पंजाब में सिद्धू के रेत कारपोरेशन बनाने के सुझाव पर चलेगा पायलट प्रोजेक्ट

चंडीगढ़। कारपोरेशन बनाकर रेत बेचने के स्थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के सुझाव को पंजाब सरकार पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करेगी। अक्टूबर से शुरू होने वाले रेत खनन के बाद कुछ खड्डों में सरकार खुद ही खनन करके रेत बेचेगी और इस प्रोजेक्ट का फीडबैक लेगी। इस बात की पुष्टि राजस्व एवं खनन विभाग के मंत्री सुखबिंदर सिंह सरकारिया ने की है। उनका कहना है कि सितंबर में रेत खनन पॉलिसी आ जाएगी, जो प्रोग्र्रेसिव बिडिंग पर आधारित होगी।पंजाब में सिद्धू के रेत कारपोरेशन बनाने के सुझाव पर चलेगा पायलट प्रोजेक्ट

सितंबर में आ जाएगी सरकार की रेत खनन नीति, 1800 में 100 क्यूबिक फीट के हिसाब से मिलेगी रेत

कैबिनेट सब कमेटी के चेयरमैन के तौर पर नवजोत सिंह सिद्धू ने तेलंगाना और उत्तराखंड जैसे राज्यों का हवाला देते हुए रेत की बढ़ी कीमतों पर काबू पाने के लिए सुझाव दिया था कि सरकार खुद ही कारपोरेशन बना कर रेत बेचे। इसके अलावा भी सिद्धू ने कई प्रकार के सुझाव दिए थे, जिन पर खासी खींचतान भी चली थी।

सिद्धू ने जब ये सुझाव दिए थे, तो उस समय खनन विभाग मुख्यमंत्री के पास होता था। रेत बेचने के लिए कारपोरेशन बनाने को लेकर कैबिनेट में भी विरोध हुआ था, लेकिन अब सरकार इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में स्वीकार करने जा रही है। खनन मंत्री सुखबिंदर सिंह सरकारिया ने बताया कि कुछ खड्डों पर इसे लागू किया जाएगा और फीडबैक ली जाएगी।

उन्‍होंने कहा कि यह अपने आप में बिल्कुल नया प्रोजेक्ट है। इसलिए पहले यह देखा जाएगा कि क्या सरकार खुद रेत निकाल कर बेच सकती है। क्या इससे लोगों को सस्ती रेत मिलती है और सरकार को भी राजस्व आता है। उसके बाद ही आगे के बारे में कोई फैसला लिया जाएगा।

सस्ती रेत देने की तैयारी

खनन विभाग अक्टूबर से शुरू होने वाली रेत खनन को लेकर नीति बनाने में जुटा है। मंत्री सुखविंदर ने बताया कि सरकार की कोशिश है कि लोगों को अधिकतम 1800 रुपये में 100 क्यूबिक फीट रेत मिल सके और सरकार को भी अच्छा राजस्व प्राप्त हो सके। सरकार मान रही है कि रेत से करीब 400 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो सके।

सुखबिंदर सिंह सरकारिया ने बताया कि प्रोग्रेसिव बिडिंग की पॉलिसी ही अपनाई जाएगी। मंत्री ने बताया कि खनन को लेकर जेबीसी मशीन का प्रयोग करने की छूट दे दी गई है। यानी ठेकेदार जेबीसी मशीन का प्रयोग कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए डिप्टी कमिश्नर से इजाजत लेनी होगी।

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