पंजाब में भट्ठल के बाद सुरजीत बरनाला की सरकारी कोठी पर छिड़ा विवाद

चंडीगढ़। पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्ठल के बाद अब पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह बरनाला की सरकारी कोठी पर भी विवाद शुरू हो गया है। बरनाला 1985 से 87 के बीच पंजाब के मुख्यमंत्री रहे हैं। उसके बाद वह तमिलनाडु, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश आदि राज्यों के राज्यपाल भी रहे। उनका 14 जनवरी 2017 को निधन हो गया था, लेकिन सरकारी कोठी खाली नहीं की गई है। इस कोठी में अब उनके बेटे गगनजीत बरनाला रह रहे हैैं।पंजाब में भट्ठल के बाद सुरजीत बरनाला की सरकारी कोठी पर छिड़ा विवाद

सुरजीत सिंह बरनाला 1985 से 87 तक मुख्यमंत्री व कई राज्यों के रहे थे राज्यपाल

कोठी खाली करवाने को लेकर चंडीगढ़ प्रशासन ने पंजाब सरकार को पत्र लिखकर कहा है कि बरनाला को सरकारी कोठी पंजाब की ओर से दी गई थी। इसलिए पंजाब सरकार ही सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए इनकी कोठी खाली करवाने की जिम्मेदारी ले।

उल्लेखनीय है कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सीनियर वकील एचसी अरोड़ा ने भी पंजाब सरकार के मुख्य प्रधान सचिव और मुख्य सचिव के साथ-साथ सुरजीत सिंह बरनाला के बेटे गगनजीत बरनाला को भी लीगल नोटिस भेजा है कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए कोठी को खाली करें। उन्होंने 15 दिन के भीतर कार्रवाई करने की मांग की है।

अरोड़ा के अनुसार, पूर्व सीएम भट्ठल को सरकारी कोठी न छोड़नी पड़े इसके लिए पंजाब सरकार उनको किसी निगम या बोर्ड का चेयरपर्सन बनाने की कोशिश में जुट गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों में साफ तौर पर लिखा है कि पूर्व मुख्यमंत्री को अगर कोई खतरा है तो प्रोटोकॉल के मुताबिक सुरक्षा ली जा सकती है, लेकिन सरकारी कोठी नहीं।

अरोड़ा ने कहा है कि अगर सरकार यह कोठियां खाली नहीं करवाती है तो वह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन न करने को लेकर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में अवमानना याचिका लगाएंगे। बता दें कि भट्ठल को किसी न किसी तरह सरकार कोठी देने में सफल हो जाए लेकिन बरनाला परिवार के मामले में ऐसा मुश्किल है। दरअसल गगनजीत बरनाला अकाली दल में शामिल हो गए थे और सुरजीत सिंह बरनाला भी अकाली दल में रहने के दौरान ही मुख्यमंत्री रहे हैैं। इसलिए शायद सरकार उन पर मेहरबान ना हो।

यह हैं नियम

राज्यपाल अपने राज्य में सरकारी कोठी अलाट करवा सकता है। कार्यकाल खत्म होने या निधन होने की स्थिति में एक साल के लिए परिवार को रहने की इजाजत दी जाती है। बरनाला का निधन 14 जनवरी को हुआ था। नियमानुसार 13 जनवरी को कोठी खाली करनी चाहिए थी।  

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