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पेरिस में पेश हुआ हेपेटाइटिस सी के इलाज का पंजाब मॉडल

चंडीगढ़। हेपेटाइटिस सी से निपटने में पंजाब मॉडल बहुत ही कारगर साबित हुआ है। इस मॉडल के तहत इलाज करने से बीमारी पर जल्द कंट्रोल करने में मदद मिली है। चंडीगढ़ पीजीआइ के एक सीनियर डॉक्‍टर द्वारा तैयार किए गए इस प्रोजेक्‍ट को पेर‍िस में अयोजित लिवर कांग्रेस में पेश किया गया तो उसे वहां खूब वाहवाही मिली।पेरिस में पेश हुआ हेपेटाइटिस सी के इलाज का पंजाब मॉडल

पीजीआइ के डॉक्टर के शोधपत्र को इंटरनेशनल लीवर कांग्रेस में पेश किया गया

इस खास प्रोजेक्ट पर चंडीगढ़ पीजीआइ के सीनियर प्रोफेसर डॉ. आरके धीमान कई सालों से काम कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट पर उनके शोध पत्र को पेरिस में हुई इंटरनेशनल लीवर कांग्रेस में पेश करने के लिए चुना गया। डॉक्टर धीमान द्वारा तैयार शोधपत्र को पीजीआइ में ही उनकी सहयोगी डॉक्टर गगनदीप ग्रोवर ने पेश किया।

शोधपत्र में हेपेटाइटिस सी की रोकथाम के लिए पंजाब सरकार की नीति को पेश किया गया, जिसमें बताया गया है कि पंजाब में सबसे ज्यादा हेपेटाइटिस सी के मामले सामने आ रहे हैं। ज्यादातर पीडि़त या तो जेल में हैं या फिर नशे के आदी हैं। प्रो. धीमान हिपोटोलॉजी विभाग के हेड हैं। इसके अलावा पंजाब सरकार द्वारा बनाए गए कार्यक्रम में टेक्नीकल कंसलटेंट भी नियुक्त हैं। डॉ. गगनदीप ग्रोवर को इस प्रोजेक्ट का प्रोग्राम ऑफिसर नियुक्त किया गया है। प्रो. धीमान वर्ष 1993 से पीजीआइ में कार्यरत हैं।

जागरण से बातचीत में प्रो. धीमान ने बताया कि पंजाब सरकार की पहल के बाद वहां सभी जिलों और तीन मेडिकल कॉलेजों को डीसेंट्रलाइज किया गया। इसके बाद मरीज को ट्रीटमेंट तो पीजीआइ का मिल रहा था, लेकिन डिस्ट्रिक और मेडिकल कॉलेज को इसके लिए पीजीआइ द्वारा गाइड किया जाता है।

उन्होंने बताया कि इसके लिए सभी 25 सेंटरों में टेली कांफ्रेंसिंग की जाती है। एक मुद्दे की जानकारी सभी सेंटर को एक साथ दी जाती है। इसके अलावा हर मरीज का डाटा कंप्यूटराइज किया गया है, जिस पर हर मरीज की दवाई की डेट और इलाज की जानकारी होती है। यदि कोई मरीज वहां नहीं आता है, तो इसका अलर्ट मरीज के साथ-साथ डॉक्टर को भी जाता है। पंजाब सरकार ने 2016 में जब अभियान की शुरुआत की, तब पंजाब में 29371 लोग इस बीमारी से ग्रस्त थे। इनमें 61.7 प्रतिशत पुरुष थे, जिनकी आयु 42 वर्ष से कम थी। एक साल के अभियान के बाद मरीजों की संख्या 19646 रह गई।

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