पंजाब सरकार की कार्यप्रणाली से राहुल गांधी नाखुश

जालंधर : तकरीबन डेढ़ साल की कैप्टन सरकार की कार्यप्रणाली से खुद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी खुश नजर नहीं आ रहे हैं। पंजाब में जिस तरह विकास का पहिया थमा हुआ है और सी.एम. दरबार में आम आदमी की कोई सुनवाई नहीं है, उससे राहुल गांधी खासे नाराज चल रहे हैं। यही नहीं, लगातार सी.एम. कैप्टन अमरेंद्र सिंह व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ की आ रही शिकायतें भी हाईकमान को परेशान कर रही हैं। 

इसके अलावा जिस तरह भाजपा के खिलाफ प्रदेश कांग्रेस द्वारा मुंह नहीं खोला जा रहा, वह राहुल गांधी को हजम नहीं हो रहा है। यही कारण है कि कांग्रेस की राष्ट्रीय वॢकग कमेटी में राहुल गांधी ने पंजाब के इन दिग्गज नेताओं को पूरी तरह से नजरअंदाज किया है। उम्मीद थी कि कैप्टन अमरेंद्र सिंह, सुनील जाखड़, नवजोत सिंह सिद्धू व मनप्रीत बादल में से किसी को वर्किंग कमेटी में शामिल किया जा सकता है, मगर इन सब की बजाय पंजाब की राजनीति में कम सक्रिय अम्बिका सोनी को शामिल कर इन नेताओं को राहुल गांधी ने झटका दिया है। गौर हो कि राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के 7 महीने बाद मंगलवार को राहुल गांधी ने राष्ट्रीय कांग्रेस वर्किंग कमेटी का ऐलान किया था जिसमें पंजाब से सिर्फ एक ही चेहरा अम्बिका सोनी को जगह मिल पाई है।

पूर्व की वर्किंग कमेटी में कैप्टन अमरेंद्र सिंह भी शामिल थे और इस बार उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। पंजाब की जनता ने अकाली-भाजपा की नीतियों से परेशान होकर कांग्रेस का हाथ थामा था और इस उम्मीद से प्रचंड बहुमत दिया था कि लोगों की बात सुनी जाएगी और प्रदेश में विकास भी होगा मगर पिछले डेढ़ साल में सरकार रैवेन्यू जुटाने के प्रति एक भी बड़ा कदम नहीं उठा सकी है। उलटा प्रोफैशनल टैक्स समेत कई अन्य तरह के टैक्स लगाकर जनता पर बोझ ही लादा गया है। जिस नशे के मुद्दे पर अकाली-भाजपा सरकार बैकफुट पर थी, वही नशे का मुद्दा कांग्रेस के गले की फांस बना हुआ है।

यह इस कदर हावी हो चुका है कि कांग्रेस अब अकाली-भाजपा पर वार करने से भी कतराने लगी है। राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा की नाकामियां भुनाने में भी प्रदेश कांग्रेस पूरी तरह से नाकाम साबित हुई है। इसके अलावा संगठन में भी जिस तरह से कोई सक्रियता दिखाई नहीं दे रही है और वर्करों में पूरी तरह से हताशा बनी हुई है, उसे देखते हुए भी राहुल गांधी खफा चल रहे हैं। राहुल को मालूम है कि अगर इसी तरह कैप्टन सरकार की वर्किंग चलती रही तो 2019 चुनाव में पंजाब से कांग्रेस को लोकसभा में बहुत कम सीटें मिल सकती हैं। यह कांग्रेस के लिए बेहद घातक होगा, क्योंकि पंजाब ही एक ऐसा बड़ा राज्य कांग्रेस के पास बचा है जहां उसकी सरकार है। 

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