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…तो क्या चंदौली की जनसभा से तय होगा महेंद्र नाथ पांडेय का सियासी भविष्य…?

पूर्वांचल के लोकसभा क्षेत्रों में विपक्ष खासतौर से सपा-बसपा गठबंधन की घेराबंदी के लिए रविवार को चंदौली आ रहे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह कई संदेश देंगे। दौरे में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय के सिर्फ स्टार प्रचारक के तौर पर मिशन 2019 की सफलता के लिए काम करने, चंदौली से ही या फिर जौनपुर से चुनाव लड़ने की अटकलों पर भी विराम लग सकता है।

31 अगस्त को बतौर प्रदेश अध्यक्ष डॉ. पांडेय के कार्यकाल का एक साल पूरा हो जाएगा। 2014 के चुनाव के बाद चंदौली आ रहे शाह का खास मकसद मौके पर जाकर पूर्वांचल के राजनीतिक मिजाज की थाह लेना है। डॉ. पांडेय को अपने संसदीय क्षेत्र में एक लाख की भीड़ जुटाने का लक्ष्य दिया गया है। भीड़ डॉ. पांडेय की सियासी जमीन और राजनीतिक कद का पैमाना बनेगी।

तय हो जाएगा कि उनको 2019 के चुनाव तक इसी पद पर रखा जाए या फिर कोई दूसरी जिम्मेदारी सौंपी जाए। चंदौली सीट पर किसी भी कीमत पर कब्जा बरकरार रखने की ब्यूह रचना पर भी इसी दौरान मंथन संभव है। वजह, चंदौली सीट में वाराणसी जिले के दो विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। भाजपा यहां जोखिम नहीं उठाना चाहेगी।

शाह ने केंद्र और राज्य में सहयोगी दल अपना दल (एस) के क्षेत्र मिर्जापुर का जुलाई में दौरा किया था। दौरे में उन्होंने साफ कर दिया था कि गठबंधन को लोकसभा चुनाव में और मजबूती दी जाएगी। मिर्जापुर सीट से अद (एस) की ओर से केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल फिर से मैदान में उतरेंगी। इसके बाद पीएम मोदी की सभा से इसकी पुष्टि हो गई।

दूसरी ओर प्रदेश सरकार में सहयोगी दल सुभासपा लोकसभा चुनाव में चार सीटों पर दावा जता रही है और चंदौली भी इसमें शामिल है। रैली से काफी कुछ साफ हो जाएगा कि इस सीट को भाजपा अपने पास रखेगी या फिर गठबंधन के खाते में डाल देगी। पिछड़ा वर्ग बहुल सीट पर ब्राह्मण दूसरे स्थान पर हैं। डॉ. पांडेय को 2014 के चुनाव में 414135 वोट मिले थे।

बसपा के अनिल कुमार मौर्य यहां दूसरे और सपा के रामकिशुन तीसरे नंबर पर रहे थे। दोनों को 461524 वोट मिले थे। 2019 में सपा-बसपा गठबंधन यहां भारी पड़ सकता है। संघ की सलाह पर डॉ. पांडेय को 59 साल की उम्र में ब्राह्मण चेहरे के तौर पर अध्यक्ष बनाया गया था। वह शाह के विश्वस्त हैं।

शाहजहांपुर की सभा में पीएम ने उन्हें अपना मित्र बताया। डॉ. पांडेय को 11 महीने के कार्यकाल में संगठन और सरकार में समन्वय के लिए तो जाना जाता है पर सक्रियता और आक्रामकता के मामले में उनके खास समर्थक भी केशव प्रसाद मौर्य से पीछे मानते हैं। कई मामलों में उनकी तुलना इन्हीं की उम्र के पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी की सक्रियता से भी की जाती है।

राज्यपाल बनाए जाने वाले पांडेय दूसरे

एक पखवारे से डॉ. पांडेय को सिक्किम का राज्यपाल बनाने की खबरें सोशल मीडिया पर चल रही हैं। इससे विरोधी खेमा खुश है लेकिन डॉ. पांडेय समर्थकों का कहना है कि इस पद पर पार्टी के राष्ट्रीय कार्यालय में कार्यालय सचिव महेंद्र पांडेय को राज्यपाल नियुक्त किया जाना है।

संघ के पूर्व प्रचारक पांडेय हिमाचल प्रदेश में संगठन मंत्री रहे हैं। तीन-चार साल पहले उत्तराखंड अध्यक्ष पद के भी दावेदार थे। शाह के अध्यक्ष बनने के बाद ही उन्हें यहां नियुक्त किया था। वैसे, सिक्किम के मौजूदा राज्यपाल श्रीनिवास पाटिल का कार्यकाल अगले साल 31 जुलाई तक है।

उधर, चार साल पहले शाह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे पर प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय भाजपा उम्मीदवार थे। चुनाव के बाद डॉ. पांडेय केंद्रीय मंत्री बने और फिर उन्हें नई जिम्मेदारी सौंपी गई।

पांच अगस्त को एक राष्ट्रीय अध्यक्ष और दूसरे प्रदेश अध्यक्ष ही एक साथ मंच पर नहीं होंगे, बल्कि रैली में राज्यसभा-लोकसभा सदस्यों की हुंकार जिले के लोगों को सुनने को मिलेगी। रैली में विधान परिषद की नुमाइंदगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। इससे पहले मुख्यमंत्री 25 अक्तूबर को जिले में आए थे। पार्टी के स्थानीय विधायक भी मंच पर मौजूद रहेंगे। 

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