कर्नाटक चुनाव में जीत के बाद पीएम मोदी ने महादयी नदी विवाद को सुलझाने का किया वादा

नई दिल्ली. अगले एक हफ्ते में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान करने वाले कर्नाटक में चुनाव प्रचार अब शबाब पर है. भाजपा की तरफ से जहां पीएम नरेंद्र मोदी प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस पर जबर्दस्त प्रहार कर रहे हैं. वहीं, विपक्षी कांग्रेस के नेता भी भाजपा के आरोपों का मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं. चुनाव प्रचार के दौरान हर वो मुद्दे उठाए जा रहे हैं, जिससे ज्यादा से ज्यादा वोटरों को लुभाया जा सके. चाहे वह नदियों के पानी का विवाद हो या जातीय समीकरणों का, कोई भी राजनीतिक दल किसी भी मौके को भुनाने में पीछे नहीं है.कर्नाटक चुनाव में जीत के बाद पीएम मोदी ने महादयी नदी विवाद को सुलझाने का किया वादा

इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दिनों गोवा और कर्नाटक के बीच अर्से से चल रहे महादयी नदी जल बंटवारे का मुद्दा उठाया. कर्नाटक के गडग में अपनी एक चुनावी सभा में पीएम मोदी ने कहा कि नदी जल बंटवारा विवाद कांग्रेस की देन है. उन्होंने जनता को भरोसा दिलाया कि अगर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनती है तो विभिन्न राज्यों के साथ नदी जल बंटवारे के विवाद को सुलझा लिया जाएगा. इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक पीएम नरेंद्र मोदी का गडग की जनसभा में महादयी नदी जल बंटवारा मुद्दे को अपने भाषण में शामिल करना भाजपा की चुनावी रणनीति का हिस्सा है.

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार उत्तर-पश्चिम कर्नाटक की कम से कम 50 विधानसभा सीटें इस नदी के पानी को लेकर प्रभावित हैं. यही वह इलाका है जहां के लोग पिछले कई वर्षों से महादयी नदी के पानी के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं. सिंचाई की समस्या हो या पीने के पानी की, गडग और इसके आसपास के गांव तथा पास ही के धारवाड़ जिले का इलाका इस नदी के पानी पर आश्रित है. ऐसे में भाजपा को लगता है कि महादयी नदी जल बंटवारे का मुद्दा उसके लिए इस चुनाव में ‘गेमचेंजर’ साबित हो सकता है. वह इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस के प्रभुत्व वाले इलाकों में वोटों में सेंध लगा सकती है.

बता दें कि महादयी नदी पर गोवा और कर्नाटक के बीच वर्षों से जल बंटवारे का विवाद है. कर्नाटक से निकलने वाली महादयी नदी का अधिकांश प्रवाह क्षेत्र गोवा में पड़ता है. गोवा सरकार का कहना है कि कर्नाटक महादयी नदी पर बांध बनाकर इसका 7.56 टीएमसी पानी मालाप्रभा बेसिन में जमा करना चाहती है. गोवा सरकार इस परियोजना के खिलाफ है. उसका तर्क है कि इस परियोजना से न सिर्फ पर्यावरण को, बल्कि गोवा को भी नुकसान होगा.

पीएम ने जल बंटवारे को लेकर कांग्रेस पर किया हमला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गडग की अपनी रैली में महादयी नदी जल बंटवारे को लेकर कांग्रेस पार्टी और प्रदेश सरकार पर जमकर हमला बोला. पीएम मोदी ने कर्नाटक और इसके पड़ोसी राज्यों के साथ नदी के पानी बंटवारे के लिए पूर्व यूपीए सरकार और सोनिया गांधी को दोषी बताते हुए खूब आरोप लगाए. पीएम मोदी ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा, ‘पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की वजह से ही आप लोगों को इस नदी का पानी नहीं मिल सका. सोनिया गांधी की पार्टी केंद्र और राज्य, दोनों जगहों पर सत्ता में थी. बावजूद इसके कर्नाटक के लोग नदी के पानी के लिए तरसते रहे.’ पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा, ‘अगर कर्नाटक में भी केंद्र की तरह भाजपा की सरकार बनती है तो मैं कर्नाटक और पड़ोसी राज्यों के साथ नदी जल बंटवारे की समस्या को सुलझा दूंगा.’

जनता की बात- जो पार्टी पानी देगी, उसी को देंगे वोट

गडग के विभिन्न इलाकों के लोग वर्षों से महादयी नदी के पानी के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं. इस चुनाव के दौरान भी स्थानीय जनता इस बात को लेकर गंभीर है कि कौन सी पार्टी महादयी नदी के पानी को लेकर ठोस आश्वासन देती है. ऐसे में पीएम मोदी के दिए बयान पर पर भी क्षेत्र में चर्चाएं हो रही हैं. गडग में रहने वाले गुरुमूर्ति हीरेमाथ ने इकोनॉमिक टाइम्स को बातचीत में कहा, ‘हमारी मुख्य मांग पानी की आपूर्ति है. हम उसी पार्टी को अपना समर्थन देंगे जो हमें इस नदी का पानी देने का भरोसा दिलाएगी. अब पीएम खुद आकर हमें भरोसा दिला रहे हैं. उन्होंने पानी देने का वादा किया है.’ महादयी नदी जल बंटवारे के मुद्दे पर प्रदर्शन करने वाली संस्था के प्रमुख शंकर अंबाली ने अखबार से बातचीत में कहा, ‘हम प्रधानमंत्री से लगातार इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करने के लिए कहते रहे हैं. अब अगर वे विधानसभा चुनाव के समय इस मुद्दे को उठा रहे हैं, तो यह आम जनता की समझ में आता है. लोग चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा अपनाए जाने वाले हथकंडों के बारे में अच्छी तरह से जानते हैं.’

गडग इलाके में अभी कांग्रेस के पास 31 सीटें

कर्नाटक विधानसभा की कुल 224 सीटों में से महादयी नदी प्रभाव-क्षेत्र में 50 सीटें हैं. इनमें से 31 सीटें अभी कांग्रेस के पास हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी के पास 16 और जनता दल (एस) के पास 1 सीट है. दो अन्य सीटों पर निर्दलीय विधायक हैं. विधानसभा चुनाव को लेकर हुए कई स्थानीय सर्वे में यह बात कही गई है कि भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही पार्टियों की इन सीटों पर नजदीकी भिड़ंत संभव है. ऐसे में दोनों ही पार्टियां महादयी नदी प्रभाव क्षेत्र की विधानसभा सीटों पर अपना कब्जा जमाना चाहती हैं. दोनों ही पार्टियों के शीर्षस्थ नेताओं को लगता है कि महादयी नदी जल बंटवारे के मुद्दे पर मिलने वाली सीटें ही, विधानसभा चुनाव में उन्हें बहुमत की ओर ले जाएगी.

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