देश रक्षा को इस युवा ने छोड़ा 12 लाख का पैकेज, बनेंगे फ्लाइंग ऑफिसर

पिथौरागढ़: सेना के जुनून के आगे मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब का ग्लैमर भी युवाओं को फीका लग रहा है। युवा अच्छे खासे पैकेज छोड़कर सेना ज्वाइन कर रहे हैं। सीमांत जिले पिथौरागढ़ के ऐसे ही एक युवा कमलेश बोरा ने सीडीएस परीक्षा में सफलता हासिल की है। वह एक वर्षीय प्रशिक्षण के बाद वायु सेना में फ्लाइंग आफिसर बनेंगें। देश रक्षा को इस युवा ने छोड़ा 12 लाख का पैकेज, बनेंगे फ्लाइंग ऑफिसर

कमलेश की इस उपलब्धि से आठगांव शिलिंग क्षेत्र में खुशी की लहर है। बिलई गांव के रहने वाले कमलेश बोरा ने मल्लिकार्जुन स्कूल से इंटरमीडिएट तक की शिक्षा हासिल की। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई के बाद उन्हें टीसीएच कोलकाता में 12 लाख रुपये पैकेज की नौकरी मिल गई।

सैनिक पृष्ठभूमि के कमलेश सेना के जरिए देश सेवा का जज्बा पाले हुए थे। उन्होंने सीडीएस की परीक्षा दी और वायु सेना में फ्लाइंग आफिसर पद के लिए चुन लिए गए। कमलेश एक साल तक हैदराबाद में प्रशिक्षण लेंगे। कमलेश के पिता प्रकाश सिंह बोरा और माता आशा बोरा हल्द्वानी में रहते हैं। कमलेश के मामा शिक्षक कुंदन सौन और राजेंद्र सौन ने बताया कि कमलेश को सेना से शुरू से ही खासा लगाव रहा है। 

पोस्टमैन का बेटा बना फौज में अफसर

देश सेवा के साथ ही कुछ बेहतर करने की चाह रंगत सिंह के मन में अंगड़ाई ले रही थी। वह फौज में अफसर बनना चाहते थे पर आर्थिक हालात और पारिवारिक परिस्थितियों ने ज्यादा वक्त नहीं दिया। ग्राम चकरा बिश्नाह जम्मू निवासी रंगत के पिता पोस्टमैन थे और वह भी अस्थाई पद पर। यही कारण रहा कि उन्होंने परिवार को आर्थिक रूप से सहारा देने के मकसद से 2008 में टेक्नीशियन के तौर पर एयरफोर्स च्वाइन की। जहां वह नौकरी के साथ ही अपना सपना पूरा करने जुट गए।

सेना के लिए इस युवा ने छोड़ी ढाई लाख महीने की नौकर

सैन्य परंपरा के लिए राजस्थान (देवलीहुल्ला पाली) के प्रवीण सिंह ने मर्चेंट नेवी की ढ़ाई लाख रुपये महीने की नौकरी छोड़ दी। दादा और पिता के बाद तीसरी पीढ़ी में प्रवीण के सैन्य अफसर बनन के बाद उनका परिवार गर्व महसूस कर रहा है। जीवन में पैसों को अहमियत देने वाले युवाओं को आइना दिखाते हुए राजस्थान के प्रवीण सिंह ने सैन्य परंपरा को जिंदा रखा है। प्रवीण सिंह मर्चेंट नेवी में सेकेंड अफसर के पद पर तैनात थे और ढ़ाई लाख रुपये महीना सेलरी ले रहे थे।

मगर उन्होंने आर्टीलर से रिटायर हुए दादा गुमान सिंह और तवांग स्थित चीन बार्डर पर तैनात पिता सूबेदार भंवर सिंह के पद चिह्नों चलने का फैसला लिया। सीडीएस की परीक्षा पास कर प्रवीण ने यह सफलता हासिल भी कर ली। प्रवीण कहते हैं कि मर्चेंट नेवी में सेलरी तो अच्छी थी, मगर सैन्य अनुशासन की कमी खल रही थी। ऐसे में उन्होंने इस नौकरी से इस्तीफा देकर सेना में जाने का फैसला किया। 

Loading...

Check Also

लोगों ने घरों में लगाए काले झंडे, महिलाएं बोलीं- वोट मांगने आए तो चप्पलों से होगा स्वागत

लोगों ने घरों में लगाए काले झंडे, महिलाएं बोलीं- वोट मांगने आए तो चप्पलों से होगा स्वागत

चुनाव का दौर आते ही सभी पार्टियों के नेता गली मोहल्लों में पहुंचने को बेताब …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com