रावण ने खुद बताया था, इस तरह बना था इतना धनवान और शक्तिशाली

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रामायण में रावण का एक ऐसा पत्र रहा है जो सबसे ज्यादा चर्चित है और उसका हमेशा से जिक्र होता है. यह तो सभी जानते हैं कि, रावण बेहद शक्तिशाली इंसान था और धनवान भी. तो इसके पीछा का राज क्या है यह हर कोई नहीं जनता है.

 हम जब भी रामायण काल की बात करते हैं तो रावण के पात्र का सबसे अधिक ज़िक्र किया जाता है. रावण को हम सभी रामायण (ramayan) के नकरात्मक पात्र मानते है, हम यह तो जानते है की माता सीता का हरण कर रावण ने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल करी थी जिसकी वजह से रावण को अपनी जान तक गवानी पड़ी थी. परन्तु वास्तविकता में रावण यह जानता की श्री राम भगवान विष्णु के अवतार है तथा यदि उनके हाथो किसी मनुष्य की मृत्यु हो तो उसे वैकुंठ धाम की प्राप्ति निश्चित है. अपने पुरे परिवार के उधार के लिए उसने जानबुझ कर श्री राम से शत्रुता मोल ली थी. जाहिर है रावण बेहद शक्तिशाली था जिसको मारने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा था. 

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असुरो का सम्राट होने के बावजूद भी रावण एक महाज्ञानी पंडित तथा शास्त्रो में पारंगत था. सौरमंडल के सम्पूर्ण ग्रह रावण के इशारों पर चला करते थे, कोई भी ग्रह रावण के विरुद्ध कार्य नहीं कर सकता था. मेघनाद के जन्म के पूर्व जब वह अपनी माता मंदोदरी के गृभ में था तब रावण ने उसे अमर बनाने के लिए सभी नक्षत्रों को एक स्थिति में ला दिया था.  रावण संहिता (ravan sanhita) के अनुसार धन प्राप्ति के इच्छुक व्यक्ति को प्रातः शीघ्र उठना चाहिए. अपने नित्य कर्मो आदि से निर्वित होकर, नदी या जलाशय जाकर स्नान करना चाहिए. स्नान करने के बाद उस किसी वृक्ष के नीचे आसन लगाकर बैठे जहां शांत वातावरण हो. रावण हमेशा से भगवान शंकर का भक्त रहा है और हमेशा उनका जाप करता था. इस वजह से शिवजी ने अपनी शक्ति रावण को दे दिन थी. इस वजह से वह शिव भक्त होने के साथ ही महापंडित और ग्यानी बन गया. 

 

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