दिल्ली में अफसरों पर नियंत्रण मामले में आज SC करेगा सुनवाई

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार बनाम एलजी अधिकार विवाद में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के फैसले के बाद अफसरों पर किसका नियंत्रण होगा? इसको लेकर कोर्ट गुरुवार को सुनवाई करेगा। यह सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के 2 जजों की बेंच करेगी। यहां पर बता दें कि फिलहाल अफसरों की ट्रांसफर-पोस्टिंग का अधिकार दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजला के पास है।दिल्ली में अफसरों पर नियंत्रण मामले में आज SC करेगा सुनवाई

वहीं, दिल्ली में सत्तासीन आम आदमी पार्टी ने अपनी याचिका में कहा है कि संविधान पीठ के फैसले के मुताबिक ये अधिकार उसे मिलना चाहिए। गौरतलब है कि इसी महीने 4 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद भी आम आदमी पार्टी (AAP) और उपराज्यपाल (LG) के बीच अधिकारों की जंग जारी है। 4 जुलाई के बाद से अब तक कई मुद्दों पर सरकार और एलजी के बीच कई मुद्दों पर टकराव हो चुका है और टकराव जारी है।

पिछले दिनों ही दिल्ली सरकार अधिकारों के मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई थी। यहां पर बता दें कि 4 जुलाई को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संवैधानिक बेंच ने अनुच्छेद-239 एए पर व्याख्या की, लेकिन दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के बीच अधिकारो को लेकर कई और मुद्दे सुप्रीम कोर्ट के सामने आए थे जिस पर अभी सुनवाई होनी बाकी रह गई है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र के हक में सुनाया था फैसला

ये सभी याचिकाएं दिल्ली हाई कोर्ट के फ़ैसलों के ख़िलाफ़ दायर की गई हैं, जिनमें HC ने फैसला केंद्र सरकर के हक में सुनाया था, जिससे दिल्ली सरकार को बड़ा झटका लगा था।

21 मई 2015 को केंद्र ने दिया था नोटिफिकेशन

गौरतलब है कि गृह मंत्रालय ने तीन साल पहले 21 मई, 2015 को एक नोटिफिकेशन जारी किया था। इसके तहत उपराज्यपाल के पास सर्विस मैटर, पब्लिक ऑर्डर, पुलिस और लैंड से संबंधित मामले को रखा गया है, साथ ही इसमें ब्यूरेक्रेट के सर्विस से संबंधित मामले भी शामिल हैं।

वहीं, इसी महीने 4 जुलाई को दिल्ली के मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल को नसीहत देते हुए मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्र की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने दिल्ली को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 239एए की व्याख्या करते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इस फैसले के बाद से दिल्ली में सत्तासीन आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार अपनी जीत बता रही है, लेकिन यह जान लेना जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट ने अभी सिर्फ दिल्ली की संवैधानिक स्थिति पर व्यवस्था दी है। दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ लंबित दिल्ली सरकार की अपीलों की मेरिट पर फैसला नहीं दिया है। दिल्ली सरकार की लंबित कुल छह अपीलों पर अभी नियमित पीठ में सुनवाई होगी और उन पर फैसला आना बाकी है।

बता दें कि बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार के अधिकारों की व्याख्या करते हुए साफ कर दिया है कि उपराज्यपाल दिल्ली के मुखिया जरूर हैं, लेकिन उनके अधिकार सीमित हैं। लोकतंत्र में चुनी हुई सरकार को अहमियत देते हुए कोर्ट ने कहा है कि मंत्रिपरिषद को फैसले लेने का अधिकार है। उसमें दखल नहीं होना चाहिए। उपराज्यपाल मंत्रिमंडल की सलाह पर काम करेंगे और मतांतर होने पर मामला राष्ट्रपति को भेज सकते हैं, लेकिन उन्हें स्वतंत्र रूप से फैसला लेने का अधिकार नहीं है।

उपराज्यपाल को मंत्रिमंडल के हर फैसले की सूचना दी जाएगी, लेकिन उसमें उनकी सहमति जरूरी नहीं है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार व उपराज्यपाल को संविधान का मंतव्य समझाते हुए मिल-जुलकर समन्वय से काम करने की नसीहत दी है। कोर्ट ने साफ कहा है कि संविधान में निरंकुशता व अराजकता का कोई स्थान नहीं है। जाहिर है कि इस अराजकता की अलग-अलग व्याख्या भी शुरू हो गई है।

हाई कोर्ट में नहीं चली थी सरकार की दलील, एलजी को बताया था बॉस

केंद्र व दिल्ली सरकार के बीच दिल्ली की हुकूमत को लेकर उठे विवाद पर 5 अगस्त 2016 को हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी व न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ ने उपराज्यपाल को ही दिल्ली का प्रशासनिक प्रमुख करार दिया था। खंडपीठ ने कहा था कि आप सरकार की यह दलील आधारहीन है कि उपराज्यपाल को मंत्रिमंडल की सलाह पर काम करना चाहिए। संविधान के अनुच्छेद 239एए की धारा (3)( ए) के तहत इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। दिल्ली के उपराज्यपाल के पास अन्य राज्यों के राज्यपाल के मुकाबले व्यापक विवेकाधीन शक्तियां हैं। हाई कोर्ट ने उपराज्यपाल को प्रधानता देते हुए कहा था कि मंत्रिमंडल अगर कोई फैसला लेता है तो उसे उपराज्यपाल के पास भेजना ही होगा। अगर उपराज्यपाल का उस पर अलग दृष्टिकोण रहता है तो इस संदर्भ में केंद्र सरकार की राय की जरूरत पड़ेगी। उपराज्यपाल दिल्ली के प्रशासनिक प्रमुख हैं और नीतिगत फैसले बिना उनसे संवाद किए स्थापित व जारी नहीं लिए जा सकते।

हाई कोर्ट ने किया था स्पष्ट, उपराज्यपाल प्रशासनिक प्रमुख क्यों

उपराज्यपाल दिल्ली के प्रशासनिक प्रमुख क्यों है। इस पर हाई कोर्ट ने स्पष्ट करते हुए कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 239, 239एए व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र अधिनियम 1991 पढ़ने के बाद यह स्पष्ट होता है कि दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश है। अनुच्छेद 239 एए के तहत दिल्ली को कुछ विशेष प्रावधान प्राप्त हैं, लेकिन ये प्रावधान अनुच्छेद 239 के प्रभाव को भी कम नहीं कर सकते जो केंद्र शासित प्रदेश से संबंधित है। ऐसे में प्रशासनिक मुद्दों में उपराज्यपाल की सहमति अनिवार्य है। यहां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री का दफ्तर होने के साथ-साथ कई प्रमुख संस्थाएं भी हैं। राष्ट्रीय विधायिका, राष्ट्रीय कार्यपालिका, सुप्रीम कोर्ट, सेना प्रमुख, अर्धसैनिक बलों के अलावा यहां कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं व कई देशों के दूतावास हैं।

यह है मामला

23 सितंबर 2015 को अदालत ने सीएनजी फिटनेस घोटाले की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग को चुनौती देने, उपराज्यपाल द्वारा दानिक्स अधिकारियों को दिल्ली सरकार के आदेश न मानने, एसीबी के अधिकार को लेकर जारी केंद्र की अधिसूचना व डिस्कॉम में निदेशकों की नियुक्ति को चुनौती समेत अन्य मामलों में रोजाना सुनवाई करने का फैसला किया था। 24 जुलाई 2016 को अदालत ने दिल्ली सरकार की उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसमें इन मामलों की सुनवाई पर रोक लगाने की मांग की गई थी। इस बीच दिल्ली सरकार इन मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने याचिका सुनने से इन्कार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट से जल्द से जल्द फैसला करने को कहा था।

तारीखों में जानें अधिकारों को लेकर विवाद, कब-क्या हुआ

केंद्र एवं दिल्ली सरकार के बीच विवाद तब शुरू हुआ जब अरविंद केजरीवाल ने 2014 में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, मुकेश अंबानी, यूपीए सरकार में तत्कालीन मंत्री एम वीरप्पा मोइली एवं मुरली देवड़ा पर गैस के रेट फिक्स करने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया।

2 मई 2014- रिलायंस इंडस्ट्रीज ने एफआइआर रद कराने के लिए हाईकोर्ट में दस्तक दी

8 मई 2014- केंद्र हाईकोर्ट गया, दलील दी गई कि एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) के पास न तो पावर है और न ही उसका कार्यक्षेत्र है कि मंत्रियों के खिलाफ जांच कर सके

9 मई 2014- हाईकोर्ट ने एफआइआर रद करने के लिए दिल्ली सरकार को नोटिस दिया, लेकिन एसीबी से जांच जारी रखने को कहा गया

20 मई 2014- हाईकोर्ट ने केंद्र से कहा कि रिलायंस इंडस्ट्री एसीबी की जांच में सहयोग करे

9 अगस्त 2014- एसीबी ने हाईकोर्ट में कहा कि उनके पास गैस दाम केस में एफआइआर दर्ज करने की शक्ति है

19 अगस्त 2014- एसीबी ने हाईकोर्ट में कहा कि वह इस केस में जांच नहीं कर सकती क्योंकि केंद्र की 23 जुलाई 2014 की अधिसूचना के मुताबिक केंद्र सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ जांच करने की शक्ति उससे ले ली गई है

16 अक्टूबर 2014- दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट में कहा कि एसीबी मामले की जांच कर सकती है

28 अक्टूबर 2014- हाईकोर्ट ने केंद्र को समय दिया कि एसीबी की शक्ति पर स्थिति स्पष्ट की जाए

4 दिसंबर 2014- रिलायंस इंडस्ट्रीज ने हाईकोर्ट में कहा कि राज्य सरकार केंद्र के निर्णय पर जांच करा रही है, जो सही नहीं है

25 मई 2015- हाईकोर्ट ने कहा कि एसीबी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर सकती है जोकि केंद्र के अधीन हैं तो एसीबी को शक्ति वाली केंद्र की अधिसूचना में कुछ संदेह है

26 मई 2015- दिल्ली में अफसर तैनात करने की शक्ति एलजी को देने वाली अधिसूचना के खिलाफ हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर हुई

28 मई 2015- एलजी को शक्ति देने के खिलाफ दिल्ली सरकार हाईकोर्ट में गई तो केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट के 25 मई के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जिसमें केंद्र की अधिसूचना में संदेह जताया गया

29 मई 2015- हाईकोर्ट ने एलजी से कहा कि दिल्ली सरकार के उस प्रस्ताव पर गौर किया जाए जिसमें नौ अधिकारियों का तबादला करने के लिए कहा गया है

27 जनवरी 2016- केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट में कहा कि दिल्ली पूर्ण राज्य नहीं है औैर केंद्र के अधीन है

5 अप्रैल 2016- आप सरकार ने हाईकोर्ट में कहा कि याचिका को उच्च बेंच के पास भेजा जाए

4 जुलाई से 8 जुुलाई- सुप्रीम कोर्ट की अलग-अलग बेंच ने आप सरकार की याचिका पर सुनवाई के मामले से खुद को अलग कर लिया

4 अगस्त 2016- हाईकोर्ट ने कहा, एलजी ही दिल्ली के प्रशासनिक प्रमुख हैं

15 फरवरी 2017- सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और केंद्र के बीच का मसला संवैधानिक बेंच के पास भेजा

6 दिसंबर 2017- संवैधानिक बेंच के पास मसला आने के बाद कई दलीलें हुईं और बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया

4 जुलाई 2018- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एलजी के पास स्वतंत्र रूप से कोई भी निर्णय लेने की शक्ति नहीं है। वह मंत्रियों के समूह विचार और प्रस्ताव पर कामकरने के लिए बाध्य हैं।

Loading...
loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Copy is not permitted !!

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com