SC ने पूछा- राजस्थान की तरह MP में छपी मतदाता सूची पार्टियों को क्यों नहीं दी गई

नई दिल्लीः आगामी मध्यप्रदेश और राजस्थान विधानसभा चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग को लेकर कांग्रेस की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 10 सितंबर के लिए सुनवाई टल गई है. जस्टिस एके सीकरी और जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने चुनाव आयोग से पूछा है कि राजस्थान की तरह मध्यप्रदेश में छपी हुई मतदाता सूची पार्टियों को क्यों नहीं दी गई? वहीं सुप्रीम कोर्ट के सवाल पर चुनाव आयोग ने जवाब दाखिल करने के लिए समय की मांग की है. चुनाव आयोग द्वारा समय मांगने के बाद अब मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी. दरअसल, पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर एक हफ्ते में जवाब मांगा था. कांग्रेस की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि राज्य में करीब 60 लाख फर्जी वोटर्स हैं. ऐसे में चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुधार के लिए मध्य प्रदेश और राजस्थान विधानसभा चुनाव में हर सीट की 10 फीसदी VVPAT पर्चियों के EVM से मिलान किया जाए.

VVPAT पर्चियों के EVM से मिलान
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ, महिला कांग्रेस की जनरल सेक्रेटरी जया ठाकुर और राजस्थान कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुधार की मांग की है. इसके अलावा याचिका में मध्य प्रदेश और राजस्थान विधानसभा चुनाव में हर सीट की 10 फीसदी VVPAT पर्चियों के EVM से मिलान की मांग की गई है. याचिका में कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट इलेक्शन कमीशन को निर्देश दे कि EVM में डाले गए वोटों का मिलान VVPAT से कराया जा सके. जया ठाकुर ने अपनी याचिका में विशेष तौर पर कहा है कि वोटर आईडी को आधार से लिंक किया जाए ताकि बड़े पैमाने पर फर्जी वोटरों की पहचान हो सके. 

कांग्रेस ने फर्जी वोटरों का उठाया था मुद्दा
बता दें इससे पहले कांग्रेस ने मध्यप्रदेश में फर्जी वोटरों का मुद्दा उठाया था. राज्य में कांग्रेस चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस पर आपत्ति जताई थी, वहीं, मामला सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने कहा था कि वह जांच कराएगा. इसके लिए आयोग 4 जगहों पर अपनी टीम भेजेगा. कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा था कि वह चुनाव आयोग से इसकी शिकायत करेंगे. वहीं, कमलनाथ ने कहा था कि हम चुनाव आयोग को सबूत देंगे कि राज्य में 60 लाख फर्जी वोटर हैं. ये नाम जानबूझकर लिस्ट में शामिल किए गए हैं. यह प्रशासनिक लापरवाही नहीं, प्रशासनिक दुरुपयोग है.  

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों के लिए इस साल के आखिरी तक चुनाव होना है. इसके साथ ही छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी चुनाव होंगे. अभी मध्य प्रदेश में 167 सीटों के साथ भाजपा सत्ता में है. दिसंबर 2013 में हुए चुनाव में कांग्रेस 57, बसपा 4 सीटों पर जीती थी. दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार चुने गए थे. वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग ने भोपाल और नर्मदापुरम (होशंगाबाद) संभाग के लिए आयोग की टीम बनाकर मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की जांच का आदेश दिया था. 

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