भाजपा के सामने बड़ी चुनौती- पार्टी ने की सोनोवाल को हटाने की मांग…

उत्तर पूर्व के सात में से छह में सरकार बनाने वाली बीजेपी के सामने क्षेत्र के सबसे बड़े राज्य असम में नागरिकता (संशोधन) विधेयक के रूप में एक बड़ी चुनौती सामने आई है। पूरे राज्य में विधेयक के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।भाजपा के सामने बड़ी चुनौती- पार्टी ने की सोनोवाल को हटाने की मांग...

मेरठ के सांसद राजेंद्र अग्रवाल की अध्यक्षता में संसद के दोनों सदनों की एक संयुक्त समिति इस विधेयक पर रायशुमारी के लिए पिछले पांच दिनों के दौरे पर असम में ही है। इसी दौरान कांग्रेस, असम गण परिषद, आल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) जैसे राज्य के सभी संगठन विधेयक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं।

वहीं, उपमुख्यमंत्री हिमंत बिस्वसरमा से जुड़ा भाजपा का ही एक धड़ा केंद्रीय नेतृत्व को संदेश दे रहा है कि मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल इस विरोध को ठीक तरह से नहीं संभाल पा रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसे नाज़ुक हालात में सोनोवाल की जगह  किसी मजबूत व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। हिमंत इससे पहले वाली कांग्रेस सरकार में भी उपमुख्यमंत्री थे। लेकिन अपनी महत्वाकांक्षा और तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई से मतभेदों के चलते वे सरकार छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। पार्टी ने उन्हें असम की ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर पूर्व की जिम्मेदारी दे दी। उन्होंने इस क्षेत्र में छह राज्यों की सरकार भाजपा की सहायता से बनवाई। लेकिन अब उनकी महत्वाकांक्षा फिर जोर पकड़ रही है।

असम विधानसभा में नेता विपक्ष देवब्रत साइकिया ने अमर उजाला को बताया कि कांग्रेस और आल इंडिया युनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) ने सोनोवाल को प्रस्ताव दिया है कि यदि वे जातीय नेता की छवि बचाना चाहते हैं तो उन्हें भाजपा छोड़ देनी चाहिए और विपक्ष के सहयोग से मुख्यमंत्री बनना चाहिए। बिस्वसरमा से कई प्रयासों के बाद भी बात नहीं हुई।

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