर पता चला कि यह तो केंद्र सरकार पास करेगा। यही अगर उत्तर प्रदेश होता तो वहां बिल पास हो चुका होता।

जनलोकपाल इसलिए पास नहीं हो पाया है क्योंकि दिल्ली के पास पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं है। जनलोकपाल केंद्र सरकार के पास पड़ा है। जनलोकपाल लागू होता तो दिल्ली के कई अधिकारी आज जेल में होते। उन्होंने कहा कि हमने मोहल्ला सभा बनाकर दिल्ली के विकास में आम नागरिकों को भागीदार बनाने की योजना बनाई थी। मगर उपराज्यपाल ने इसे रोक दिया। हमने सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना पर काम शुरू किया। मगर उपराज्यपाल ने कमेटी बनाकर इस पर भी अड़ंगा लगा दिया है। राजधानी में आज जो व्यवस्था लागू है इस व्यवस्था में दिल्ली में रहने वाले वोटर के पास दूसरे राज्यों के वोटर से पावर कम है।

कपिल ने पूछा, सदन में क्यों नहीं पहुंचे केजरीवाल

सत्र के पहले दिन सदन में मुख्यमंत्री केजरीवाल नहीं पहुंचे। इस पर कपिल मिश्र ने कहा कि सरकार दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने को महत्वपूर्ण मान रही है तो केजरीवाल क्यों नहीं आएं। मिश्र ने उस समय हंगामा किया जब सिसोदिया ने कहा था कि पूर्ण राज्य का दर्जा न होने से जनलोकपाल लागू नहीं हो सका है। इस पर कपिल मिश्र ने कहा कि आप में लोकपाल कब लागू होगा। यहां तो इस दर्जे की जरूरत नहीं है।

पूर्ण राज्य के दर्ज की मांग को विपक्ष ने AAP की राजनीतिक ड्रामेबाजी बताया 

दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की आप सरकार की मांग को विपक्ष ने राजनीतिक ड्रामेबाजी बताया है। दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि तीन वर्ष चार माह बीत जाने के बाद सरकार अपनी विफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने का प्रस्ताव लेकर आई है। यह आम जनता के खिलाफ एक साजिश है। सरकार अपनी उपलब्ध शक्तियों का प्रयोग करते हुए जो उपलब्धियां हासिल कर सकती थीं, उसमें वह विफल हो चुकी है। सरकार बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा के क्षेत्र में बुरी तरह नाकाम रही है। न कोई नए स्कूल खुले हैं, न कोई अस्पताल, न कोई पुल बने हैं। इसलिए नाकामियों को छुपाने के लिए दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का शिगूफा छोड़ दिया है।

वहीं विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा है कि हम दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने के विरोधी नहीं हैं। मगर हम इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए उठाया जाना मानते हैं और इसका विरोध करते हैं। अब लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं तो लोगों का ध्यान भटकाने के लिए अब इस पर चर्चा करा रही है।

बिजली के बिलों में वृद्धि को लेकर सदन में हंगामा

विधानसभा के सदन में विपक्ष के नेता तथा विपक्ष के अन्य सदस्यों मनजिंदर सिंह सिरसा तथा जगदीश प्रधान ने बिजली के बिलों में बेतहाशा वृद्धि के कारण किसानों पर पड़ रहे आर्थिक बोझ को लेकर हंगामा किया। उन्होंने कहा कि किलोवाट पर बढ़ी फिक्सड दरों की मार से किसान बुरी तरह त्रस्त हैं। विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि 1 अप्रैल को प्रति किलोवाट फ्क्सिड दरों के बढ़ने से पहले किसानों से 20 रुपये प्रति किलोवाट की फ्क्सिड दर से चार्ज लिया जाता था। सरकार ने इसे बढ़ाकर 125 रुपये प्रति किलोवाट कर दिया। किसानों को पांच महीने खेती के लिए बिजली की आवश्यकता होती है, परन्तु उन्हें बढ़ा हुआ बिल 12 महीने देना पड़ रहा है। 

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