उत्तराखंड के इन स्कूली बच्चों ने जीवन में पहली बार देखी सड़क, वाहन हुए हैरान

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गोपेश्वर: एक तरफ देश बुलेट ट्रेन की रफ्तार पकड़ने की तैयारी में है, वहीं भारत-चीन सीमा से सटे चमोली जिले कुछ गांव ऐसे भी हैं, जहां नौनिहालों को यह तक पता नहीं कि सड़क कितनी चौड़ी होती है। दो-दिवसीय शैक्षिक भ्रमण के तहत जब सोमवार को राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय डुमक के 24 छात्र-छात्राएं भराड़ीसैंण (गैरसैंण) पहुंचे तो इनमें 20 छात्र-छात्राएं ऐसे थे, जिनकी दुनिया गांव तक ही सिमटी हुई है। इन नौनिहालों ने पहली बार सड़क देखी और उस पर दौड़ रहे वाहनों को देख सकपका गए। कुछ बच्चों ने तो शिक्षकों से सवाल तक कर डाला कि यह क्या चीज है। उत्तराखंड के इन स्कूली बच्चों ने जीवन में पहली बार देखी सड़क, वाहन हुए हैरान

इतना ही नहीं, गैरसैंण में विधानसभा भवन समेत अन्य भवनों को देख वे कहने लगे, अरे! इतने बड़े भी घर होते हैं क्या। इसके अलावा मछली का दीदार भी इन नौनिहालों ने पहली बार किया। गांव से बाहर इस नई दुनिया को देख वह खुशी से फूले नहीं समा रहे थे। चमोली जिले के जोशीमठ विकासखंड स्थित डुमक गांव जाने के लिए बदरीनाथ हाईवे पर पीपलकोटी से चार किमी आगे पाखी से 29 किमी की दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। इसी गांव में स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय डुमक के 24 छात्र -छात्राएं शैक्षिकभ्रमण पर गैरसैंण पहुंचे थे।

29 किमी पैदल चलकर जब वह रोड हेड पर पाखी पहुंचे तो सड़क को देख उनकी आंखें फटी की फटी रह गई। सड़क पर वाहन को देख पहले तो वे सकपकाए और फिर उसके पीछे दौड़ने लगे। तब शिक्षकों ने बताया कि यह बस है, जिसमें बैठने पर पैदल यात्रा नहीं करनी पड़ती। बस में बैठकर तो ये नौनिहाल मानो किसी दूसरे लोक में पहुंच गए। जैसे-जैसे बस आगे बढ़ रही थी, उनका कौतुहल भी बढ़ता जा रहा था। गैरसैंण पहुंचने पर तो विधानसभा भवन समेत अन्य ऊंची इमारतों ने उन्हें सम्मोहित-सा कर दिया। 

कारण, गांव के पठालों (पहाड़ी पत्थर) वाले कच्चे मकानों के सिवा उन्होंने आज कोई पक्की इमारत देखी ही नहीं थी। बाद में उन्होंने मंडल स्थित मत्स्य पालन केंद्र का भ्रमण भी किया, जहां मछलियों का संसार देख उनसे कुछ बोलते नहीं बन रहा था। नौनिहालों ने जड़ी बूटी शोध संस्थान जाकर भी विभिन्न जानकारियां हासिल कीं।  शैक्षिक दल के मुखिया एवं राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय डुमक के प्रधानाध्यापक रुद्र सिंह राणा ने बताया कि पहली बार सड़क, बस, ऊंची इमारतें व मछलियां देखकर बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इस दल में सहायक अध्यापक विष्णु प्रसाद भट्ट व युद्धवीर सिंह नेगी भी शामिल थे।

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