उत्तराखण्ड: कैंसर के मरीजों की टूटती उम्मीदों को इस पहल का सहारा

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देहरादून: दीन-दुखियों की सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं है, इस आदर्श वाक्य को सार्थक कर रहा है देहरादून और हरिद्वार की सीमा पर रायवाला स्थित गंगा प्रेम हॉस्पिस। कैंसर से हारकर जिंदगी की आखरी जंग लड़ रहे मरीजों की यहां न केवल सेवा की जा रही है, बल्कि संस्था के सेवक उन्हें जीने का हौसला भी दे रहे हैं। वर्तमान में संस्था कैंसर की आखिरी अवस्था (अंतिम स्टेज) के 100 से अधिक कैंसर रोगियों का सहारा बनी हुई है।  उत्तराखण्ड: कैंसर के मरीजों की टूटती उम्मीदों को इस पहल का सहारा

राजीव गांधी कैंसर अस्पताल, दिल्ली के वरिष्ठ कैंसर सर्जन व मेडिकल निदेशक डॉ. अजय कुमार दीवान ने 2005 में कैंसर रोगियों की सेवा के लिए ऋषिकेश में यह पहल की। तब से हर महीने के अंतिम रविवार को ऋषिकेश में शिविर लगाकर कैंसर रोगियों की मुफ्त जांच की जा रही है। डॉ. दीवान खुद शिविर में मौजूद रहते हैं। 

सफदरजंग अस्पताल दिल्ली की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रुपाली दीवान तथा आर्मी से रिटायर और राजीव गांधी कैंसर अस्पताल के डॉ. जीएस वत्स कैंसर रोगियों की नियमित जांच व देखभाल करने वाली उनकी टीम का हिस्सा रहते हैं। संस्था के आंकड़ों के अनुसार अब तक 10000 रोगियों को निशुल्क परामर्श व दवाएं दी जा चुकी हैं।

एक स्टेज (अवस्था) के बाद कैंसर रोगियों और उनके परिजनों की उम्मीदें टूटने लगती हैं। उनकी बीमारी असाध्य स्थिति में पहुंच चुकी होती है। जीवन के इन आखिरी क्षणों को वे एक दूसरे के साथ ही गुजारना चाहते हैं। लिहाजा, ऐसे मरीजों को परिजन घर ले आते हैं। लेकिन, कैंसर से होने वाली असहनीय पीड़ा और घावों से उठने वाला दर्द जिंदगी की आखिरी अवस्था को बेहद कष्टकारी बना देता है। रोगियों की इस पीड़ा को गंगा प्रेम हॉस्पिस न केवल महसूस कर रहा है, बल्कि उसे कम करने की कोशिशों में जुटा हुआ है। 

हॉस्पिस में वर्तमान में 15 बेड हैं, इन्हें बढ़ाकर 25 करने की योजना है। संस्था के 20 सेवक कैंसर की अंतिम स्टेज वाले मरीजों की देखभाल के लिए उनकी चौखट पर पहुंचते हैं। इन दिनों संस्था के सेवक देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में रह रहे 100 कैंसर रोगियों की देखरेख और सेवा कर रहे हैं। प्रत्येक टीम में एक डॉक्टर, नर्स और मसाज थैरेपिस्ट शामिल होते हैं। 

यहां मरीजों को मिलता है जीवनदान 

ऋषिकेश निवासी पारुल मंडल बीते दिसंबर से गंगा प्रेम हॉस्पिस में भर्ती हैं। घर पर उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। पारुल के मुताबिक उन्होंने जीने की उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन हॉस्पिस की सेवा की ही बदौलत वह आज तक जिंदा हैं।  टिहरी के विकास सिंह जेठूडी और ऋषिकेश के सियाराम कहते हैं कि संस्था के सेवक उन जैसे नाउम्मीद कैंसर रोगियों को जिंदगी जीने का हौसला दे रहे हैं। गंगा प्रेम हॉस्पिस की समन्वयक पूजा डोगरा का कहना है कि गंगा प्रेम हॉस्पिस में कैंसर के उन रोगियों की सेवा की जाती है, जिन्हें कहीं भी सहारा नहीं मिलता है। यहां पर रोगियों की निशुल्क सेवा की जा रही है। 

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