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	<title>राजनीति &#060; Ujjawal Prabhat | उज्जवल प्रभात</title>
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	<description>Hindi News, Lifestyle &#38; Entertainment Articles.</description>
	<lastBuildDate>Tue, 02 Jun 2026 08:34:57 +0000</lastBuildDate>
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	<title>राजनीति &#060; Ujjawal Prabhat | उज्जवल प्रभात</title>
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		<title> भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष की नई टीम में उत्तराखंड के चेहरे हो सकते हैं शामिल, दौरे के बाद बदलाव</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Jun 2026 08:34:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="661" height="360" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/URYFJ.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%85%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7-2/"> भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष की नई टीम में उत्तराखंड के चेहरे हो सकते हैं शामिल, दौरे के बाद बदलाव</a></p>
<p>भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम में उत्तराखंड के कई चेहरों को जगह मिल सकती है। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री से लेकर कई पूर्व सांसद भी शामिल हो सकते हैं। महामंत्री संगठन अजय कुमार की विदाई के बाद अब उच्च स्तर पर कई और बदलावों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। तीन दिन का &#8230;</p>
<p>आप पढ़ रहे हैं : UjjawalPrabhat.Com</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="661" height="360" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/06/URYFJ.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%af-%e0%a4%85%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7-2/"> भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष की नई टीम में उत्तराखंड के चेहरे हो सकते हैं शामिल, दौरे के बाद बदलाव</a></p>

<p>भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम में उत्तराखंड के कई चेहरों को जगह मिल सकती है। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री से लेकर कई पूर्व सांसद भी शामिल हो सकते हैं। महामंत्री संगठन अजय कुमार की विदाई के बाद अब उच्च स्तर पर कई और बदलावों की सुगबुगाहट तेज हो गई है।</p>



<p>तीन दिन का जो दौरा नितिन नवीन ने किया, उसी दौरान अपनी नई टीम के लिए कुछ चेहरे भी पहचाने। बताया जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री समेत कई नेताओं को जल्द ही नितिन अपनी नई टीम में जगह दे सकते हैं। ये या तो राष्ट्रीय स्तर पर संगठन में काम करेंगे या फिर किसी राज्य विशेष की जिम्मेदारी भी दी जा सकती है।</p>



<p><strong>नितिन के दौरे के बाद नवीन बदलाव संगठन महामंत्री अजय राजस्थान भेजे</strong></p>



<p>भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के देहरादून दौरे के बाद अब संगठन में पहला नया और बड़ा बदलाव हुआ है। सोमवार को उत्तराखंड भाजपा के संगठन महामंत्री अजय कुमार को पार्टी ने राजस्थान का संगठन महामंत्री बना दिया।</p>



<p>14 सितंबर 2019 में भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संगठन मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे अजय कुमार को उत्तराखंड भाजपा का महामंत्री संगठन बनाया था। उनके नेतृत्व में पार्टी ने पहले 2022 के विधानसभा चुनाव 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा निकाय, पंचायत चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया।</p>



<p><br />राष्ट्रीय अध्यक्ष का हाल का तीन दिवसीय प्रवास खत्म होने के बाद दूसरे ही दिन ये बदलाव सामने आया है। केंद्रीय नेतृत्व ने सबसे पहले महामंत्री संगठन अजय कुमार को उत्तराखंड से हटाकर राजस्थान में महामंत्री संगठन की जिम्मेदारी सौंपी है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं मुख्यालय प्रभारी अरुण सिंह की ओर से सोमवार को जारी पत्र के अनुसार, यह फैसला भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के निर्देश पर लिया गया है। यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। अभी उत्तराखंड में उनकी जगह किसी को जिम्मेदारी नहीं दी गई है।</p>



<p><strong>विवादों में भी आया था नाम</strong></p>



<p>महामंत्री संगठन अजय कुमार का नाम अंकिता भंडारी मामले जैसे विवाद में भी घसीटा गया था। भले ही उन्हें बड़े राज्य राजस्थान की जिम्मेदारी दी गई है लेकिन विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अचानक उन्हें बदलने को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के तीन दिवसीय दाैरे में सभी अहम बैठकों में अजय कुमार बराबर शामिल हुए थे और भावी चुनावी रणनीति का हिस्सा बने थे। राज्य में उनका अनुभव लंबा और अहम था। अब जबकि चुनाव में कुछ माह बचे हैं, नए संगठन महामंत्री के लिए जिम्मेदारी चुनाैतीपूर्ण होगी।</p>



<p><strong>अजय का रहा अहम योगदान : चौहान</strong></p>



<p>भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान ने कहा कि महामंत्री संगठन अजय कुमार के कुशल नेतृत्व में भाजपा ने चुनावी रणनीति में अजेय बनते हुए, सांगठनिक विस्तार के क्षेत्रों में अपार सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सामान्य सांगठनिक प्रक्रिया के तहत उन्हें राजस्थान में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। जिसका उद्देश्य संगठन को और अधिक मजबूत बनाने तथा संगठनात्मक गतिविधियों को गति देना है। उन्होंने प्रदेश महामंत्री संगठन के शानदार दो कार्यकाल के रूप में उन्होंने उत्तराखंड में पार्टी को बहुमूल्य योगदान दिया है।</p>
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		<title>बीजेपी में टिकट बचाने की- कांग्रेस में टिकट पाने की होड़</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 22 May 2026 06:07:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तराखंड विधानसभा चुनाव]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="768" height="512" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/8uihjk.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%9f%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%9f-%e0%a4%ac%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95/">बीजेपी में टिकट बचाने की- कांग्रेस में टिकट पाने की होड़</a></p>
<p>उत्तराखंड विधानसभा चुनाव को अब कुछ ही महीने बाकी है ऐसे में एक सबसे बड़ी चुनौती नेताओं के सामने पार्टी आला कमान से टिकट पाने की है। भारतीय जनता पार्टी में जहां 10 साल के कार्यकाल के दौरान विधायकों और मंत्रियों के सामने परफॉर्मेंस और इंटरनल सर्वे के आधार पर अपनी टिकट बचाने की चुनौती &#8230;</p>
<p>आप पढ़ रहे हैं : UjjawalPrabhat.Com</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="768" height="512" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/8uihjk.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%ac%e0%a5%80%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%9f%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%9f-%e0%a4%ac%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95/">बीजेपी में टिकट बचाने की- कांग्रेस में टिकट पाने की होड़</a></p>

<p>उत्तराखंड विधानसभा चुनाव को अब कुछ ही महीने बाकी है ऐसे में एक सबसे बड़ी चुनौती नेताओं के सामने पार्टी आला कमान से टिकट पाने की है। भारतीय जनता पार्टी में जहां 10 साल के कार्यकाल के दौरान विधायकों और मंत्रियों के सामने परफॉर्मेंस और इंटरनल सर्वे के आधार पर अपनी टिकट बचाने की चुनौती है तो वही भाजपा के कार्यकर्ताओं और विधानसभाओं में नेताओं को टिकट को पाने की चुनौती भी है… हमने यह बानगी मसूरी विधानसभा में बीते दिनों देखि जब कद्दावर और चर्चित कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के सामने उन्हीं के पार्टी के बड़े नेता और देहरादून नगर निगम के पूर्व महापौर सुनील उनियाल गामा ने अपनी दावेदारी ठोक दी थी और कहा था की टिकट पार्टी तय करती है यह किसी की विरासत नहीं होती हैं… इसके बाद तो जैसे नेताओं की टिकट दावेदारी विधायकों के सामने और मंत्रियों के सामने खुलकर सामने आने लगी है</p>



<p>भाजपा के मीडिया प्रभारी और लंबे समय से पार्टी कार्यालय का कामकाज देख रहे मनवीर सिंह चौहान भी अब मेहनत का प्रसाद चाहते हैं लिहाज़ा विधायक बनने के लिए टिकट की दावेदारी कर रहे हैं , तो वहीं पूर्व राज्य आंदोलनकारी रविंद्र जुगरान ने अब अपनी दावेदारी मसूरी से पेश कर दी है … पहाड़ों की बात करें तो वहां पर भी कई भाजपा नेताओं के मन में टिकट पाने और विधायक बने के अरमान पल रहे हैं हालांकि अभी खुलकर भाजपा के स्थानीय नेता कुछ नहीं बोल रहे हैं लेकिन उनका भी यही कहना है कि बदलाव होना चाहिए और लंबे समय से एक ही क्षेत्र में विधायक बनने वाले नेताओं को नए लोगों को मौका देना चाहिए।</p>



<p>हालांकि इन सबके बीच कांग्रेस से आए नए-नए भाजपा नेताओं ने भी दावेदारी में खुद को बनाए रखा है लेकिन यह बीजेपी है जहां जो जितनी दावेदारी करता है वह उतना ही भीड़ का हिस्सा बन जाता है और पार्टी किसी नए चेहरे को मैदान में उतार देती है। बीते दिनों जिस तरह से भाजपा के इंटरनल सर्वे और कुछ मंत्रियों और विधायकों के परफॉर्मेंस को लेकर चर्चाएं शुरू हुई उसके बाद भाजपा मुख्यालय में भी इस बात को लेकर संशय बना हुआ है कि मंत्रियों के टिकट कटेंगे और कई विधायकों के भी टिकट पार्टी काट सकती है जिसका आधार उनकी परफॉर्मेस को बनाया जाएगा।</p>



<p>बाद विपक्ष में कांग्रेस पार्टी की करें तो यहां पर एक अनार सौ बीमार जैसे हालात बने हुए हैं। 10 साल से विपक्ष में बैठी कांग्रेस को लगता है कि इस बार जनता उनको सत्ता में आने का मौका दे सकती है और सत्ता विरोधी लहर में उनका काम आसान हो जाएगा। ऐसे में न सिर्फ उत्तराखंड कांग्रेस के दिग्गज नेता एक जुटता का प्रदर्शन करते दिखते हैं तो वही हर दूसरा नेता विधायक बनने के लिए अपनी टिकट की दावेदारी सड़कों पर बैनर पोस्टर के जरिए जनता के सामने रख रहा है। केवल एक विधानसभा की बात करें तो देहरादून की धर्मपुर विधानसभा में ही एक दर्जन से ज्यादा नेताओं ने अपनी दावेदारी ठोक लिए दी है तो वही बीते दिनों पार्टी में वापसी करने वाले भाजपा नेताओं और पूर्व विधायकों के साथ-साथ लंबे समय से पार्टी का झंडा उठाने वाले कांग्रेसियों ने भी अपने टिकट के लिए दिल्ली से लेकर देहरादून के पार्टी मुख्यालय तक सेटिंग गेटिंग शुरू कर दी है। माहौल देखकर लगता है कि दोनों ही पार्टियों में टिकटों की ये खींचतान सियासी संग्राम में बदल सकती है और उठापटक भी खुलकर दिखाई दे सकती है।</p>
<p>आप पढ़ रहे हैं : UjjawalPrabhat.Com</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>नए सीएम की घोषणा पर कांग्रेस में कलह; राहुल गांधी के खिलाफ लगे पोस्टर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 May 2026 05:38:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[राहुल गांधी]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="771" height="453" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/IOPUO.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/IOPUO.jpg 771w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/IOPUO-768x451.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 771px) 100vw, 771px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%a8%e0%a4%8f-%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%8f%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%98%e0%a5%8b%e0%a4%b7%e0%a4%a3%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0/">नए सीएम की घोषणा पर कांग्रेस में कलह; राहुल गांधी के खिलाफ लगे पोस्टर</a></p>
<p>केरलम में चुनाव नतीजे घोषित होने के 10 दिन बाद भी मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर कांग्रेस में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसी बीच, वायनाड और कोझिकोड में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा को निशाना बनाने वाले पोस्टर सामने आए। ये पोस्टर वायनाड के कलपेट्टा &#8230;</p>
<p>आप पढ़ रहे हैं : UjjawalPrabhat.Com</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="771" height="453" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/IOPUO.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/IOPUO.jpg 771w, https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/IOPUO-768x451.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 771px) 100vw, 771px" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%a8%e0%a4%8f-%e0%a4%b8%e0%a5%80%e0%a4%8f%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%98%e0%a5%8b%e0%a4%b7%e0%a4%a3%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0/">नए सीएम की घोषणा पर कांग्रेस में कलह; राहुल गांधी के खिलाफ लगे पोस्टर</a></p>

<p>केरलम में चुनाव नतीजे घोषित होने के 10 दिन बाद भी मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर कांग्रेस में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसी बीच, वायनाड और कोझिकोड में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा को निशाना बनाने वाले पोस्टर सामने आए।</p>



<p>ये पोस्टर वायनाड के कलपेट्टा में जिला कांग्रेस कार्यालय के नेम-बोर्ड पर और कोझिकोड में उत्तरी करासेरी स्थित प्रियंका के कार्यालय के पास दिखाई दिए। अंग्रेजी में छपे इन गुमनाम पोस्टरों में चेतावनी दी गई थी कि &#8220;वायनाड अगला अमेठी बन जाएगा और गांधी भाई-बहन इस निर्वाचन क्षेत्र से दोबारा जीत नहीं पाएंगे।&#8221;</p>



<h2 class="wp-block-heading">CCTV में दिखा पोस्टर लगाने वाला व्यक्ति</h2>



<p>बुधवार सुबह दोनों जिलों में लोगों ने इन पोस्टरों को देखा। माना जा रहा है कि मंगलवार रात को कुछ अज्ञात लोगों ने इन्हें लगाया था। जिला कांग्रेस नेतृत्व ने इन पोस्टरों को हटवा दिया।</p>



<p>खबरों के अनुसार, अधिकारियों ने पोस्टर लगाने वाले व्यक्ति की CCTV फुटेज हासिल कर ली है। पार्टी ने एक आंतरिक जांच भी शुरू की है, और चेतावनी दी है कि अगर कोई कांग्रेस कार्यकर्ता इसमें शामिल पाया गया, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।</p>



<p>वहीं, एक पोस्टर पर लिखा था, &#8220;राहुल और प्रियंका, वायनाड को भूल जाओ। तुम यहां से दोबारा नहीं जीत पाओगे।&#8221; जबकि दूसरे पर लिखा था, &#8220;RG और PG, यह कोई चेतावनी नहीं है; केरलम इस बड़ी गलती के लिए तुम्हें कभी माफ नहीं करेगा।&#8221;</p>



<p>इसके अलावा एक अन्य पोस्टर में कहा गया था, &#8220;राहुल, KC (AICC महासचिव KC वेणुगोपाल) भले ही तुम्हारे बैग बियरर (सामान उठाने वाले) हों, लेकिन केरलम की जनता तुम्हें कभी माफ नहीं करेगी।&#8221;</p>
<p>आप पढ़ रहे हैं : UjjawalPrabhat.Com</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पश्चिम बंगाल: राज्यपाल आरएन रवि ने ममता मंत्रिमंडल किया भंग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 08 May 2026 06:49:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[पश्चिम बंगाल]]></category>
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					<description><![CDATA[<img width="728" height="433" src="https://ujjawalprabhat.com/wp-content/uploads/2026/05/utyjh.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" /><p><a href="https://ujjawalprabhat.com/%e0%a4%aa%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%86%e0%a4%b0/">पश्चिम बंगाल: राज्यपाल आरएन रवि ने ममता मंत्रिमंडल किया भंग</a></p>
<p>&#160;पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल खत्म होते ही राज्यपाल ने पूरी कैबिनेट को भंग कर दिया और इसके साथ ही ममता बनर्जी अब मुख्यमंत्री नहीं रहीं। गुरुवार, 7 मई को राज्यपाल आर.एन. रवि ने राज्य विधानसभा को भंग करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया। कोलकाता गजट में प्रकाशित इस नोटिफिकेशन के बाद ममता बनर्जी &#8230;</p>
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<p>&nbsp;पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल खत्म होते ही राज्यपाल ने पूरी कैबिनेट को भंग कर दिया और इसके साथ ही ममता बनर्जी अब मुख्यमंत्री नहीं रहीं।</p>



<p>गुरुवार, 7 मई को राज्यपाल आर.एन. रवि ने राज्य विधानसभा को भंग करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया। कोलकाता गजट में प्रकाशित इस नोटिफिकेशन के बाद ममता बनर्जी की सरकार संवैधानिक रूप से खत्म हो गई।</p>



<p>राज्यपाल द्वारा जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 174 की धारा (2) के उप-खंड (बी) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए सात मई, 2026 से विधानसभा को भंग किया जाता है।</p>



<p>संवैधानिक विशेषज्ञों के अनुसार, अनुच्छेद 172 के तहत किसी भी विधानसभा का कार्यकाल उसकी पहली बैठक से अधिकतम पांच वर्ष का होता है। 17 वीं बंगाल विधानसभा की मियाद सात मई की आधी रात को स्वत: समाप्त हो रही थी।</p>



<p><strong>राज्यपाल ने किया विवेकाधीन शक्तियों का प्रयोग</strong></p>



<p>सामान्य परिस्थितियों में मुख्यमंत्री हार के बाद इस्तीफा देते हैं और नई सरकार के गठन तक &#8216;केयरटेकर&#8217; (कार्यवाहक) के रूप में कार्य करते हैं। परंतु, ममता बनर्जी के इस्तीफे न देने के अडिग फैसले ने राज्य को एक जटिल मोड़ पर खड़ा कर दिया था।</p>



<p>ऐसे में राज्यपाल ने अपनी विवेकाधीन शक्तियों का प्रयोग करते हुए सदन को भंग कर दिया, जिससे अब ममता बनर्जी तकनीकी रूप से मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का नैतिक और कानूनी आधार खो चुकी हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ममता का इस्तीफे से इनकार&nbsp;</h3>



<p>इससे पहले ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था, जिसके चलते सियासी खींचतान जारी थी। इसके बावजूद राज्यपाल ने संवैधानिक प्रक्रिया अपनाते हुए कैबिनेट और विधानसभा को भंग कर दिया।</p>



<h3 class="wp-block-heading">तीन बार CM रह चुकीं ममता&nbsp;</h3>



<p>ममता बनर्जी 2011 से लगातार सत्ता में थीं और तीन बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। उनका कार्यकाल विवादों, हिंसा और विकास योजनाओं के मिश्रण के लिए जाना जाता है। अब सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य में नई सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।</p>



<p><strong>भविष्य की राजनीति के लिए निर्णायक</strong></p>



<p>सूत्रों के मुताबिक, बहुमत प्राप्त दल के रूप में भाजपा नौ मई को रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के अवसर पर कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में भव्य शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करने जा रही है। राज्यपाल जल्द ही बहुमत दल के नेता को सरकार बनाने का न्योता देंगे। फिलहाल, बंगाल की सत्ता का केंद्र नवान्न (सचिवालय) से खिसक कर राजभवन की ओर बढ़ गया है, जहां अगले 48 घंटे राज्य की भविष्य की राजनीति के लिए निर्णायक होंगे।</p>



<p><strong>इस्तीफा नहीं देने पर अड़ी रहीं ममता</strong></p>



<p>चुनाव नतीजों में भाजपा की 207 सीटों की ऐतिहासिक जीत और तृणमूल के दहाई अंकों में सिमटने को ममता बनर्जी ने स्वीकार करने से मना कर दिया है। उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि मैं इस्तीफा नहीं दूंगी। मैं चुनाव हारी नहीं हूं, मुझे हराया गया है। यह जनता का जनादेश नहीं बल्कि ईवीएम की लूट और केंद्रीय एजेंसियों की साजिश है। साफ किया कि वह इस लड़ाई को कानूनी रूप से कोर्ट और नैतिक रूप से सड़क पर लड़ेंगी।</p>
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		<title>देश में लगातार घट रही मुस्लिम विधायकों की संख्या</title>
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		<dc:creator><![CDATA[PMC Data]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 07 May 2026 05:37:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[bjp]]></category>
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<p>देश भर में राज्य के विधानसभाओं में मुस्लिम विधायकों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। यह बदलाव साल 2014 के बाद से ज्यादा देखा जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों की माने तो BJP के बढ़ते असर और विपक्ष की टिकट बांटने की बदलती रणनीति ने मिलकर विधानसभाओं में अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व को कम &#8230;</p>
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<p>देश भर में राज्य के विधानसभाओं में मुस्लिम विधायकों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। यह बदलाव साल 2014 के बाद से ज्यादा देखा जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों की माने तो BJP के बढ़ते असर और विपक्ष की टिकट बांटने की बदलती रणनीति ने मिलकर विधानसभाओं में अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व को कम करने का काम किया है।</p>



<p>आंकड़ों से पता चलता है कि देश में मुस्लिम विधायकों की संख्या 2013 के 339 से घटकर 282 रह गई है। यह गिरावट उन राज्यों में सबसे ज्यादा रही है जो चुनावी नजरिए से सबसे ज्यादा अहमियत रखते हैं। इसमें सबसे पहला नाम उत्तर प्रदेश का है, जहां मुसलमानों की आबादी लगभग 19% है, वहां अब 403 सदस्यों वाले सदन में सिर्फ 31 मुस्लिम विधायक हैं, जो पहले 63 थे।</p>



<h2 class="wp-block-heading">बंगाल, बिहार सहित राजस्थान में घटी संख्या</h2>



<p>पश्चिम बंगाल में यह संख्या 59 से घटकर 37 हो गई है, जबकि बिहार में यह आंकड़ा 19 से घटकर 11 और राजस्थान में 11 से घटकर 6 रह गया है। हालांकि यह सिर्फ BJP की बात नहीं है, देश भर के सभी पार्टियों में यही हाल है। कई राज्यों में तो कुछ पार्टियों ने बहुत कम मुस्लिम उम्मीदवारों के साथ बड़े जनादेश भी हासिल किए हैं।</p>



<p>जिससे उसके प्रतिद्वंद्वियों को अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व को व्यापक जाति और समुदाय के समीकरणों के साथ संतुलित करने पर मजबूर होना पड़ा है। बंगाल और असम (जहां BJP ने 90 सीटों पर चुनाव लड़ा और 82 सीटें जीतीं) BJP ने वहां इस बार कोई भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं उतारा, जबकि 2021 में बंगाल में उसने नौ और असम में आठ मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे।</p>



<h2 class="wp-block-heading">असम में BJP ने अल्पसंख्यक इकाई को भंग कर दिया</h2>



<p>असम में BJP ने अपने सभी मुस्लिम उम्मीदवारों के चुनाव हारने के तुरंत बाद अपनी अल्पसंख्यक इकाई को भंग कर दिया। राष्ट्रीय स्तर पर, BJP के पास केवल दो मुस्लिम विधायक हैं। मणिपुर से अचाब उद्दीन और त्रिपुरा से तफज्ज़ुल हुसैन। यह अंतर बहुत ज्यादा है। बंगाल में, मुसलमानों की आबादी लगभग 27% है, लेकिन अब विधानसभा में उनका प्रतिनिधित्व केवल 12.6% है।</p>



<p>बिहार में, उनकी आबादी लगभग 17% है, लेकिन उनके पास विधानसभा की लगभग 4.5% सीटें हैं। असम में, जहां मुसलमानों की आबादी कुल आबादी के एक-तिहाई से भी ज्यादा है, वहां विधानसभा में उनका प्रतिनिधित्व लगभग 17% है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में मुसलमानों की आबादी 10% से ज्यादा होने के बावजूद, विधानसभा में मुस्लिम विधायकों का प्रतिनिधित्व केवल 3-4% है।</p>



<p>कांग्रेस के पास सबसे ज्यादा 61 मुस्लिम विधायक हैं, उसके बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास 39, और तृणमूल और समाजवादी पार्टी के पास 34-34 विधायक हैं। केरल, जम्मू और कश्मीर और तमिलनाडु ऐसे राज्य हैं जहां मुसलमानों का प्रतिनिधित्व अब भी बेहतर स्थिति में है।</p>
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