कर्नाटक चुनाव: मोदी सरकार के इस बड़े अभियान के आगे सिद्धारमैया सरकार का टिक पाना नामुमकिन

कर्नाटक में महज पांच दिन बाद विधानसभा चुनाव होने हैं. राज्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरह से बीजेपी के लिए कैंपेनिंग कर रहे हैं, उससे कांग्रेस परेशान होने लगी है. चुनाव कार्यक्रम के ऐलान के बाद मार्च और अप्रैल में बीजेपी का प्रचार अभियान सुस्त था. बीजेपी के स्टार प्रचारक नरेंद्र मोदी ने प्रचार अभियान की कमान नहीं संभाली थी.कर्नाटक चुनाव: मोदी सरकार के इस बड़े अभियान के आगे सिद्धारमैया सरकार का टिक पाना नामुमकिन

कांग्रेस के कई नेता इस बात से खुश भी थे और हैरान भी. पार्टी के कुछ नेता तो इस दावे के साथ जश्न भी मना रहे थे कि शायद मोदी को भी इस बात का अहसास हो गया है कि कर्नाटक में बीजेपी के जीतने का कोई चांस नहीं है. लेकिन, चुनाव प्रचार की रफ्तार धीमी पड़ती देख प्रदेश बीजेपी ने नरेंद्र मोदी से मदद मांगी.बीजेपी के सीएम कैंडिडेट बीएस येदियुरप्पा भी इन दावों से इनकार नहीं करते. उनका कहना है, “ये सच है कि पहले कांग्रेस हमसे आगे थी. हमारे प्रचार अभियान में आकर्षण नहीं था. मोदी के आने के बाद चीजें एकदम से बदल गईं. उनकी रैलियों में जुट रही भीड़ से जीत के संकेत मिल रहे हैं.”

राज्य के चुनावी माहौल में हुए इस ताजा बदलाव से कांग्रेस भी वाकिफ है. लेकिन, कांग्रेस इस बदलाव को स्वीकार करने के लिए अभी तैयार नहीं है. कांग्रेस पार्टी अभी भी कह रही है कि कर्नाटक में बीजेपी को मोदी भी बचा नहीं पाएंगे. 15 मई को कांग्रेस की ही जीत होगी. बात करते हुए सीएम सिद्दारमैया ने कहा, “राज्य में कहीं भी मोदी की लहर नहीं है. जो भी है, वो मीडिया और बीजेपी ने बनाया है. असल में सिर्फ बीजेपी समर्थक ही मोदी की रैलियों में जा रहे हैं. जनता हमारे साथ है. चुनाव में हर कीमत पर जीत हमारी पार्टी की होगी.”

बात करते हुए सीएम सिद्दारमैया ने कहा, “राज्य में कहीं भी मोदी की लहर नहीं है. जो भी है, वो मीडिया और बीजेपी ने बनाया है. असल में सिर्फ बीजेपी समर्थक ही मोदी की रैलियों में जा रहे हैं. जनता हमारे साथ है. चुनाव में हर कीमत पर जीत हमारी पार्टी की होगी.”कर्नाटक के रण में जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) को थर्ड प्लेयर माना जा रहा है. जेडीएस पर इस ‘करो या मरो’ की लड़ाई में बीजेपी की मदद करने के आरोप लगे हैं. ताजा बदलावों के बारे में जेडीएस को भी जानकारी है.

जेडीएस अच्छी तरह से जानती है कि सिर्फ त्रिशंकु विधानसभा ही उसके लिए हर तरह से फायदेमंद होगी. चुनाव में अगर बीजेपी या कांग्रेस दोनों में से कोई भी बहुमत की सरकार बनाने में कामयाब हो जाती है, तो जेडीएस के लिए कर्नाटक की राजनीति का रास्ता बंद हो जाएगा. जिस तरह से मोदी ने अपनी पहली रैली में पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा की तारीफ की और 48 घंटे के अंदर ही यू-टर्न ले लिया, उससे ओल्ड मैसूर में जेडीएस और देवगौड़ा के लिए भ्रमित करने वाले संकेत मिलते हैं.

मोदी पर पलटवार करने के लिए कांग्रेस चुनाव के आखिरी दिनों में हर संभव कोशिश कर रही है. इसी कड़ी में मंगलवार को सोनिया गाधी मुंबई-कर्नाटक क्षेत्र के लिंगायत बहुल इलाके में रैली करेंगी. राज्य के 30 जिलों में रोड शो और कई रैलियां कर चुके कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी चुनाव के पहले कई जनसभाएं करने वाले हैं. सीएम सिद्धारमैया ने हाल ही में कर्नाटक का 10 दिनों का दौरा खत्म किया है. बुधवार को वह मैसूर में रैली करेंगे, जबकि उसी दिन शिवमोगा में येदियुरप्पा की रैली होनी है.

बीजेपी के लिए मोदी की कैंपेनिंग के साथ-साथ कर्नाटक में प्रचार अभियान अपने आखिरी चरण में है. मोदी बीजेपी के लिए 21 रैलियां कर रहे हैं. कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी अभियान की शुरुआती चरण में ही कांग्रेस ने काफी बढ़त हासिल कर ली थी. अब वो मोदी की कैंपेनिंग के आगे टिकने के लिए संघर्ष करती दिख रही है.कर्नाटक चुनाव को लेकर हुए ज्यादातर प्री-पोल सर्वे में राज्य में हंग असेंबली यानी त्रिशंकु विधानसभा की बात कही जा रही है. लेकिन, बीजेपी इसे गलत साबित करने की पूरी कोशिश करेगी. बहरहाल, जो भी हो अगर जनता खंडित जनादेश देती है, तो इसका फायदा सिर्फ देवगौड़ा की पार्टी जेडीएस को ही मिलेगा.

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