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आप के बिखरे लोगों को अपने साथ जोड़ने में जुटे खैहरा

चंडीगढ़। पंजाब में दो गुटों में बंटने के बाद बिखरी आम आदमी पार्टी को खैहरा ने समेटना शुरू कर दिया है। वह बिखरी पार्टी को खुद के साथ जोड़ने में जुट गए हैं। पंजाब से खत्म हो चुकी आप की सियासत का नया केंद्र फिलहाल बठिंडा बन गया है। नेता प्रतिपक्ष पद से हटाए जाने के बाद खैहरा ने अपने साथी आठ विधायकों के दम पर 2 अगस्त को बठिंडा में कनवेंशन बुलाकर सीधे-सीधे पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल को चुनौती दी है। इसी बहाने खैहरा आप के मालवा में बचे-खुचे वोट बैंक में भी सेंधमारी करेंगे।आप के बिखरे लोगों को अपने साथ जोड़ने में जुटे खैहरा

खैहरा को 26 जुलाई को पार्टी के पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने एक शिकायत के बाद नेता प्रतिपक्ष के पद से हटा दिया था। हालांकि, खैहरा के पर कतरने के पीछे खैहरा व केजरीवाल के बीच विधानसभा चुनाव में हुई करारी हार के बाद से ही चली आ रही खींचतान सबसे बड़ा कारण है। विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी ने तत्कालीन कन्वीनर सुच्चा सिंह छोटेपुर को भी इसी प्रकार अचानक से पैसे लेने के आरोप लगाकर पद से हटा दिया गया था। इसके बाद उन्होंने पार्टी से अलग होकर अपना पंजाब पार्टी बनाकर विधानसभा चुनाव में आप के वोट बैंक में सेंधमारी की थी।

मालवा में दो दिन से डाला डेरा, दो को बठिंडा में कनवेंशन के बहाने करेंगे शक्ति प्रदर्शन

उसके बाद फिल्म कलाकार गुरप्रीत घुग्गी को पार्टी ने पंजाब का कन्वीनर बना दिया था। घुग्गी की अगुवाई में विधानसभा चुनाव हारने के बाद पार्टी ने उन्हें भी इस पद से हटा दिया था। इसके बाद पार्टी की कमान सांसद भगवंत मान को सौंप दी गई थी। हालांकि, मान पार्टी की बागडोर लेने को तैयार नहीं थे। यही वजह थी कि प्रधान बनने के बाद वह एक महीने के विदेश दौरे पर निकल गए थे। लौट कर आने के बाद भी उन्होंने अपना फोकस अपने हलके व लोकसभा तक ही सीमित रखा था।

 इसी उठापटक के बीच पंजाब से तेजी के साथ खत्म हो रही आप ने नेता प्रतिपक्ष पद से एडवोकेट एचएस फूलका को भी हटा दिया। हालांकि, फूलका ने इस पद से इस तर्क के साथ इस्तीफा दिया था कि वह दंगा पीडि़तों के केस लड़ रहे हैं। इसलिए इस पद पर समय नहीं दे पा रहे हैं। इसके बाद पार्टी ने न चाहते हुए भी नेता प्रतिपक्ष के रूप में खैहरा के हाथों में विधायकों की कमान सौंपी। 

खैहरा ने केजरीवाल के माफी मांगने का किया था विरोध

20 विधायकों की संख्या के साथ विपक्ष में बैठी आप ने खैहरा की अगुवाई में सरकार की नाक में दम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। हालांकि, पार्टी को उसका लाभ कम मिला, लेकिन खैहरा ने अपना सियासी कद जरूर बढ़ा लिया था। इसी बीच केजरीवाल ने नशे के मामले में अकाली नेता बिक्रम मजीठिया से लिखित में माफी मांग ली। खैहरा ने केजरीवाल के इस फैसले का डटकर विरोध किया था।

इससे पहले भी खैहरा लगातार पंजाब में पार्टी के अंदर सारे फैसले लेने के अधिकार पंजाब की इकाई को देने की आवाज उठाते रहे थे। खैहरा के साथ पार्टी के 10 विधायक थे, लेकिन नेता प्रतिपक्ष के पद से हटाए जाने के बाद उनके साथ आठ विधायक रह गए हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि फिर भी 20 में से आठ विधायकों की संख्या पार्टी को जमीन से उखाड़ने के लिए काफी है। 

विधायकों की मांग, फैसले पर दोबारा विचार हो

कनवेंशन बुलाने के बाद खैहरा ने शक्ति प्रदर्शन को लेकर पूरी ताकत झोंक दी है। खैहरा के समर्थक विधायकों की मांग की है कि हाईकमान खैहरा को हटाने के फैसले पर दोबारा विचार करे। हाईकमान ने यह तर्क दिया था कि पार्टी में पूरी पारदर्शिता रखी जाती है और यह फैसला सभी विधायकों की राय के बाद लिया गया है। उसके अगले ही दिन कंवर संधू ने प्रवक्ता के पद से इस्तीफा देकर हाईकमान को संदेश दे दिया था कि वह इस फैसले के खिलाफ हैं।

कुछ घंटों में ही पार्टी के सात अन्य विधायकों ने खैहरा का समर्थन कर दिया। इनमें से ज्यादातर विधायक बठिंडा व आसपास के जिलों से संबंधित हैं। यही वजह है कि खैहरा ने कनवेंशन भी बठिंडा में बुलाई है, जिससे ज्यादा से ज्यादा भीड़ एकत्र करके वह शक्ति प्रदर्शन कर सकें। दो दिनों से उन्होंने मालवा में ही डेरा डाल रखा है।

कनवेंशन को पार्टी का कोई सपोर्ट नहींः डाॅ. बलबीर

आप के प्रदेश सह प्रधान डा. बलबीर सिंह ने कहा है कि 2 अगस्त को बठिंडा में बुलाई गई कनवेंशन से आम आदमी पार्टी का कोई लेना देना नहीं हैं। कनवेंशन खैहरा ने अपने स्तर से बुलाई है। पार्टी की तरफ से किसी कार्यकर्ता को कनवेंशन में जाने के बारे में कोई संदेश नहीं जारी किया गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बारे में लगातार हाईकमान को अपडेट दिया जा रहा है। 

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