शिक्षक भर्ती घोटाला में एसटीएफ के हाथ लगा ऐसे बड़ा सुराग…

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शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच कर रही एसटीएफ के हाथ कुछ ऐसे सुराग लगे हैं जिससे कई सरकारी महकमों की नौकरियों में फर्जी डिग्रियों के इस्तेमाल की पूरी संभावना व्यक्त की गई है। 

मथुरा में शिक्षक भर्ती में ही 150 डिग्रियां जाली मिल चुकी हैं। एसटीएफ का मानना है कि फर्जी डिग्री बनाने वाले रैकेट की गिरफ्तारी के बाद बड़ा खुलासा हो सकती है। 

प्रदेश भर में बीएड, बीटीसी, टीईटी के साथ बीए, बीएससी, इंटर-हाईस्कूल के जाली प्रमाण पत्र बड़ी संख्या में बनाए गए हैं। मथुरा शिक्षक भर्ती घोटाले का खुलासा हुआ तो यह गड़बड़झाला सामने आया। 

जांच में पता चला कि एक पूरा रैकेट है जो फर्जी डिग्रियां बना रहा है। इनका इस्तेमाल शिक्षक भर्ती के साथ कई दूसरे विभागों की भर्तियों में भी हुआ है। मैरिट में स्थान बनाने के लिए फर्जी डिग्रियां तैयार कराई गई हैं। 

कई जिलों से पहुंच रहीं शिकायतें

एसटीएफ के पास कई जिलों से इस प्रकार की शिकायतें पहुंच रही हैं, जिसमें सरकारी विभागों में फर्जी डिग्री से नौकरी हासिल करने के मामले बताए जा रहे हैं। झांसी, गोरखपुर, कानपुर, आजमगढ़, इलाहाबाद, बरेली, मुरादाबाद, मेरठ, सहारनपुर के साथ ही कई जिलों से जांच एजेंसियों के पास गोपनीय पत्र पहुंच रहे हैं। एसटीएफ इसकी पड़ताल में लग गई है। 

माना जा रहा है कि रैकेट की गिरफ्तारी के बाद पूरा खुलासा हो सकता है। एसटीएफ के एसपी आलोक प्रियदर्शी का कहना है कि जिन जिलों से शिकायतें आ रही हैं वहां जांच कराई जा रही है। जिस तरह के सुराग मिल रहे हैं उससे लगता है कि दूसरे विभागों की नौकरियों में भी जाली सर्टिफिकेट लगाए गए होंगे।

फर्जी शिक्षक घोटाले को दबाने में लगे अफसर

फर्जी शिक्षक घोटाले को अफसर दबाने में लगे हैं। 110 फर्जी शिक्षक पाए जा चुके हैं, लेकिन अभी तक इनमें से किसी के खिलाफ शिक्षा विभाग मुकदमा दर्ज नहीं करा सका है। वहीं रैकेट से जुड़े जो सात लोग फरार चल रहे हैं उनकी भी गिरफ्तारी नहीं की जा रही है।

एसटीएफ के खुलासे के बाद पुलिस ने आगे कोई कार्रवाई अभी तक नहीं की है। स्थिति यह है कि अब तो कहीं दबिश भी नहीं दी जा रही है। एसएसपी प्रभाकर चौधरी के समय में जरूर पुलिस ने तेजी दिखाई थी, लेकिन उनके तबादले के बाद इस घोटाले की जांच को पुलिस ने होल्ड कर दिया है।

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