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रुपया गिरने से सुधरेगा पानीपत का टेक्सटाइल निर्यात

पानीपत। क्षेत्र के टेक्‍सटाइल निर्यातकाें में खुशी का माहौल है और उनके चेहरे खिल गए हैं1 डॉलर की तुलना में रुपया 15 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है। इससे हैंडलूम निर्यातकों की निर्यात लागत अब अपेक्षाकृत कम होगी। नए ऑर्डर लेने में भी आसानी रहेगी। जीएसटी लागू होने के कारण निर्यातकों की परेशानी बढ़ गई थी। अब धीरे-धीरे जीएसटी प्रक्रिया को आसान बनाया जा रहा है। रिफंड भी मिलने शुरू हो गए हैं। ऐसे में निर्यात मोर्चे पर सकारात्मक माहौल बना है।रुपया गिरने से सुधरेगा पानीपत का टेक्सटाइल निर्यात

टेक्सटाइल निर्यातकों के चेहरे खिल, 15 महीने के न्यूनतम स्तर 67.50 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंचा

पानीपत से 6000 करोड़ रुपये का टेक्सटाइल निर्यात होता है। डालर में यहां के निर्यातकों को भुगतान मिलता है। एक डॉलर का भाव 67.50 रुपये हो गया है। मंदी से जूझ रहे टेक्सटाइल निर्यातकों को भारी राहत मिली है। निर्यातकों को दूसरे देशों के साथ प्रतिस्पर्धा में टिके रहना पड़ता है।

हैंडलूम मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रधान रमेश वर्मा का कहना है कि डालर महंगा होने से निर्यात उद्योगों को फायदा मिलेगा। पिछले काफी समय से निर्यात उद्योग मंदी झेल रहा है। पेट्रोल डीजल के दामों में वृद्धि ने भी  समस्याएं बढ़ा दी हैं।

पानीपत से होने वाला निर्यात

मैट, दरी, कपड़ा, कुशन, बेड शीट, तौलिया, कारपेट, हैंडीक्राफ्ट्स, गारमेंट्स, दवाइयां व पचरंगा अचार का निर्यात होता है।

घरेलू मोर्चे पर होगा लाभ

रुपया सस्ता होने से आयात महंगा होगा। इससे घरेलू मोर्चे पर लाभ मिलेगा। दूसरे देशों से माल मंगवाना महंगा पड़ने के कारण घरेलू इंडस्ट्री को लाभ होगा।

हैंडलूम उद्यमियों को राहत

रुपया सस्ता होने से हैंडलूम व्यवसायियों को राहत मिलेगी। हैंडलूम एसोसिएशन के प्रधान मदन बरेजा ने बताया कि अन्य देशों विशेषकर चीन से सस्ता माल आने के कारण पावरलूम सेक्टर मंदी से जूझ रहा है। रुपया सस्ता होने से अब आयात महंगा होगा, जिससे घरेलू उद्योगों को राहत मिलेगी।

पानीपत में तीन लाख लोगों को टेक्सटाइल इंडस्ट्री से रोजगार मिल रहा है। मंदी के कारण नए उद्योग नहीं लग रहे थे। उद्योगों बंद होने से कारण रोजगार का संकट गहरा रहा है। अब राहत मिलने की उम्मीद है। हैंडलूम व्यवसायी ओपी नागपाल का कहना है कि टेक्सटाइल में लगने वाले कच्चे माल धागे के भाव पर भी सरकार नियंत्रण रखे। धागे के भाव बढ़ने से यहां का उत्पादन महंगा पड़ता है।

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