Home > राज्य > दिल्ली > भलस्वा लैंडफिल साइट नहीं हुआ दिशा-निर्देशों का पालन, पड़ी SC की फटकार

भलस्वा लैंडफिल साइट नहीं हुआ दिशा-निर्देशों का पालन, पड़ी SC की फटकार

नई दिल्ली। भलस्वा लैंडफिल साइट पर अगर दिशा-निर्देशों का पालन होता तो शायद उपराज्यपाल को सुप्रीम कोर्ट की फटकार न लगती। विडंबना यह है कि उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, महापौर समेत तमाम जिम्मेदार लोग इस साइट का दौरा कई बार कर चुके हैं। आदेश भी खूब दिए गए। पहले से भी कूड़ा निस्तारण के लिए मानदंड तय हैं। संसद में भी यह मसला उठा, एनजीटी ने दो साल पहले इस संबंध में दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को आदेश दिए, लेकिन सरकारी एजेंसियां यहां तमाम मानदंड और आदेशों को कूड़े तले दबाती रहीं हैं।भलस्वा लैंडफिल साइट नहीं हुआ दिशा-निर्देशों का पालन, पड़ी SC की फटकार

हालात ऐसे हैं कि आज भी भलस्वा लैंडफिल साइट पर निर्धारित मानकों को दरकिनार कर दिल्ली के बहुत बड़े इलाके का कूड़ा डाला जा रहा है। यही वजह है कि यहां साल भर आग लगी रहती है जो मौसम के हिसाब से घटती-बढ़ती है। नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियों के चलते ही यहां लोगों में जानलेवा बीमारी की बात भी सामने आ रही है। सरकारी एजेंसियों द्वारा लगातार की जा रही अनदेखी के कारण लोगों ने खत्ता बंद करने की मांग कई बार उठाई, मौके पर आंदोलन भी किया लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला।

केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रलय ने कूड़ा निस्तारण के लिए मानदंड तय करते हुए उन्हें म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट रूल्स के रूप में 25 सितंबर 2000 को अधिसूचित किया था। इसमें स्पष्ट किया गया कि किस प्रकार से लैडफिल साइटों पर कूड़ा प्रबंधन होगा, किन बातों का ध्यान रखना होगा। जिसमें एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी किया गया कि लैंडफिल साइट पर प्रतिदिन कूड़ा डालने के बाद उसके ऊपर दस सेंटीमीटर मिट्टी की लेयर बनाई जाएगी, जिससे कि कूड़े के कारण पर्यावरण को होने वाले नुकसान को रोका जा सके। इसके साथ ही कूड़े में लगने वाली आग को भी रोका जा सकेगा।

शुरुआती दिनों में तो कुछ दिन तक तो इस निर्देश का पालन किया गया, लेकिन बाद में दिशानिर्देश ताक पर रख दिए गए। इस स्थिति के कारण यहां जल एवं वायु प्रदूषण बढ़ रहा है।  सरकारी एजेंसियों के अलावा निजी संगठनों ने जब यहां अपने स्तर पर वायु एवं जल प्रदूषण मापने के लिए मशीनें लगवाईं तो कई खतरनाक तथ्य सामने आए। जिनकी वजह से कैंसर, गले के रोग, दमा, टीबी, जोड़ों के दर्द, हड्डी रोग, लीवर खराब, उल्टी दस्त, आंत के रोग आदि के मामले सामने आए। यदि मानदंड और दिशानिर्देशों का पालन किया जाता तो ऐसी समस्याएं नहीं आतीं। 

डॉ. उदित राज (स्थानीय सांसद) का कहना है कि मैंने इस मामले को लोकसभा में उठाया। केंद्रीय गृहमंत्री से भी आग्रह किया कि इस लैंडफिल साइट को तुरंत बंद करवाने का। निश्चित ही मामला गंभीर है। लोगों को काफी परेशानी हो रही है। सुप्रीम कोर्ट को भी इस मामले में उपराज्यपाल पर तल्ख टिप्पणी करनी पड़ी है। अगर समय रहते इस पर ध्यान दिया जाता तो शायद यह स्थिति न आती। अभी भी समय है, जिम्मेदार लोग अपना काम ईमानदारी से करें। 

Loading...

Check Also

MP: शहडोल में बोले पीएम मोदी, 'कांग्रेस का हाल है मुंह में राम बगल में छुरी'

MP: शहडोल में बोले पीएम मोदी, ‘कांग्रेस का हाल है मुंह में राम बगल में छुरी’

मध्‍य प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों में बीजेपी की जीत सुनिश्चित करने और प्रचार …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com