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	<title>राजकीय सम्मान</title>
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	<description>Hindi News, Lifestyle &#38; Entertainment Articles.</description>
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	<title>राजकीय सम्मान</title>
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		<title>बीकानेर: पांच दिनों से चल रहा गतिरोध समाप्त, राजकीय सम्मान के साथ हुआ सैनिक का अंतिम संस्कार!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 30 Sep 2024 07:10:23 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[अंतिम संस्कार]]></category>
		<category><![CDATA[गतिरोध समाप्त]]></category>
		<category><![CDATA[बीकानेर]]></category>
		<category><![CDATA[राजकीय सम्मान]]></category>
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<p>जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में 24 सितंबर को आर्मी में तैनात बीकानेर के जवान रामस्वरूप कस्वां की संदिग्ध मौत के मामले में पांच दिन बाद कल सर्व समाज का धरना समाप्त हो गया। सैनिक के परिजनों और ग्रामीणों की ओर से जिन मांगों को लेकर धरना दिया जा रहा था, रविवार को प्रशासन के साथ वार्ता &#8230;</p>
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<p>जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में 24 सितंबर को आर्मी में तैनात बीकानेर के जवान रामस्वरूप कस्वां की संदिग्ध मौत के मामले में पांच दिन बाद कल सर्व समाज का धरना समाप्त हो गया। सैनिक के परिजनों और ग्रामीणों की ओर से जिन मांगों को लेकर धरना दिया जा रहा था, रविवार को प्रशासन के साथ वार्ता में उन मांगों पर दोनों पक्ष सहमत हो गए। प्रशासन के साथ हुई वार्ता में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार, मृतक की पत्नी को 50 लाख की राशि देने, संविदा पर नौकरी देने और शहीद का दर्जा देने के लिए गृह मंत्रालय को पत्र लिखने के साथ ही जिला सैनिक कल्याण अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद परिजनों ने धरना समाप्त कर दिया। इसके बाद मिलिट्री कैंपस से सेना की गाड़ी में जवान की पार्थिव देह को अंतिम संस्कार के लिए उनके गांव पांचू ले जाया गया।</p>



<p>गौरतलब है कि लगातार 4 दिन से चल रहे धरने के बावजूद वार्ता में सहमति नहीं बनने के बाद शनिवार को धरने में शामिल होने के लिए बीकानेर पहुंचे नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने सोमवार से बीकानेर कलेक्ट्रेट पर महापड़ाव की चेतावनी दी थी। इस दौरान हनुमान बेनीवाल ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और प्रदेश के सैनिक कल्याण मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ से भी फोन पर बातचीत की। ठोस आश्वासन मिलने के बाद रामस्वरूप कस्वां के परिजन सहमत हुए और शव के अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए, जिसके बाद राजकीय सम्मान के साथ पैतृक गांव में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।</p>
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		<item>
		<title>राजकीय सम्मान से किया शहीद प्रवीण कुमार का अंतिम संस्कार</title>
		<link>https://ujjawalprabhat.com/the-funeral-of-the-martyr-praveen-kumar-from-royal-honours/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 29 Sep 2024 08:37:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[हरियाणा]]></category>
		<category><![CDATA[अंतिम संस्कार]]></category>
		<category><![CDATA[राजकीय सम्मान]]></category>
		<category><![CDATA[शहीद प्रवीण कुमार]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="993" height="518" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2024/09/Screenshot-2024-09-29-140650.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2024/09/Screenshot-2024-09-29-140650.png 993w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2024/09/Screenshot-2024-09-29-140650-768x401.png 768w" sizes="(max-width: 993px) 100vw, 993px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/the-funeral-of-the-martyr-praveen-kumar-from-royal-honours/">राजकीय सम्मान से किया शहीद प्रवीण कुमार का अंतिम संस्कार</a></p>
<p>जम्मू में चुनाव की ड्यूटी में तैनात काब्रच्छा गांव के सी.आर.पी.एफ. जवान प्रवीण कुमार का गांव में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।&#160;सफा खेड़ी गांव से युवा बाइकों के काफिले के साथ काब्रच्छा गांव तक प्रवीण कुमार के पार्थिव शरीर को लेकर गए। बाइकों पर तिरंगे लगाए हुए युवा, ग्रामीण प्रवीण अमर रहे &#8230;</p>
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<p>जम्मू में चुनाव की ड्यूटी में तैनात काब्रच्छा गांव के सी.आर.पी.एफ. जवान प्रवीण कुमार का गांव में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।&nbsp;सफा खेड़ी गांव से युवा बाइकों के काफिले के साथ काब्रच्छा गांव तक प्रवीण कुमार के पार्थिव शरीर को लेकर गए। बाइकों पर तिरंगे लगाए हुए युवा, ग्रामीण प्रवीण अमर रहे के नारे लगाते हुए सफा खेड़ी, तारखा से होते हुए गुजरे। प्रवीण के अंतिम संस्कार में पहुंच कर पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह, बृजेंद्र सिंह, विकास काला, वीरेंद्र घोघड़िया, पवन फौजी, &nbsp;दिलबाग संडील सहित गण्यमान्य लोगों, ग्रामीणों ने श्रद्धांजलि दी। सी.आर.पी.एफ. के डी.एस.पी. भी इस दौरान मौजूद रहे। पूर्व सैनिक संघ भी प्रवीण की अंतिम यात्रा में शामिल हुआ। सी.आर.पी.एफ., हरियाणा पुलिस के जवानों ने प्रवीण कुमार को अंतिम सलामी दी।</p>



<p><strong>शुक्रवार को जाना था कठुआ</strong></p>



<p>जानकारी के अनुसार जिस बिल्डिंग में अपनी टीम के साथ प्रवीण रुका हुआ था वहां शुक्रवार सुबह नाश्ता करने के बाद कठुआ के लिए जाना था।&nbsp;टीम द्वारा दोपहर का लंच भी पैक कर लिया था लेकिन भगवान को शायद कुछ ओर मंजूर था। बिल्डिंग में चल रहे काम में जो लिफ्ट थी वहां से गुजरते हुए प्रवीण ड्यूटी दौरान हादसे का शिकार हो गए। ग्रामीणों ने बताया कि वह जब भी छुट्टी आता तो गांव में ही रहता था।</p>



<p><strong>मार्च 2021 में हुआ था सी.आर.पी.एफ. में भर्ती</strong></p>



<p>प्रवीण(26) 13 मार्च 2021 में सी.आर.पी.एफ. में भर्ती हुआ था। मार्च 2023 में प्रवीण की शादी पंघाल (हिसार) गांव की नीलम के साथ हुई थी। प्रवीण के 9 माह का एक बेटा है। प्रवीण अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। प्रवीण से बड़ी उसकी बहन है जो शादीशुदा है। उसके परिजनों को शुक्रवार को ड्यूटी दौरान मौत की खबर लग गई थी। पढ़ाई करते हुए वह सी.आर.पी.एफ. में भर्ती हुआ था। 12वीं तक उसने पढ़ाई की। 25 जुलाई छुट्टी पूरी करके वह ड्यूटी पर गया था। दीपावली के आस-पास वापस घर आना था। गुरुवार शाम को प्रवीण की पिता राजबीर से बात भी हुई थी। प्रवीण कुमार के पार्थिव शरीर के साथ आए जवानों ने बताया कि वह ड्यूटी को लेकर बहुत पाबंद था। वह मिलनासर भी था।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>कल राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा पद्मश्री डॉ. पातर का अंतिम संस्कार</title>
		<link>https://ujjawalprabhat.com/padmashree-will-be-done-with-state-honours-tomorrow-pars-funeral/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 May 2024 04:50:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[अंतिम संस्कार]]></category>
		<category><![CDATA[पद्मश्री डॉ. पातर]]></category>
		<category><![CDATA[राजकीय सम्मान]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="391" height="378" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2024/05/punjab5.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/padmashree-will-be-done-with-state-honours-tomorrow-pars-funeral/">कल राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा पद्मश्री डॉ. पातर का अंतिम संस्कार</a></p>
<p>पातर अपनी पत्नी के साथ लुधियाना में रहते थे। उनके बेटे मनराज पातर और अंकुर ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं। उनके भारत लौटने पर 13 मई को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।  मैं रात का आखिरी जजीरा&#8230; घुल रहा, विलाप करता हूं&#8230; मैं मारे गए वक्तों का आखिरी टुकड़ा हूं। जख्मी हूं अपने &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="391" height="378" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2024/05/punjab5.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/padmashree-will-be-done-with-state-honours-tomorrow-pars-funeral/">कल राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा पद्मश्री डॉ. पातर का अंतिम संस्कार</a></p>

<p>पातर अपनी पत्नी के साथ लुधियाना में रहते थे। उनके बेटे मनराज पातर और अंकुर ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं। उनके भारत लौटने पर 13 मई को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। </p>



<p>मैं रात का आखिरी जजीरा&#8230; घुल रहा, विलाप करता हूं&#8230; मैं मारे गए वक्तों का आखिरी टुकड़ा हूं। जख्मी हूं अपने वाक्यों के जंगल में छिपा कराहता हूं, तमाम मर गए पितरों के नाखून मेरी छाती में घोंपे पड़े हैं। जरा देखो तो सही मर चुकों को भी जिंदा रहने की कितनी लालसा है।&#8230;अल्फाजों में दर्द को पिरोने वाले पंजाब की इस सदी के महान कवि पद्मश्री सुरजीत पातर (80) का शनिवार को निधन हो गया। </p>



<p>सुरजीत पातर का निधन लुधियाना में उनके आवास पर दिल का दौरा पड़ने से हुआ। शनिवार सुबह उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान सहित कई प्रमुख हस्तियों ने निधन पर शोक प्रकट किया है। साहित्य अकादमी व पद्मश्री से सम्मानित पातर ने किसान आंदोलन के समर्थन में पद्मश्री लौटाने का एलान तक कर दिया था।<br />पातर अपनी पत्नी के साथ लुधियाना में रहते थे। उनके बेटे मनराज पातर और अंकुर ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं। उनके भारत लौटने पर 13 मई को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। </p>



<p>जालंधर के गांव पत्तड़ कलां में जन्मे सुरजीत पातर ने साहित्य के क्षेत्र में अहम उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने पंजाबी साहित्य अकादमी के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। पंजाब विवि, पटियाला से मास्टर डिग्री लेने के बाद, पातर ने गुरु नानक देव (अमृतसर) विश्वविद्यालय से पीएचडी की। इसके बाद उन्होंने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (लुधियाना) में पंजाबी के प्रोफेसर के रूप में योगदान दिया और वहीं से सेवानिवृत्त हुए। </p>



<p><strong>प्रमुख कविताएं, जो चर्चा का केंद्र रहीं</strong><br />मोमबत्तियां, आइया नंद किशोर, हनेरा जरेगा किवें, फासला, कोई डालियां चों लंगिया हवा बणके, मैं रात का आखिरी जजीरा, कभी नहीं सोचा था, मेरी प्रतीक्षा, ग्यारह हजार रातें, दो वृक्षों की बातचीत, इक लरज़ता नीर था, एक लफ्ज विदा लिखना और जब बुत बन जाता है।</p>



<p><strong>ये सम्मान मिले</strong><br />1979 में पंजाबी साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1993 में साहित्य अकादमी पुरस्कार, 1999 में पंचनद पुरस्कार, 2007 में आनंद काव्य पुरस्कार, 2009 में सरस्वती सम्मान, 2009 में गंगाधर राष्ट्रीय कविता, 2012 में पद्मश्री सम्मान, 2014 में कुसुमाग्रज पुरस्कार</p>



<p><strong>फिल्मों में भी रहा योगदान</strong><br />डॉ. पातर ने शहीद ऊधम सिंह और दीपा मेहता की हेवन ऑन अर्थ के पंजाबी संस्करण जैसी फिल्मों के लिए संवाद लिखकर पंजाबी सिनेमा में योगदान दिया।</p>



<p><strong>आखिरी सांस तक पंजाबी भाषा के लिए फिक्रमंद रहे सुरजीत पातर</strong><br />&nbsp;सुरजीत पातर लोगों के शायर थे, हर साल 26 जनवरी को लाल किले में होने वाले कवि सम्मेलन में वह अपनी कविताएं सुनाते तो सामने दर्शक दीर्घा में खामोशी छा जाती। उनकी कविताएं सीधे लोगों के दिल में उतरतीं। अब ये कवि सम्मेलन होना बंद हो गया है, लेकिन 2014 तक वह लगातार इसमें हिस्सा लेते रहे। सुरजीत पातर से अपनी 42 साल पुरानी दोस्ती को याद करते हुए दिल्ली सरकार की पंजाबी अकादमी के पूर्व सचिव डॉ. रवैल सिंह की आंखें नम हो गईं।</p>



<p>&nbsp;साहित्य अकादमी के पंजाबी सलाहकार बोर्ड के मौजूदा संयोजक &nbsp;डॉ. रवैल सिंह ने कहा कि वक्त बेवक्त सुरजीत ने बहुत कुछ लिखा। जब पंजाब में उग्रवाद चरम पर था, तब उनकी कविताएं आवाम को सही रास्ता दिखा रही थीं। उनकी पंक्ति ‘पहले वार से सानू बंदया सी हुड़ शिवकुमार दी बारी है’ लोगों की जुबान पर रहती।&nbsp;</p>



<p>&nbsp;&nbsp;वह पंजाब में बढ़ती हिंसा और द्वेष से द्रवित थे। अपनी कविता में उन्होंने अपने अंदर के मनोभावों को उतार के रख दिया था। वह पंजाब के लोगों को बता रहे थे कि 1947 में देश के बंटवारे के साथ पंजाब का भी बंटवारा हो गया। अब यदि हिंदू भी हमसे अलग हो गए तो पंजाब के पास आखिर क्या बचेगा। रवैल सिंह कहते हैं कि पंजाबी की आधुनिक कविता में अमृता प्रीतम, शिवकुमार के बाद सुरजीत पातर का नाम आता है। उनकी कविताएं अमर हैं। पातर की कविताएं लोगों की जुबान पर चढ़ी हुई हैं। वह खुद स्टेज पर गाकर सुनाते भी थे।</p>



<p><strong>गूगल के प्लेटफाॅर्म जैमिनी में पंजाबी शामिल नहीं होने पर चिंतित थे</strong><br />पिछले हफ्ते ही चंडीगढ़ में हुए एक बड़े सेमिनार में रवैल सिंह की आखिरी बार अपने दोस्त सुरजीत से मुलाकात हुई थी। सुरजीत पातर पंजाब आर्ट्स काउंसिल के चेयरमैन थे, तो वहां दोनों ने ही मंच पर भाषण दिया था। शाम को भी बड़ी देर तक दोनों से साथ में समय बिताया। फिर बृहस्पतिवार को फोन पर बात हुई, जिसमें वह पंजाबी भाषा को लेकर बेहद फिक्रमंद थे। गूगल के प्लेटफाॅर्म जैमिनी में पंजाबी को शामिल नहीं किया गया है। इसको लेकर वह चिंतित थे, वह कह रहे थे कि पंजाबी के फ्यूचर इंटेलिजेंस के लिए ये अच्छा नहीं है।&nbsp;</p>



<p><strong>किसी की सिफारिश से नहीं मिले सम्मान</strong><br />रवैल सिंह ने कहा कि सुरजीत पातर को किसी की सिफारिश से इतने बड़े-बड़े सम्मान नहीं मिले। सबसे पहले साहित्य अकादमी ने उन्हें सम्मान दिया। फिर बिड़ला फाउंडेशन की ओर से इन्हें सरस्वती सम्मान मिला। इसके बाद इन्हें महामहिम राष्ट्रपति ने पद्मश्री से सम्मानित किया। वह मार्च में साहित्य अकादमी के एक बड़े कार्यक्रम में शामिल होने दिल्ली आए थे, जिसमें दुनिया की 72 भाषाओं के 1200 से ज्यादा साहित्यकार हिस्सा ले रहे थे। शाम को कार्यक्रम खत्म होने पर वह सुरजीत के साथ आईआईसी घूमने चले गए। वहां पर एक बड़े अफसर ने इन्हें पहचान लिया। सुरजीत पहली बार उस शख्स से मिल रहे थे, लेकिन उसे हंसते हुए अपनी कविताएं सुना रहे थे। वह सही मायने में आम लोगों के कवि थे।</p>
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]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>राजकीय सम्मान के साथ नम आंखों से दी गई शहीद अनिल कुमार को अंतिम विदाई</title>
		<link>https://ujjawalprabhat.com/with-state-honors/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Pawan Mishra]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 22 Apr 2018 12:08:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[राजकीय सम्मान]]></category>
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					<description><![CDATA[<p><a href="https://ujjawalprabhat.com/with-state-honors/">राजकीय सम्मान के साथ नम आंखों से दी गई शहीद अनिल कुमार को अंतिम विदाई</a></p>
<p>छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए उत्तर प्रदेश में अमेठी जिले के निवासी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवान अनिल कुमार मौर्य का शव रविवार को जब उनके पैतृक गांव पूरे खोझवा पहुंचा तो जनसैलाब उमड़ पड़ा. मंत्री, विधायक और प्रशासनिक अफसरों की मौजूदगी में राजकीय सम्मान के साथ &#8230;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><a href="https://ujjawalprabhat.com/with-state-honors/">राजकीय सम्मान के साथ नम आंखों से दी गई शहीद अनिल कुमार को अंतिम विदाई</a></p>
<p><strong>छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए उत्तर प्रदेश में अमेठी जिले के निवासी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवान अनिल कुमार मौर्य का शव रविवार को जब उनके पैतृक गांव पूरे खोझवा पहुंचा तो जनसैलाब उमड़ पड़ा. मंत्री, विधायक और प्रशासनिक अफसरों की मौजूदगी में राजकीय सम्मान के साथ शहीद के शव का अंतिम संस्कार किया गया. शहीद के छोटे भाई अजय कुमार मौर्य ने शव को मुखाग्नि दी.<img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter size-full wp-image-208012" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2018/04/Capture-68.png" alt="" width="672" height="490" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2018/04/Capture-68.png 672w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2018/04/Capture-68-300x219.png 300w" sizes="auto, (max-width: 672px) 100vw, 672px" /></strong></p>
<p><strong>इस दौरान प्रभारी मंत्री मोहसिन रजा, विधायक गरिमा सिंह, विधायक राकेश प्रताप सिंह, बीजेपी नेता अनंत विक्रम सिंह, सीआरपीएफ के डीआईजी, कमाडेंट, डीएम, एसपी ने भी उन्हें पुष्प अर्पण कर श्रद्घांजलि दी.प्रभारी मंत्री मोहसिन रजा ने शहीद की पत्नी को 20 लाख रुपए और माता-पिता को पांच लाख रुपए का चेक दिया. उल्लेखनीय है कि राम प्यारे मौर्य के पुत्र अनिल कुमार कुमार मौर्य (50) छत्तीसगढ़ प्रांत के सुकमा में सीआरपीएफ 212 बटालियन के यूनिट सात में एएसआई के पद पर तैनात थे.</strong></p>
<h3 class="entry-title"><a title="अब विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में शामिल होगी सेक्स एजुकेशन" href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a0%e0%a5%8d/207969/" target="_blank" rel="bookmark noopener">अब विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में शामिल होगी सेक्स एजुकेशन</a></h3>
<p><strong>अमेठी के इस लाल की शहीद होने पर अमेठी प्रशासन के लोग भी शहीद के घर पहुंच शोक संवेदना व्यक्त की और हर संभव मदद की बात कही. मौके पर शहीद के परिजनों को सांत्वना देने अमेठी के प्रभारी मंत्री मोहिसिन रजा भी शहीद के घर पहुंचे,प्रभारी मंत्री ने बताया कि शहीद परिजनों को 25 लाख रूपए की आर्थिक सहायता प्रदान कर दी गई है.शहीद अनिल मौर्या का आज उनके पैतृक गांव नरैनी में राजकीय व सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया.</strong></p>
<p><strong>शहिद अनिल मौर्य सी आर पी एफ मे सब इंस्पेक्टर पद पर 212 बटालियन में छत्तीसगढ़ के शुकमा जिले मे तैनात थे. वे 30 सितम्बर 1985 मे सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे. अपने तीन भाइयों में सबसे बड़े थे. इनके पिता एक सरकारी बेसिक विद्यालय में अध्यापक के पद से सेवा निवृत हो चुके हैं. शाहिद के दो बेटे है और दो बेटियां भी हैं. बेटीयों की शादी हो गई है. बड़े बेटे का नाम नीरज है जिनकी उम्र 25 और दुसारे का नाम राहुल है जिनकी उम्र 22 वर्ष है अभी ये पढ़ाई कर रहे हैं. छोटे बेटे राहुल का कहना है कि पापा शहिद हुए हैं हमे गर्व है पापा 7 को मारकर शहीद हुए हैं अगर मौका मिला तो 20 को मार कर बदला लूंगा. वहीं शहीद के सहपाठी सुनील सिंह ने बताया कि अनिल मौर्य बचपन से ही बहादुर थे, 1985 में वह अनिल मौर्य के साथ ही भर्ती में शामिल हुए थे.</strong></p>
<p><strong>प्रदेश के प्रभारी मंत्री व् वक्फ बोर्ड मंत्री ने कहा कि वह प्रदेश की योगी सरकार व केन्द्र की मोदी सरकार के प्रतिनिधि के रूप में आए है, उन्होंने कहा कि शहीद अनिल मौर्य की शहादत पर देश वासियों को गर्व है,शहीद की स्मृति में गांव स्मारक,प्रतिमा व् शहीद पथ का निर्माण किया जाएगा. उनके दोनों बेटों को नौकरी दिए जाने का हर संभव प्रयास किया जाएगा. अंतिम संस्कार में शामिल सीआरपीएफ के पुलिस उपमहानिरीक्षक रासबिहारी ने कहा कि अनिल मौर्य की शहादत पर सी आर पी ऍफ़ को गर्व है,शहीद अनिल मौर्य के परिजनों की मदद के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.भारत सरकार द्वारा शहीद परिजनों को निर्धारित मदद कर दी जाएगी.</strong></p>
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		<title>राजकीय सम्मान के साथ हुआ शशि कपूर का अंतिम संस्कार</title>
		<link>https://ujjawalprabhat.com/shashi-kapoors-funeral-happened-with-state-honor/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Somali Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Dec 2017 12:49:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[फीचर]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[अंतिम संस्‍कार]]></category>
		<category><![CDATA[राजकीय सम्मान]]></category>
		<category><![CDATA[राजकीय सम्मान के साथ हुआ शशि कपूर का अंतिम संस्कार]]></category>
		<category><![CDATA[शशि कपूर]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="984" height="457" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2017/12/shashi-kapoor_1512459523.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="राजकीय सम्मान के साथ हुआ शशि कपूर का अंतिम संस्कार" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2017/12/shashi-kapoor_1512459523.jpeg 984w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2017/12/shashi-kapoor_1512459523-300x139.jpeg 300w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2017/12/shashi-kapoor_1512459523-768x357.jpeg 768w" sizes="auto, (max-width: 984px) 100vw, 984px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/shashi-kapoors-funeral-happened-with-state-honor/">राजकीय सम्मान के साथ हुआ शशि कपूर का अंतिम संस्कार</a></p>
<p>शशि कपूर के निधन के साथ ही कपूर खानदान की दूसरी पीढ़ी का अंत हो चुका है। मुंबई के सांताक्रूज में उनके पार्थिव शरीर का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। मौके पर पूरे कपूर खानदान के साथ बॉलीवुड के तमाम बड़े दिग्गज और सरकारी अधिकारी मौजूद रहे। बता दें कि कल देर शाम मुंबई के &#8230;</p>
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<div><strong>शशि कपूर के निधन के साथ ही कपूर खानदान की दूसरी पीढ़ी का अंत हो चुका है। मुंबई के सांताक्रूज में उनके पार्थिव शरीर का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। मौके पर पूरे कपूर खानदान के साथ बॉलीवुड के तमाम बड़े दिग्गज और सरकारी अधिकारी मौजूद रहे।</strong></div>
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<div class="desc"><strong><img loading="lazy" decoding="async" class="aligncenter wp-image-147984" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2017/12/shashi-kapoor_1512459523.jpeg" alt="राजकीय सम्मान के साथ हुआ शशि कपूर का अंतिम संस्कार" width="685" height="318" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2017/12/shashi-kapoor_1512459523.jpeg 984w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2017/12/shashi-kapoor_1512459523-300x139.jpeg 300w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2017/12/shashi-kapoor_1512459523-768x357.jpeg 768w" sizes="auto, (max-width: 685px) 100vw, 685px" />बता दें कि कल देर शाम मुंबई के कोकिलाबेन धीरुभाई अंबानी अस्पताल में शशि कपूर ने अंतिम सांस ली। वो 79 वर्ष के थे। अंतिम संस्कार के लिए उनके बच्चों संजना कपूर और करण कपूर का इंतजार किया जा रहा था। अमेरिका से मुंबई लौटते ही अंतिम संस्कार कर दिया गया। </strong></p>
<p><strong>शशि कपूर के निधन से दुखी सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने शशि कपूर की याद में एक ब्लॉग लिखा है। अमिताभ बच्चन, शशि कपूर के काफी करीब थे। दोनों ने एक साथ &#8216;दीवार&#8217;, &#8216;सुहाग&#8217;, &#8216;त्रिशूल&#8217; जैसी फिल्मों में काम किया था। अमिताभ बच्चन ने रूमी जाफरी के एक शेर से अपने ब्लॉग की शुरुआत की।</strong><br />
<strong> </strong></div>
<div><strong>&#8216;हम जिंदगी को अपनी कहां तक सम्भालते </strong><br />
<strong>इस क़ीमती किताब का कागज खराब था&#8217; </strong></div>
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<h3 id="title-1" class="ft30"><strong>तीन बार नेशनल अवॉर्ड से नवाजे गए शशि कपूर</strong></h3>
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</div>
</div>
<div class="desc"><strong>ब्लॉग में अमिताभ ने लिखा वो किस तरह शशि कपूर से प्रभावित थे। अपने ब्लॉग पर अमिताभ बच्चन ने शशि कपूर से जुड़ी कई यादें साझा की है। उन्होंने लिखा किस तरह वो शशि कपूर के हेयरस्टाइल, उनके बिहेवियर को कॉपी करते थे। अमिताभ ने बताया कि उन्हें शशि कपूर के घुंघराले बाल जो बड़ी बेतरतीबी से उनके माथे पर और कान के पास बिखरे रहते थे, बहुत पसंद थे। ब्लॉग में अमिताभ ने ये भी बताया है कि शशि कपूर उन्हें &#8221;बबुआ&#8221; बुलाते थे।</strong></p>
<p><strong>जैसे ही शशि कपूर के निधन की खबर आई तो उनके अंतिम दर्शन को बॉलीवुड से तमाम स्टार्स जुटने लगे। अमिताभ बच्चन अपने पूरे परिवार के साथ कपूर खानदान के इस शोक की बेला में शामिल रहे। राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री सहित कई बड़ें नेताओं ने ट्वीट कर शशि कपूर को श्रद्धांजलि दी है।</strong></p>
<p><strong>आपको बता दें कि शशि कपूर पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे। शशि कपूर को शनिवार को सीने में दर्द की शिकायत के बाद एडमिट किया गया था। 60 और 70 के दशक में उन्होंने जब-जब फूल खिले, कन्यादान, शर्मीली, आ गले लग जा, रोटी कपड़ा और मकान, चोर मचाए शोर, दीवार कभी-कभी और फकीरा जैसी कई हिट फिल्में दी। शशि कपूर को तीन बार नेशनल अवॉर्ड मिल चुका है। साल 2015 में उनको 2014 के दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया था।</strong></div>
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