डॉक्टर भी हुए हैरान, दो टुकड़ों में कटा हाथ और फिर…

डॉक्टरों को इस दुनिया में भगवान क्यों कहा जाता है यह एक बार फिर से दिल्ली में साबित हो गया. मशीन से हाथ के पूरी तरह कटकर दो टुकड़े हो जाने के बाद भी डॉक्टरों ने कई घंटों के ऑपरेशन के बाद कटे हुए हाथ को पीड़ित के शरीर में फिर से जोड़ दिया और उसमें जान भी आ गई.

दिल्ली के प्रह्लादपुर में एक फैक्ट्री में काम करते हुए 36 साल के इंद्रपाल का हाथ मशीन से कटकर पूरी तरह अलग हो गया. हाथ इतनी बुरी तरह से कटा था कि वो कई जगहों पर मुड़ भी गया था. हादसे के बाद फैक्ट्री मालिक ने समय रहते इंद्रपाल को गंगाराम अस्पताल पहुंचाया जहां डॉक्टरों को पूरी घटना की जानकारी दी गई साथ ही उसके कटे हुए हाथ को भी उन्हें दिया गया.गंगा राम अस्पताल के प्लास्टिक एंड रिकंस्ट्रक्टिव सर्जन और डॉक्टरों ने इसे चुनौती के तौर पर लिया और 6 घंटे की लंबी सर्जी के बाद हाथ को फिर से इंद्रपाल के शरीर से जोड़ दिया गया. हालांकि मशीन से रगड़ खाने और कई जगह मुड़ जाने की वजह से हाथ की लंबाई 7-8 इंच तक छोटी हो गई क्योंकि डॉक्टरों को दोनों तरफ से कुछ खराब हो चुका हिस्सा निकालना पड़ा.

इस सफल ऑपरेशन को लेकर गंगाराम अस्पताल के प्लास्टिक एंड रिकंस्ट्रक्टिव सर्जन अनुभव गुप्ता ने बताया कि राहत की बात ये थी कि मरीज को समय रहते अस्पताल लाया गया था जो ऐसे मामलों में गोल्डन ऑवर माना जाता है.

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उन्होंने कहा कि इंद्रपाल को अस्पताल पहुंचाने वालों ने अच्छी सूझबूझ दिखाई और कटे हुए हाथ को साफ पॉलिथीन में डाला और उसे बर्फ से भरी दूरी पॉलिथीन में डालकर अस्पताल लाए जिससे उसे जोड़ने में आसानी हुई. डॉक्टर अनुभव के मुताबिक ऐसे मामलों में घटना के 3 से 4 घंटे की भीतर मरीज की सर्जरी होनी जरूरी है. समय जितना ज्यादा बीतता है उससे चुनौतियां उतनी ही बढ़ जाती है.डॉक्टर अनुभव ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान हमने देखा कि मशीन में रगड़ खाने की वजह से हाथ की हड्डियां, मांशपेशियां और नसें अलग-अलग जगह खिंच गई थीं. ऐसे में सर्जरी मुश्किल हो जाती है लेकिन हमने कटे हुए हाथ के कुछ हिस्से को काट कर बाहर किया और उसके बाद इसे इंद्रपाल के शरीर से जोड़ दिया गया. गंगाराम के डॉक्टरों ने कहा कि हाथ की लंबाई इससे थोड़ी कम जरूर हुई लेकिन अब उसमें जान आ गई है. ऑपरेशन में सबसे पहले हड्डी, फिर मांस, इसके बाद नस, फिर आर्टरी और अंत में स्किन को जोड़ा गया जिसमें 6 घंटे लगे. उन्होंने कहा कि जोड़े गए हाथ में खून का फ्लो (संचार) फिर से शुरू हो गया है जिससे पता चलता है कि ऑपरेशन पूरी तरह सफल हुआ है. अब उसका हाथ फिर से काम कर रहा है.

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