अब यूपी में भी तेज होगी भाजपा की घेराबंदी

लखनऊ : कर्नाटक में भाजपा की असफलता से उत्तर प्रदेश में जहां विपक्षी दलों के हौसले बुलंद हुए हैं, वहीं लोकसभा चुनावों में विपक्ष की एकजुटता का आधार भी मजबूत हुआ है। सपा-बसपा गठजोड़ में अब कांग्रेस का भी शामिल होना लगभग तय माना जा रहा है। शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इसके सीधे संकेत भी दिए कि वह राज्यों में भाजपा के खिलाफ क्षेत्रीय दलों के साथ आगे बढ़ेंगे।अब यूपी में भी तेज होगी भाजपा की घेराबंदी

कर्नाटक में सरकार बनाने में भाजपा की असफलता को विपक्ष अपनी जीत के रूप में ही देख रहा है। बसपा का एक विधायक वहां जीता है, इसलिए पार्टी का मनोबल बढ़ा हुआ है। कांग्रेस पार्टी मुख्यालय में भी अरसे बाद कार्यकर्ता-पदाधिकारी जोश में दिखाई दिए। पूर्व सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा भी-‘यह तो महज ट्रेलर था। असली फिल्म 2019 में दिखाई देगी।’

विपक्ष की एकता भाजपा के लिए अगले चुनावों में बड़ा सिरदर्द हो सकती है। गोरखपुर और फूलपुर में हुए उपचुनाव में सपा और बसपा के साथ ने मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के क्षेत्र में ही भाजपा को चित कर दिया था। इस समय कैराना और नूरपुर उपचुनाव में भी भाजपा को अपनी पूरी ताकत झोंकनी पड़ रही है। गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव सपा और कांग्रेस का गठबंधन था, जिसका कुछ खास असर नहीं सामने आया था लेकिन, यदि सपा-बसपा, कांग्रेस और रालोद एक मंच पर नजर आते हैं तो भाजपा से असंतुष्टों को मजबूत विकल्प दिखाई देने लगेगा।

कैराना और नूरपुर में विपक्ष को मिली नई ऊर्जा

कर्नाटक में भाजपा की असफलता से कैराना संसदीय और नूरपुर विधानसभा में हो रहे उपचुनाव में विपक्ष को नई ऊर्जा मिली है। इन दोनों ही चुनावों में विपक्षी एकता का एसिड टेस्ट भी हो रहा है। कैराना में जहां रालोद के टिकट पर सपा उम्मीदवार लड़ रहा है, वहीं नूरपुर में सपा ने अपना प्रत्याशी उतारा है। बसपा और कांग्रेस ने प्रत्याशी नहीं उतारे हैं।

अखिलेश ने मांगा केंद्र सरकार से इस्तीफा

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा के कर्नाटक में सरकार बनाने में असफल रहने पर केंद्र सरकार से इस्तीफा मांगा है। मध्य प्रदेश में दौरे पर गए पूर्व मुख्यमंत्री ने येद्दयुरप्पा के इस्तीफे के बाद ट्वीट किया- ‘आज का दिन भारतीय राजनीति में धनबल की जगह जनमत की जीत का दिन है। सबको खरीद लेने का दावा करने वालों को आज ये सबक मिल गया है कि अभी भी भारत की राजनीति में ऐसे लोग बाकी है जो उनकी तरह राजनीति को कारोबार नहीं मानते हैं। नैतिक रूप से केंद्र सरकार को भी इस्तीफा दे देना चाहिए।’

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