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एक बार फिर आया यमला पगला दीवाना का रिव्यु, कुछ ऐसी है फिल्म

फिल्म: यमला पगला दीवाना फिर से

डायरेक्टर: नवनैत सिंह

स्टार कास्ट: धर्मेंद्र, सनी देओल, बॉबी देओल, कृति खरबंदा, शत्रुघ्न सिन्हा, असरानी

अवधि: 2 घंटा 28 मिनट

सर्टिफिकेट: U/A

रेटिंग: 1.5 स्टारएक बार फिर आया यमला पगला दीवाना का रिव्यु, कुछ ऐसी है फिल्म

साल 2011 में जब फिल्म यमला पगला दीवाना आई, तो उसने दर्शकों को धर्मेंद्र और उनके बेटों के साथ हंसी मजाक का नया फ्लेवर दिया. लेकिन 2013 में रिलीज हुआ दूसरा पार्ट बॉक्स ऑफिस पर धमाल नहीं मचा सका. पहले पार्ट को समीर कार्णिक ने और दूसरे को संगीत सिवान ने डायरेक्ट किया था. अब लगभग 5 साल के बाद इसी सीरीज की तीसरी फिल्म यमला पगला दीवाना फिर से रिलीज हुई है. क्या यह फिल्म दर्शकों को हंसाने में कामयाब होगी. आइए जानते हैं आखिरकार कैसी बनी है यह फिल्म.

कहानी

फिल्म की कहानी पंजाब से शुरू होती है जहां वैद्य पूरन सिंह (सनी देओल) अपने भाई काला (बॉबी देओल) और दो बच्चों के साथ रहता है. पूरन सिंह का एक किराएदार भी है जिसका नाम जयवंत परमार (धर्मेंद्र) है. जो पेशे से वकील भी है. पूरन सिंह के पास वज्र कवच नामक आयुर्वेदिक दवा बनाने का फार्मूला है, जिसका काम कई पीढ़ियों से चलता आ रहा है. उस फार्मूले के पीछे मशहूर बिजनेसमैन माफतिया लग जाता है. कहानी में चीकू (कृति खरबंदा) की एंट्री होती है जो कि एक डेंटिस्ट है और सिलसिलेवार घटनाओं में उसकी मुलाकात पूरन सिंह और काला से होती है. कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब बिजनेसमैन माफिया अपनी तरफ से पूरण सिंह के ऊपर दवा का फॉर्मूला चोरी करने का केस करता है और कहानी पंजाब से गुजरात पहुंच जाती है. अंततः क्या होता है यह जानने के लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी.

कमजोर कड़ियां

फिल्म की कमजोर कड़ी इसकी कहानी है जो काफी आउटडेटेड सी नज़र आती है और बांध पाने में असमर्थ दिखाई देती है. सनी देओल-बॉबी देओल और धर्मेंद्र जैसे बड़े-बड़े कलाकार की अदाकारी कहानी की वजह से फीकी पड़ जाती है. डायरेक्शन भी काफी हिला डुला है. कहानी सुनाने का ढंग भी काफी डगमगाया सा है. इसकी रफ्तार धीमी है जो दुरुस्त की जा सकती थी. इसके अलावा फिल्म के गाने रिलीज से पहले हिट नहीं हो पाए हैं. फिल्म में और मसाला भरा जा सकता था. लेकिन ऐसा नहीं हो पाया.

जानिए आखिर फिल्म को क्यों देख सकते हैं

धरम पाजी, सनी देओल और बॉबी देओल, तीनों अभिनेताओं ने बढ़िया काम किया है. इसके साथ ही अभिनेत्री कृति खरबंदा ने भी कहानी के मुताबिक ही अभिनय किया है. फिल्म की सबसे बढ़िया बात इसके आखिर में आने वाले गीत में दिखाई देती है जब सलमान खान, रेखा, सोनाक्षी सिन्हा एक साथ धर्मेंद्र के गाने रफ्ता-रफ्ता पर थिरकते हुए नजर आते हैं. लेकिन कहानी कमजोर होने की वजह से हर एक परफॉर्मेंस काफी निराशाजनक दिखाई देती है.

बॉक्स ऑफिस

फिल्म का बजट लगभग 40 करोड़ रुपए बताया जा रहा है. इसे लगभग 2000 से ज्यादा स्क्रीन्स पर रिलीज किया जा रहा है. इसी के साथ फिल्म स्त्री भी रिलीज हो रही है. अब देओल परिवार के फैंस ही इस फिल्म को आगे ले जा सकते हैं.

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