समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता नरेश अग्रवाल जल्‍द ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं. इसका कारण सपा से अग्रवाल को इस बार राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार नहीं बनाया जाना माना जा रहा है. बता दें कि सपा में वर्चस्व की लड़ाई के दौरान नरेश अग्रवाल ने मुलायम के बजाय अखिलेश यादव का साथ दिया था, लेकिन जब एक सीट पर राज्यसभा उम्मीदवार के चयन की बात आई तो अखिलेश ने नरेश अग्रवाल का साथ छोड़ दिया और एक सीट के लिए जया बच्चन का नाम आगे कर दिया.

पहले कांग्रेस-बसपा, फिर सपा, अब बीजेपी का मोह

यूपी के हरदोई के रहने वाले नरेश अग्रवाल का जन्म 1951 में हुआ. वे 1980 में कांग्रेस के टिकट पर पहली बार विधायक बने थे. इस चुनाव में उन्होंने भाजपा के दिग्गज नेता और जनसंघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गंगाभक्त सिंह हराया था. काफी समय कांग्रेस में रहने के बाद नरेश अग्रवाल बसपा में शामिल हो गए. बसपा में वह पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव थे. बसपा ने उन्हें लोकसभा का चुनाव भी लड़वाया था लेकिन वह चुनाव हार गए थे. बसपा के बाद वे सपा में आ गए. सपा ने उन्हें राज्यसभा भेजा. राज्यसभा में वह पार्टी की तरफ से आवाज उठाने वालों में सबसे आगे रहे. अब वह सपा को छोड़कर भाजपा के साथ आ रहे हैं.

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भाजपा लड़वा सकती है राज्यसभा का चुनाव

माना जा रहा है कि भाजपा नरेश अग्रवाल को राज्यसभा चुनाव लड़वा सकती है. भाजपा विधानसभा में संख्या बल के जरिये अपने 8 उम्मीदवार आसानी से जिता सकती है. उसके पास जो अतिरिक्त वोट हैं और सहयोगी दलों के वोटों के बलबूते वह सपा-बसपा-कांग्रेस-रालोद के संयुक्त उम्मीदवार को टक्कर देना चाहती है. यदि भाजपा ने नरेश अग्रवाल को उतारा तो राज्यसभा चुनाव दिलचस्प हो जायेगा, क्योंकि यदि नरेश अग्रवाल सपा के असंतुष्ट विधायकों का वोट हासिल करने में सफल रहते हैं तो यह अखिलेश और मायावती के गठबंधन के लिए झटका होगा. उल्लेखनीय है कि राज्यसभा चुनावों के लिए आज नामांकन का आखिरी दिन है और सारी तस्वीर शाम चार बजे के बाद साफ होने के आसार हैं.