पाकिस्तान: बैंक, रियल एस्टेट से लेकर किराने की दुकान तक चलाती है ‘पावरफुल’ सेना

पाकिस्तान के आम चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी पाकिस्तान तहरीक-ए- इंसाफ (PTI) के चीफ इमरान खान को फिलहाल देश की ताकतवर सेना का लाडला माना जा रहा है. साल 1947 में पाकिस्तान की आज़ादी के बाद से अब तक लगभग आधे समय वहां सेना का ही शासन रहा है. पाकिस्तान में सेना के पास कई ऐसे विशेषाधिकार हासिल हैं, जो शायद ही किसी देश की सेना को मिले हों. यहां की सेना बैंक-जमीन से लेकर किराने की दुकान तक में अपना दखल रखती है.पाकिस्तान: बैंक, रियल एस्टेट से लेकर किराने की दुकान तक चलाती है 'पावरफुल' सेना

पाक का वजीर-ए-आज़म बनने के लिए इमरान को पड़ेगी छोटे दलों की ज़रूरत

आम चुनाव में इमरान खान की पार्टी बंपर जीत मिली. अब तक आए नतीज़ों के मुताबिक, पीटीआई को सबसे ज्यादा 119 सीटें मिली हैं. इस तरह देखा जाए तो इमरान खान का प्रधानमंत्री बनना तय है. चुनाव से पहले इस साल मई में अमेरिकी अखबार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ को दिए एक इंटरव्यू में इमरान ने कहा था, ‘यह पाकिस्तान की सेना है, दुश्मन की सेना नहीं है. मैं सेना को अपने साथ लेकर चलूंगा.’ ऐसे में अगर वह पीएम बनते हैं, तो ज़ाहिर तौर पर सेना के इशारे पर ही काम करेंगे. एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना रक्षा क्षेत्र से इतर ऐसे कई क्षेत्रों में एक्टिव है, जहां अमूमन बाकी देशों की सेना का दखल नहीं होता. कारोबार के क्षेत्र में पाकिस्तानी सेना की महत्वाकांक्षा बढ़ती ही जा रही है. 

आइए, जानते हैं पाकिस्तानी सेना के पास कौन-कौन से हैं विशेषाधिकार?

पाकिस्तानी सेना पॉलिटिक्स, इंडस्ट्री, बिजनेस, बैंकिंग, रियल एस्टेट, कॉमर्शियल प्रोजेक्ट, फॉरेस्ट सेक्टर, ट्रांसपोर्ट में अपना कंट्रोल रखती है. कराची स्टॉक एक्सचेंज में सेना ही सबसे बड़ी निवेशक है. ज्यादातर सेक्टर्स में पाकिस्तानी सेना ही निवेश करती है. प्रॉफिट का पूरा हिस्सा सेना के पास ही जाता है.

सेना कल्याण संगठन ऐसा ही एक संगठन है, जो खाने-पीने की चीज़ों, कपड़े, जूट, बिजली की चीजें (उपकरण) में कारोबार करता है. यही नहीं, अगर आप पाकिस्तान के गांवों में आइसक्रीम खरीद रहे हैं, तब भी हो सकता है कि आप सेना के किसी कारोबार का प्रोडक्ट खरीद रहे हों.

‘Dawn’की खबर के मुताबिक, पाकिस्तान में सरकारी ज़मीन नाम की कोई चीज़ नहीं है. यहां करीब 80 फीसदी ज़मीन पर सेना का अधिकार है. कृषि भूमि भी इसमें शामिल है. बिना सेना की परमिशन के न तो आप कोई ज़मीन खरीद सकते हैं और न ही कोई ज़मीन बेच सकते हैं. यहां की ज्यादातर ज़मीनों में सेना ने मिलिट्री कैंप बना रखा है. पाकिस्तान में रिटायर्ड आर्मी चीफ के स्टाफ को 400 एकड़ कृषि भूमि मुफ्त में अलॉट किया गया है.

पाकिस्तानी सेना ‘फौजी फाउंडेशन’ नाम से एक संगठन चलाती है. शुगर मिल्स, अनाज उत्पादन, नैचुरल गैस की सप्लाई, पॉलीप्रॉपलीन (मजबूत किस्म का प्लास्टिक) प्रोडक्शन, ऑयल रिफाइनरी, फर्टिलाइज़र्स, सीमेंट, पावर प्रोडक्शन पर इस संगठन का कंट्रोल होता है.

‘Business Line’ की रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर में पाकिस्तानी सेना करीब 85 से 90 फीसदी का दखल रखती है. यह आर्मी वेलफेयर ट्रस्ट (AWT) के नाम से एक ट्रस्ट चलाती है, जो पाकिस्तानी के सबसे बड़े बैंक ‘अश्कारी कॉमर्शियल बैंक’ समेत ज्यादातर फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन को कंट्रोल करती है.

पाकिस्तान में सेना स्टड फार्म्स, राइस मिल्स, फिश फार्म्स, फार्मास्यूटिकल कंपनी और वूलेन मिल्स भी चलाती हैं. सुपरमार्केट और ग्रोसरी मार्केट भी सेना के ही कंट्रोल में है.

सेना के कंट्रोल में हाउसिंग प्रोजेक्ट, कंस्ट्रक्शन कंपनियां और ट्रांस्पोर्टेशन कंपनियां भी हैं. टेलीकॉम इंडस्ट्री में भी इसका दखल है. एक्सपोर्ट-इंपोर्ट सेक्टर को भी सेना ही कंट्रोल करती है.

देश के बड़े-बड़े एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन और यूनिवर्सिटीज़ भी सेना के दखल में हैं. पाकिस्तानी में सेना ‘एलिट पब्लिक स्कूल’ नाम से स्कूल नेटवर्क भी चलाती है.

पाकिस्तानी सेना अब पावर प्लांट और बीमा के क्षेत्र में भी पैर पसारने की योजना बना रही है. जल्द ही इससे संबंधित प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा.

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