राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदूषण जांच में देरी पर वसूली जा रही पेनल्टी पर लगाई रोक

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदूषण जांच में देरी पर वसूली जा रही पेनल्टी रोक लगा दी है। प्रदूषण जांच में देरी पर एक हजार रूपए वसूले जा रहे थे। बनवारी लाल शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एम.एन भंडारी की अदालत ने राजस्थान मोटरयान प्रदूषण जांच केन्द्र योजना 2017 स्कीम पर रोक लगा दी है।राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदूषण जांच में देरी पर वसूली जा रही पेनल्टी पर लगाई रोक

इसके साथ ही मुख्य सचिव, परिवहन आयुक्त और आरटीओ जयपुर से इस मामले में जवाब मांगा गया है। याचिकाकर्ता बनवारी लाल शर्मा ने कोर्ट से अपील की थी कि प्रदूषण जांच में देरी होने पर सरकार पेनल्टी वसूल रही है,जबकि मोटर व्हीकल एक्ट में इसका कोई प्रावधान नहीं है। राजस्थान सरकार के परिवहन विभाग ने इससे पहले 2016 में भी लाइसेंस नवीनीकरण में देरी पर जुर्माने का प्रावधान किया था।

इसको राजस्थान हाईकोर्ट ने अवैध बताकर निरस्त कर दिया था। विभाग ने प्रदूषण जांच समय पर नहीं करवाने वालों से पेनल्टी वसूलने के लिए नियमों में संशोधन का प्रस्ताव चलाया था लेकिन विधि विभाग ने लौटा दिया था । दरअसल, मोटर वाहन अधिनियम की धारा 111 में राज्य को ऐसा नियम बनाने का अधिकार ही नहीं है ।

1000 रुपए तक पेनल्टी वसूली

वाहन का पीयूसी लेने में देर होने पर जांच से पहले जुर्माना चुकाना होता है। ई-मित्र पर जुर्माने की रसीद कटवाने पर ही प्रदूषण जांच का प्रावधान किया गया। चार पहिया वाहन के लिए 1000 रुपए और दुपहिया वाहन के लिए 500 रुपए की रसीद कटवानी पड़ती है। ई-मित्र संचालक इसके लिए 6 रुपए शुल्क अतिरिक्त वसूलता है द्ध इस जुर्मानें के बाद चार पहिया पेट्रोल वाहन 50 रुपए, डीजल वाहन 100 रुपए और दुपहिया वाहन 50 रुपए में पीयूसी यानी प्रदूषण जांच करवा सकता है।  

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