श्रीलंका के इस फैसले से भड़क उठा पाकिस्तान, दे डाली ये धमकी…

श्रीलंका के बुर्का बैन पर कानून लाने के ऐलान को लेकर पाकिस्तानी उच्चायोग ने कड़ी आपत्ति जताई है. श्रीलंका में पाकिस्तान के उच्चायुक्त ने कहा है कि इससे श्रीलंका और दुनिया के मुसलमानों की भावनाओं को चोट पहुंचेगी. विरोध जताने के साथ-साथ पाकिस्तान ने इशारों-इशारों में श्रीलंका को धमकी भी दे दी.

बुर्का बैन से जुड़ी एक खबर को ट्वीट करते हुए श्रीलंका में पाकिस्तानी उच्चायुक्त साद खट्टाक ने कहा, “बुर्का बैन से श्रीलंका और दुनिया भर के मुसलमानों की भावनाएं आहत होंगी. कोरोना महामारी की वजह से श्रीलंका पहले ही आर्थिक मुश्किलों में घिरा हुआ है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी श्रीलंका को अपनी छवि को लेकर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे दौर में, आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद, सुरक्षा के नाम पर इस तरह के विभाजनकारी कदम उठाने से देश में अल्पसंख्यकों के मानवाधिकारों को लेकर सवाल और बढ़ेंगे.”

श्रीलंका के पब्लिक सिक्योरिटी मिनिस्टर ने तीन दिन पहले ही सरकार के बुर्का पर बैन लगाने के फैसले के बारे में जानकारी दी थी. इस कदम को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सबसे पहले पाकिस्तान की ही प्रतिक्रिया आई है. खट्टाक ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर श्रीलंका की छवि को लेकर चुनौतियों का जिक्र किया. दरअसल, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में एक हफ्ते बाद श्रीलंका के मानवाधिकार रिकॉर्ड को लेकर सुनवाई होनी है जिसमें सदस्य देश वोटिंग में भी हिस्सा लेंगे. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पाकिस्तान भी सदस्य है और पाकिस्तानी उच्चायुक्त का इशारा इसी ओर था. संयुक्त राष्ट्र में श्रीलंका के मानवाधिकार के रिकॉर्ड पर लाने जाने वाले प्रस्ताव में साल 2021 में मानवाधिकार उच्चायोग की रिपोर्ट को आधार बनाया जा सकता है. इस रिपोर्ट में कहा गया था कि श्रीलंका में तमिल और मुस्लिम अल्पसंख्यक हाशिए पर पहुंच गए हैं और उन्हें सरकारी नीतियों और नेशनल विजन से बाहर रखा जा रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार के शीर्ष स्तर से भेदभावकारी नीतियों को समर्थन मिलने से ध्रुवीकरण और हिंसा का खतरा और बढ़ गया है.

श्रीलंका संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में होने वाली सुनवाई से पहले तमाम देशों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है. श्रीलंका ने भारत से भी बातचीत की है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में 47 सदस्य हैं जिसमें से एक-तिहाई देश इस्लामिक सहयोग संगठन के सदस्य देश भी हैं. इस्लामिक सहयोग संगठन ने श्रीलंका में कोविड-19 से मरने वाले लोगों के इस्लामिक रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार पर पाबंदी को लेकर भी ऐतराज जताया था. अंतरराष्ट्रीय संगठनों और मुस्लिम समुदाय की तरफ से लगातार उठ रहे सवालों के बाद श्रीलंका ने 26 फरवरी को अंतिम संस्कार से जुड़े प्रतिबंध वापस ले लिए थे. श्रीलंका की सरकार ने कहा कि वायरस से पीड़ित लोगों का अंतिम संस्कार अब दफनाकर किया जा सकता है. श्रीलंका के इस कदम को भी मुस्लिम देशों से समर्थन लेने की कोशिश के तौर पर ही देखा गया.

श्रीलंका ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के दौरे के ठीक एक दिन बाद ही कोविड पीड़ितों के इस्लामिक रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार की इजाजत देने का ऐलान किया था. पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, इमरान खान ने अपने दौरे में श्रीलंकाई नेताओं के समक्ष ये मुद्दा उठाया था.

श्रीलंका में पाकिस्तानी उच्चायुक्त खट्टाक ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए ट्वीट किया था. उन्होंने कहा था कि कोविड के पीड़ितों को दफनाने की अनुमति देने का फैसला सांप्रदायिक सौहार्द और दूरगामी नतीजे वाला है. इमरान खान को इसका श्रेय देते हुए खट्टाक ने कहा कि उनके निजी स्तर पर प्रयास से ये संभव हुआ और इससे हमारे रिश्ते और मजबूत होंगे.

श्रीलंका की कुल आबादी 2.2 करोड़ है जिसमें 70 फीसदी आबादी बौद्ध है. यहां 10 फीसदी आबादी मुस्लिम, 12 फीसदी हिंदू और 6 फीसदी कैथोलिक है. श्रीलंका में हाल के कुछ वर्षों में बौद्धों और मुसलमानों के बीच सांप्रदायिक टकराव बढ़ा है, खासकर साल 2019 में श्रीलंका में ईस्टर रविवार को चर्च और होटलों पर हुए हमले के बाद से मुस्लिमों के खिलाफ हमले बढ़े हैं. इस हमले को लेकर इस्लामिक कट्टरपंथियों पर आरोप लगे थे.

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