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सीबीआई से दागी फर्म पर मेहरबान, विद्युत् उत्पादन निगम के निदेशक बीएस तिवारी

लखनऊ : योगी सरकार मे बिजली विभाग में तैनात निदेशक बीएस तिवारी डंके की चोट पर सीबीआई जांच में फंसी दागी कंपनी को बिना टेंडर दूने दाम पर बिजली घरों के मेनटेनेंस का काम सौंप रहा है. न खाउंगा न खाने दूंगा के प्रधानमंत्री मोदी के ऐलान को खुले आम ठेंगा दिखाते हुए उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम के निदेशक तकनीकी विद्यासागर तिवारी भरपेट खाने में जुटे हैं. यह तब हो रहा है जबकि कैग भी कह रहा है कि खुली निविदा के आधार पर बिजली घरों के अनुरक्षण का काम निजी कंपनियों से कराया जाए. किसी सस्ते जासूसी उपन्यास के खलनायक की तर्ज पर विद्यासागर तिवारी कोड भाषा में इंजीनियरों को संदेश भेज दागी कंपनी को काम देने को कह रहा है.

  • अनपरा यूनिट के चीफ इंजीनियर खुली निविदा के पक्ष में, जबकि विद्युत उत्पादन निगम के निदेशक तकनीकी बीएस तिवारी आफर लेटर के जरिये काम देने का बना रहे दबाव.
  • मेसर्स आई.एल. कोटा /पलक्कड़ के दागी अफसर अनुज गोयल और बीएस तिवारी मिलकर कर रहे खेल.
  • बीएस तिवारी का यह घोटाला प्रकरण प्रबंध निदेशक की जानकारी में, फिर भी कोई कार्यवाही नहीं.
  • संकटों से जूझ रही फर्म के अध्यक्ष रामानंद और उनके कनिष्ठ अनुज गोयल की भ्रष्टाचार को लेकर हो चुकी है सीबीआई जांच.
  • पनकी में 2012 में बिना निविदा के चल रहे अनुरक्षण के काम पर कैग की निगेटिव रिपोर्ट, निविदा से कार्य कराने की बात रिपोर्ट में.
  • अनपरा में रिपोर्ट को दरकिनार कर 23 जनवरी 2018 को पुनः बिना निविदा के अनुरक्षण का कार्य दिया गया.
  • बीएस तिवारी के कारनामों में शामिल चीफ इंजीनियर आनद कुमार ने अनपरा (D) पावर हाउस को सांकेतिक भाषा में किया ईमेल कि “please forward proposal for subjected work as directed by Dir (Tech) to CGM, Anpara in the discussion held on dt.16.01.2018.” इस तरह का ईमेल बीएस तिवारी के कारनामों को उजागर करते हैं.
  • कांट्रेक्टर एसोसिएशन ने भी प्रबंध निदेशक को पत्र लिखकर तमाम आरोपों के साथ ही साथ बिना निविदा के माध्यम से उत्पादन निगम में चल रहा पैसों के बंदरबांट की बात कही है. 

समाजवादी पार्टी के कृपा पात्र रहे उत्पादन निगम लिमिटेड के निदेशक तकनीकी बीएस तिवारी ने सभी सीमाएं लांघते हुए इन कार्यों को ओबरा और अनपरा पावर हाउसों में निविदा प्रक्रिया से हटाकर सीधे ऑफर लेकर मेसर्स आई. एल. कोटा/पलक्कड़ को दे दिया गया है जिससे करोड़ों का सालाना शासन को नुकसान हुआ है. जिसकी बंदरबांट बीएस तिवारी और आईएल के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के बीच की गयी.

उत्पादन निगम द्वारा चलाये जा रहे विद्युत् पावर हाउसों में लगे कंट्रोल उपकरणों की देख रेख अनुरक्षण का कार्य निविदा द्वारा कराया जाता है. इस कार्य हेतु विशेषज्ञ एजेंसी का चयन सभी परियोजनाओं पर खुली ई निविदा द्वारा किया जाता है जोकि सरकार की नीति और आदेश है. बताते चलें कि जिस मेसर्स आई. एल. कोटा/पलक्कड़ कंपनी को बीएस तिवारी ने यह कार्य दिया है. जबकि मेसर्स आई. एल. कोटा/पलक्कड़ के अध्यक्ष रामानंद और उनके सहयोगी अनुज गोयल के खिलाफ सीबीआई भी घोटालों को लेकर जांच कर चुकी है. मेसर्स आई. एल. कोटा/पलक्कड़ के दागी अफसर अनुज गोयल और उत्पादन निगम के तकनीकी निदेशक बीएस तिवारी अपने कारनामों को अंजाम दे रहे हैं. श्री तिवारी सीएजी आडिट के सुझावों को दरकिनार किये हुए हैं और सरकारी कोष को चूना लगाने में लगे हैं. और यह सब प्रबंध निदेशक उत्पादन निगम के संज्ञान में है फिर भी इसपर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है.

14 जून 2012 को बिना टेंडर के पनकी में अनुरक्षण कार्यों हेतु मेसर्स इंस्ट्रुमेंन्टेशन लिमिटेड (M/S Instrumentation Ltd.) को 6 महीने के लिए दिया गया जिसकी कुल लागत 23.70 लाख रहा. लेकिन सीएजी आडिट में जब इसपर ऊँगली उठी और काम को निविदा के माध्यम से कराने की बात कही. उत्पादन निगम ने दुबारा जब इसके लिए निविदा आमंत्रित की तो यही कार्य मेसर्स पदमापत इंजीनियर्स (M/S Padmapat Engeeniars) को 1 वर्ष के लिए 22 लाख 61 हजार 797 रूपये में दिया गया. यानी कि निविदा के माध्यम से वही अनुरक्षण का कार्य आधे से कम कीमत में कुशलता पूर्वक संपन्न किया गया. खुली निविदा के माध्यम से अनुरक्षण का यह कार्य पनकी के अलावा अनपरा में 22 जनवरी 2018 तक चला लेकिन आदत से मजबूर श्री तिवारी ने पुनः खेल शुरू किया और जो काम कानपुर के पनकी में सीएजी आडिट की रिपोर्ट के बाद निविदा से शुरू हुआ था पुनः उसी कार्य को अनपरा में बिना टेंडर के शुरू कर दिया.

पत्र- पनकी में केवल आफर लेटर पर दिया जा रहा था काम जिसपर सीएजी ने खुली निविदा आमंत्रित करने के लिए कहा था

– सीएजी की आपत्ति के बाद पदमापत इंजीनियर्स को खुली निविदा से मिला काम  जिससे कीमतें हुई आधी से कम

अनपरा में 23 जनवरी 2018 को अन्य कार्यों के साथ ही इस कार्य को भी पुनः मेसर्स इंस्ट्रुमेंन्टेशन लिमिटेड (M/S Instrumentation Ltd.) को 1 साल के लिए दे दिया गया. ऐसे में अनपरा में भी अगर टेंडर और बिना टेंडर की कीमतों का फर्क निकालें तो आधे से अधिक होता है जोकि साबित करता है कि किस तरह से सरकारी धन की बंदरबांट की जा रही है. इस तरह से उत्पादन निगम में बीएस तिवारी की शह पर दोगुनी से तीन गुनी कीमतों पर कार्य बिना निविदा के कराया जा रहा है जबकि वही कार्य सीएजी आडिट के बाद निविदा के माध्यम से आधे से कम कीमत पर निगम द्वारा कराया जा चुका है. ऐसे में जनता के पैसों की किस तरह से बंदरबांट किया जा रहा है यह साबित करना काफी है. सबसे मजे की बात तो यह है कि यह कार्य प्रबंध निदेशक से लेकर निदेशक तक सबकी जानकारी में चल रहा है फिर भी सब चुप हैं या फिर लूट का मजा ले रहे हैं. मजे की बात यह है कि अनपरा यूनिट के चीफ इंजीनियर के द्वारा खुली निविदा के पक्ष में लिखने के बाद भी सीधे कार्य आवंटन की प्रक्रिया जारी है.

इस क्रयादेश की दरों निविदा से प्राप्त दरों से लगभग दो गुनी हैं तथा इसे तिवारी द्वारा यह लिखकर निविदा कमेटी से पास करा लिया गया है कि मेसर्स आईएल कोटा/पलक्कड़ भी बीएच एल की तरह एक सरकारी कंपनी है. जबकि बीएचई एल अधिकतर आईटमों का मूल निर्माता है तथा इसके पूर्ण समर्पित सर्विस सेंटर हैं. जबकि पलक्कड़ कुछ वाल्व सिस्टम ही बनाता है और उसे डीसीएम सिस्टम, इलेक्ट्रानिक कार्ड, ट्रांसमीटर, मापन उपकरण और अन्य संवेदी उपकरणों का दिया गया है. मेसर्स आईएल कोटा बंदी की कगार पर है और इसके स्टाफ को वीआरएस दिया जा रहा है. इससे जाहिर होता है कि इसमें बीएस तिवारी और आईएल कोटा के कुछ अधिकारी मिलकर बंदरबांट कर रहे हैं और राजकोष को क्षति पहुंचा रहे हैं.

इसके पहले भी पनकी पावर हाउस में भी कंट्रोल उपकरणों का अनुरक्षण मेसर्स आईएल द्वारा बिना निविदा द्वारा कराया जा रहा था जिसपर सीएजी आडिट में आपत्ति दर्ज की गयी और अनुरक्षण के कार्यों को टेंडर के माध्यम से कराए जाने की बात कही गयी. टेंडर के माध्यम अनुरक्षण का कार्य दिए जाने पर कीमत में आधे से ज्यादा का फर्क आया और अनुरक्षण का कार्य भी सफलता पूर्वक पूरा हुआ.

पनकी के बाद कुछ समय तक अनपरा में भी खुली निविदा की प्रक्रिया का पालन किया गया लेकिन बाद में-

 

ओबरा और अनपरा में भी यह कार्य खुली निविदा के माध्यम से चल रहा था लेकिन श्री तिवारी ने अपने स्वार्थों के चलते इस कार्य को दुबारा बिना निविदा के अपनी मनपसंद कंपनी को देना शुरू कर दिया है और कमीशन खोरी के अपने पुराने कारनामों को अंजाम दे रहे हैं.

लेकिन बाद में सीएजी आडिट की आपत्तियों के बावजूद अनपरा में भी बिना टेंडर के काम दे दिया गया-

इस घोटाले का विभागीय सबूत एक ईमेल है जिसमें भ्रष्टाचारी तिवारी के अधीनस्थ अधिकारी ने रहस्यमय तरीके से सी.जी.एम् अनपरा को ईमेल क्र निर्देश दिया है कि निदेशक तकनीकी से आपकी हुई वार्ता के अनुसार कार्यवाही की जाय जिसमें स्पष्टता नहीं है मामला छुपाने की नियत से केवल सांकेतिक भाषा का प्रयोग किया गया है. जो समझने के लिए काफी है कि उक्त घोटाले को बीएस तिवारी के निर्देश पर ही अंजाम दिया गया है.

इसके अलावा गंभीर आरोपों से घिरे भ्रष्टाचारी तिवारी के खिलाफ तमाम आरोप लगाते हुए कांट्रेक्टर एसोसियेशन ने भी प्रबंध निदेशक उत्पादन निगम को 17.02.2018 को इस मुद्दे को अपने पत्र में लिखा है और अन्य कई आरोप लगाए हैं.

शिकायती पत्र कांट्रेक्टर एसोसियेशन द्वारा प्रबंध निदेशक को लिखा गया-

 

-साभार अफसरनामा.कॉम

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