काशी में सायंकालीन दैनिक गंगा आरती की पंरपरा 26 साल में दूसरी बार टूट गई है। दरअसल, आज 27 जुलाई को सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण होने के कारण दोपहर 2.55 बजे सूतक लग रहे थे। इसके बाद देवालयों में पूजा आदि नहीं हो सकती थी। लिहाजा, सायांकालीन आरती को दोपहर एक बजे में ही कर दिया गया।

पौराणिक मान्‍याताओं के अनुसार ग्रहण के सूतक काल में सभी देवालयों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इसी वजह से गंगा आरती के समय में भी बदलाव किया गया। गंगा सेवा निधि के अध्‍यक्ष सुशांत मिश्र ने बताया कि 26 सालों के इतिहास में यह दूसरा मौका है जब गंगा आरती दिन में हुई।

इससे पहले पिछले वर्ष श्रावण पूर्णिमा को भी दिन में 12 बजे आरती की गई थी। सावन महीना शुरू होने के ठीक एक दिन पहले चंद्र ग्रहण का सूतक लगने के साथ ही काशी विश्‍वनाथ मंदिर के कपाट दोपहर 2 बजे बंद कर दिए गए। बाबा विश्‍वनाथ का दर्शन दूसरे दिन भोर में मंगला आरती के बाद ही मिल सकेंगे।

एक रात में तीन खगोलीय घटनाएं

मंगल ग्रह 21वीं शताब्दी के सर्वाधिक लंबे चंद्रग्रहण का गवाह बनेगा, वहीं आसमानी आतिशबाजी इस घटना को रोमांचकारी बनाएगी। इस रात डेल्टा एक्वारिड्स उल्का वृष्टि चरम पर रहने वाली है। एक ही रात में होने जा रही तीन आकर्षक खगोलीय घटनाएं इसे यादगार बनाने जा रही हैं।

चंद्रग्रहण की खगोलीय घटना तो आधी रात से शुरू होगी। इससे पहले शाम ढलते ही लाल ग्रह पूरब दिशा में अनूठी चमक बिखेरते हुए उदय हो रहा होगा। इसके बाद पूर्ण खिला हुआ चांद नजर आएगा। इस बीच खास बात यह होगी कि आसमानी आतिशबाजी के रूप में जलती हुई चमकदार उल्काएं आसमान से धरती की ओर गिरने लगेंगी। जिन्हे सूर्यास्त के समय देखने की अधिक संभावना है।

वहीं पूर्ण ग्रहण के दौरान के अलावा सूर्योदय से पहले देखे जाने की संभावना है। इस बीच मंगल व चंद्रमा एक दूसरे के बेहद करीब नजर आएंगे। मंगल की चमक अपनी औसत चमक से करीब 12 गुना अधिक होगी। आसमानी आतिशबाजी में डेल्टा एक्वारिड्स उल्का वृष्टि 27 जुलाई की रात चरम पर रहने वाली है। मंगल इन दिनों हमारे सर्वाधिक करीब आ पहुंचा है। इससे पहले वर्ष 2003 में मंगल हमारे सर्वाधिक नजदीक पहुंचा था।

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इन कार्यों से बचें

ज्योतिषों के अनुसार ग्रहण के वक्त गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग, रोगी और बच्चों को बाहर नहीं निकलना चाहिए। ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से करीब 9 घंटे पहले ही शुरू हो जाता है। ग्रहण से पहले या बाद में ही खाना खाएं। इसके साथ जिस दिन ग्रहण हो उस दिन किसी शुभ काम की शुरुआत न करें।

सुई और नुकीली चीजों का उपयोग भी नहीं करना चाहिए। अपने कक्ष तुलसी और नीम के पत्ते रखना चाहिए। ग्रहण काल में पति-पत्नी को संबंध नहीं बनाना चाहिए। इस समय में बने संबंध से पैदा होने वाली संतान को जीवन में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

ग्रहण में यह करें

चंद्र ग्रहण के बुरे प्रभाव से बचने के लिए घर में श्रीमदभागवत गीता का पाठ करना चाहिए। इसके अलावा दुर्गा चालीसा का पाठ कर सकते हैं। इसके साथ इस दिन गरीबों को दान देना चाहिए। दान में आटा, चीनी , दाल आदि दे सकते हैं। इसके अलावा जिन लोगों की कुंडली में साढ़ेसाती चल रही है तो उनको शनि मंत्र का जाप करना चाहिए।