दिल्ली में लगा कूड़े का पहाड़, SC का एलजी पर कटाक्ष कहा…

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली में कचरा प्रबंधन को लेकर गुरुवार को फिर सुनवाई हुई। इस दौरान उपराज्यपाल की ओर से दिए गए हलफनामे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, दिल्ली सरकार के साथ उपराज्यपाल को भी कड़ी फटकार लगाई है। सुनवाई के दौरान उपराज्यपाल की तरफ से हलफनामे में कहा गया कि पूर्वी दिल्ली में गाजीपुर, दक्षिणी दिल्ली में ओखला और उत्तरी दिल्ली में भलस्वा लैंडफिल साइट्स हैं, उपराज्यपाल अपने स्तर पर लगातार बैठकें कर रहे हैं।दिल्ली में लगा कूड़े का पहाड़, SC का एलजी पर कटाक्ष कहा...

इस पर नाराज सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि हमें कार्रवाई की समयसीमा बताइए। साथ ही नाराजगी के अंदाज में कहा कि 25 बैठक हुई हैं या फि 50 कप चाय पी गई है, इससे हमें मतलब नहीं। इसी के साथ कोर्ट ने कहा कि आप एलजी हैं, आपने बैठक की है इसलिए हमें टाइमलाइन और स्टेटस रिपोर्ट दें। कोर्ट ने यह भी कहा कि एलजी इस मुद्दे पर आयोजित होने वाली बैठकों में शामिल नहीं हो रहे हैं, साथ ही कटाक्ष करते हुए कहा- आप (एलजी) कहते हैं कि मेरे पास पावर है, मैं सुपरमैन हूं।

 सुनवाई के दौरान नाराज कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाते हुए पूछा कि आखिर तीन लैंडफिल साइटों का कूड़ा कब तक उठवाएंगे? लैंडफिल साइट पर पड़े कूड़े की ऊंचाई कुतुब मीनार से मात्र 8 मीटर कम रह गई है। आप लोग इसके लिए क्या कर रहे हैं। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि एलजी हाउस कूड़ा प्रबंधन को लेकर अपना दायित्व निभाने में नाकाम रहा है, साथ ही कहा कि उसने इस मुद्दे पर प्रभावी कदम भी नहीं उठाए हैं। यहां पर बता दें कि कूड़ा प्रबंधन के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों के उदासीन रवैये पर नाराजगी जताते हुए मंगलवार को सख्त टिप्पणियां की थीं। कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली में कूड़े के पहाड़ हैं और मुंबई डूब रही है, लेकिन सरकारें कुछ नहीं कर रही हैं।

गौरतलब है कि भारी बारिश से मुंबई की सड़कों पर नदियों-सा नजारा है, जिससे जनजीवन ठप हो गया है। ये सख्त टिप्पणियां न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर व न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने राज्यों के कचरा प्रबंधन मामले में सुनवाई के दौरान की थीं। पीठ ने कहा था कि जब कोर्ट दखल देता है तो उस पर न्यायिक सक्रियता के आरोप लगते हैं। उसे शक्ति बंटवारे के सिद्धांत का लेक्चर दिया जाता है। कहा जाता है कि वह क्षेत्रधिकार का अतिक्रमण कर रहा है। लेकिन कोर्ट क्या करे, जब सरकारें गैरजिम्मेदाराना रवैया अपनाती हैं। कोर्ट इस मामले में सात अगस्त को फिर सुनवाई करेगा। 

कुछ राज्यों पर दो-दो लाख का जुर्माना

कोर्ट ने हलफनामा दाखिल नहीं करने वाले और उनकी ओर से कोर्ट में सुनवाई के दौरान वकील के भी पेश नहीं होने वाले राज्यों पर दो-दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने कहा था कि वे इन राज्यों को हलफनामा दाखिल करने का अंतिम मौका देते हैं। अगर ये फिर भी हलफनामा दाखिल कर नहीं बताते कि देश का कानून इनके यहां लागू क्यों नहीं है तो इनके मुख्य सचिवों को कोर्ट में तलब किया जाएगा। कोर्ट ने आदेश दिया कि जुर्माने की रकम दो सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट लीगल सर्विस कमेटी में जमा कराई जाएगी और उसका उपयोग किशोर न्याय के मुद्दों पर किया जाएगा।

दिल्ली में अधिकारों पर तंज

कोर्ट ने दिल्ली के प्रति ज्यादा ही सख्त और व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए राज्य और केंद्र सरकार से पूछा था कि हलफनामा दाखिल कर बताओ कि दिल्ली में भलस्वा, ओखला और गाजीपुर में जो कूड़े के पहाड़ हैं, उसे हटाना किसकी जिम्मेदारी में आता है? यह उपराज्यपाल के कार्यक्षेत्र में आता है या दिल्ली सरकार के। दिल्ली में कूड़े के ढेर के कारण लोग डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया से संक्रमित हो रहे हैं।

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