एससी-एसटी एक्ट के विरोध को लेकर हुई अलर्ट, जुटाई जा रही है बंद समर्थकों की जानकारियां

एससी-एसटी एक्ट के विरोध में गर्माए माहौल में मंगलवार को स्वाभिमान सम्मेलन में राजपूत करणी सेना की एंट्री से प्रशासन और पुलिस दोनों सकते में हैं। यहां आयोजन की परमिशन राजपूत करणी सेना को आगे रखते हुए नहीं ली गई थी बल्कि करणी सेना का नाम शामिल होने वालों में लिखे थे। स्वाभिमान सम्मेलन में कथा वाचक देवकीनंदन ठाकुर की हुंकार और राजपूत करणी सेना की खुली चुनौतियों से सवर्ण आंदोलन को और हवा मिली है,यही अफसरों को परेशान किए हुए है। शाम को ही 11 सितंबर तक धारा-144 लगाए जाना, इसका सीधा संकेत है। अब पुलिस और प्रशासन की नजर 6 सितंबर को होने वाले भारत बंद पर है। अफसर अब और ज्यादा अलर्ट मोड पर आ गए हैं। वहीं अब प्रदेशभर और दूसरे राज्यों में भी स्वाभिमान सम्मेलन की राजपूत करणी सेना ने घोषणा की है।

ज्ञात रहे कि देशभर में राजपूत करणी सेना के प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रशासन का अनुभव अच्छा नहीं रहा है। पिछले महीनों में पद्मावत फिल्म रिलीज के दौरान करणी सेना का उत्पात भी सामने आया था। अब सवर्ण आंदोलन में कमान संभालने वाली राजपूत करणी सेना का चेहरा खुलेआम सामने आया है जिससे पुलिस और प्रशासन के माथे पर चिंता की लकीरें आ चुकी हैं। आगामी रणनीति क्या होगी और सवर्ण आंदोलन में अब क्या होगा,यह अफसरों की जिज्ञासा बनी हुई है।

ऋषभ भदौरिया को हाथ लगाए कोई, चंबल में उबाल आ जाएगा स्वाभिमान सम्मेलन में मंच से राजपूत करणी सेना ने दो टूक शब्दों में पुलिस और प्रशासन को चुनौती देते हुए कहा कि मंच पर मौजूद ऋषभ भदौरिया ये खड़े हैं और इन पर झूठे मुकदमे लादे हैं। अगर अब पुलिस और प्रशासन ने हाथ लगाया तो चंबल में उबाल आ जाएगा। इस दौरान महेंद्र चौहान भी मंच पर दिखा। ज्ञात रहे कि एससी-एसटी एक्ट के विरोध में दो अप्रैल को हुए हिंसक उपद्रव के दौरान हत्या करने का आरोप ऋषभ भदौरिया पर है और महेंद्र चौहान पर गोली चलाने के तहत मामला दर्ज है।

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