खुलासा: 2 साल तक हिमालय की गुफाओं में रहने के बाद भी नरेंद्र मोदी ने चुनी राजनीति

मित्रो हमारे देश में आज से पहले बहुत से ऐसे नेताओं ने देश के उद्धार के लिये अपनी अहम भूमिका निभाने में कोई कसर नही छोड़ी है। वहीं अगर मौजूदा समय की बात ही जाये तो भारत में वर्तमान प्रधान मंत्री देश की शान है। इन्‍होंने कई ऐसे ऐतिहासिक फैसले लेते हुये देशहित में कई अहम कदम उठाये है, जो सराहनीय है। आज हम भारत के प्रधान मंत्री नरेन्‍द्र मोदी के संबंध में कुछ खास जानकारी देने वाले है, जिसेस शायद ही आप लोग अवगत होगें।दरअसल इस बात में तो कोई दो रॉय नही है कि भारत के प्रधान मंत्री ने देश को उच्‍च श्रेणी में पंहुचाने के लिये जी जान लगा दी है।खुलासा: 2 साल तक हिमालय की गुफाओं में रहने के बाद भी नरेंद्र मोदी ने चुनी राजनीति

हालांकि इनका बचपन काफी संघर्षो से भरा रहा है। आपको बता दें कि इनकी मां का नाम हीराबेन है, जिन्‍होंने अपने 12 वर्ष के बेटे नरेन्‍द्र की कुंडली वडनगर आए एक ज्‍योतिषी को दिखाई, तो उन्‍होंने बताया कि आपका बेटा राजा बनेगा या​ फिर शंकराचार्य जैसा कोई महान संत। आपको बता दें कि मेहसाना में 17 सितंबर 1950 को नरेंद्र मोदी का जन्म वृश्चिक लग्न कर्क नवांश वृश्चिक राशि में हुआ था। बचपन में ही नरेन्‍द्र मोदी साधुओं को देखते ही उनके पीछे चल पड़ते थे। ऐसे में उनके माता-पिता को लगने लगा कि उनका बेटा कहीं संन्यासी ना बन जाए, इसलिए नरेंद्र से बिना पूछे ही जसोदाबेन नामक एक लड़की से उनकी शादी करा दी। बाल विवाह के दिनों में शादी के पश्‍चात लड़की को गौना रखने का प्रचलन था। हालांकि इस पर अब रोक लग चुकी है।

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि कुछ वर्षो पश्‍चात जब उनके गौने की बात चलने लगी तो उन्‍होंने अपनी मां से कहा कि मै इन शादी के चक्‍कर में नही पड़ना चाहता हूं।और हिमालय जाकर जिंदगी की असली सच्चाई का पता लगाना चाहता हूं।बावजूद इसके नरेंद्र के गौने के लिए उन पर पूरे परिवार ने दबाव डाला।इसलिए रात के अंधेरे में ही नरेंद्र मोदी घर छोड़कर चले गए। इस संबंध में द आर्किटेक्‍स ऑफ मॉर्डन स्‍टेट की लेखिका कालिंदी रांदेरी के अनुसार नरेंद्र मोदी 2 वर्ष हिमालय की गुफाओं में साधुओं के साथ घूमते रहे। इस दौरान एक साधु से उनकी मुलाकात हुई। उस साधु ने नरेंद्र मोदी से हिमालय आने का कारण पूछा-तब उन्होंने कहा कि ईश्वर की खोज में यहां आया हूं।

इसके पश्‍चात उस साधु ने कहा कि बेटा, तुम्हारी उम्र हिमालय की कंदराओं में भटकने की नहीं है। समाजसेवा करके भी भगवान की प्राप्ति की जा सकती है। इसके पश्‍चात नरेंद्र मोदी घर लौट आए पर शादीशुदा जिंदगी से अलग होने का निर्णय कर चुके थे। गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी 17 वर्ष की उम्र में ही संन्यास जीवन से प्रभावित होकर वर्ष 1967 में कोलकाता को बेलूर मठ भी गए थे। उन दिनों उन्होंने स्वामी माधवानंद से मुलाकात की थी, और तभी से दृढ़ निश्‍चय कर लिया था, कि वे अब पूरा जीवन देशवाशियों को समर्पित कर देगें,और आज वो वही कर रहे है। जो उन्‍होंने संकल्‍प लिया था। इस जानकारी के संबंध में आप लोगों की क्‍या प्रतिक्रियायें है?कमेंट बॉक्‍स में अपनी महत्‍वपूर्ण रॉय अवश्‍य लिखें।

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