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नगर निगम महापौर की सीट अनारक्षित होने से दावेदारों की बांछे खिली

देहरादून: नगर निगम चुनाव में महापौर के लिए दावेदारी ठोक रहे भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों को राहत मिल गई। अब तक असमंजस बना हुआ था कि सीट महिला या जाति विशेष आरक्षित न हो जाए। यही वजह है कि दावेदारों के तेवर पिछले कुछ दिनों से ठंडे पड़े हुए थे, लेकिन सीट अनारक्षित घोषित होते ही दावेदार सोशल मीडिया पर एकाएक सक्रिय हो गए हैं। साथ ही फील्ड मूवमेंट भी बढ़ा दिया है। दावेदारों की लंबी फेहरिस्त पर भाजपा में पशोपेश की स्थिति है, जबकि कांग्रेस इस मायने में सीमित दावेदारों के साथ सुकून जरूर महसूस कर रही। नगर निगम महापौर की सीट अनारक्षित होने से दावेदारों की बांछे खिली

आगामी नगर निकाय चुनाव में देहरादून नगर निगम में महापौर पद पर भाजपा का चेहरा कौन होगा, यह तो अभी तय नहीं। मगर संभावित दावेदार टिकट पाने के लिए सभी पैंतरे अपना रहे। महापौर का टिकट भाजपा में किसे मिलना चाहिए, इसे लेकर सोशल मीडिया पर बाकायदा चुनाव कराया जा रहा है। 

संभावित दावेदार पूर्व महानगर अध्यक्ष उमेश अग्रवाल और मुख्यमंत्री के करीबी सुनील उनियाल गामा की दावेदारी को लेकर सोशल मीडिया पर वोटिंग चल रही है। इसमें पूछा जा रहा कि टिकट किसे दिया जाए व समर्थक अपने नेता के लिए वोटिंग कर रहे हैं। उमेश और गामा अपने टिकट को पक्का मानकर चल रहे हैं। 

इसी दौड़भाग में महानगर अध्यक्ष विनय गोयल व वरिष्ठ भाजपा नेता अनिल गोयल, रविंद्र कटारिया, जोगेंद्र पुंडीर, नीलम सहगल व वरिष्ठ आंदोलनकारी नेता सुशीला बलूनी के नाम भी दावेदारों में हैं। 

आश्चर्य की बात ये है कि आधा दर्जन पार्षद भी टिकट की दावेदारी ठोक रहे। दावेदारों के पोस्टर व बैनर आजकल शहर की सड़कों पर हर तरफ देखे जा रहे। उमेश अग्रवाल के नाम के पोस्टर हर ऑटो व विक्रम समेत सिटी बसों पर नजर आ रहे, जबकि गामा ने शहर से सटे उन इलाकों का रुख किया हुआ है जो ताजा-ताजा शहरी क्षेत्र में शामिल हुए हैं। 

दोनों के पोस्टर में शहर की स्वच्छता व उनकी सोच को फोकस किया गया है। पहले अग्रवाल दौड़ आगे माने जा रहे थे, लेकिन इन दिनों संगठन में उनकी दूरी को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। वजह साफ है कि पहले धर्मपुर सीट पर उनका टिकट काटा और बाद में महानगर अध्यक्ष पद से भी साइड-लाइन कर दिया गया। महापौर के टिकट के लिए दावेदारों की लंबी कतार देख अग्रवाल के समर्थक सोशल मीडिया पर उनका प्रचार कर रहे हैं। 

कहीं लौट न आएं चमोली 

चर्चा तेज है कि कहीं निवर्तमान महापौर विनोद चमोली ही तीसरी बार दावेदारी न ठोक दें। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो ऐसी प्रबल संभावनाएं है कि चमोली विधायकी से इस्तीफा देकर दोबारा महापौर के दावेदार बन सकते हैं। कैबिनेट मंत्री न बनने की वजह से चमोली की टीस किसी से छुपी नहीं है। उनकी यह नाराजगी गाहे-बगाहे सामने आती भी रही है। अगर ऐसा हुआ तो भाजपा के दावेदारों के सभी समीकरण बिगड़ सकते हैं। 

कांग्रेस में अग्रवाल या बिष्ट 

कांग्रेस में यूं तो दावेदारों की संख्या सीमित है, लेकिन माना जा रहा कि पार्टी पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल या हीरा सिंह बिष्ट में से किसी एक पर दांव खेल सकती है। इसके अलावा पिछले चुनाव में प्रत्याशी रहे सूर्यकांत धस्माना के साथ ही पूर्व विधायक राजकुमार, महानगर अध्यक्ष पृथ्वीराज चौहान, महानगर महिला अध्यक्ष कमलेश रमन व स्व. सांसद मनोरर्मा शर्मा की बहू आशा मनोरमा डोबरियाल समेत कुल 14 नेता दावेदारी कर रहे हैं।

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