UP : ताजमहल को सुरक्षित रखने के लिए जुलाई से पानी की प्लास्टिक बोतल पर लगेगा प्रतिबंध

- in उत्तरप्रदेश

ताज के साये में दशहरा घाट पर विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर तीन जून को स्वच्छ पर्यावरण कार्यक्रम हुआ था। यूनाइटेड नेशंस इन्वायरमेंट प्रोग्राम के कार्यक्रम में संस्कृति मंत्री डॉ. महेश शर्मा ने ताज समेत देशभर के 100 स्मारकों के 500 मीटर दायरे को प्लास्टिक, पॉलीथिन व गंदगी फ्री बनाने की घोषणा की थी।UP : ताजमहल को सुरक्षित रखने के लिए जुलाई से पानी की प्लास्टिक बोतल पर लगेगा प्रतिबंध

ताज की बात करें तो यहां सिंगल यूज प्लास्टिक बोतलों को सबसे पहले हटाने की तैयारी है। ताज में प्रतिदिन 10 से 15 हजार तक पानी की प्लास्टिक बोतलों का कचरा निकलता है। गर्मी में इस कचरे का निस्तारण मुश्किल बन गया है। इसके लिए स्मारक व उसके बाहर आरओ प्लांट लगाकर प्लास्टिक बोतलों पर रोक लगाई जा सकती है। डीएम गौरव दयाल इसके लिए निरीक्षण भी कर चुके हैं। अगर सब कुछ सही रहा तो जुलाई में गर्मी कम होने पर इसे अमली जामा पहनाया जा सकता है।

ताज में पानी का उचित इंतजाम

ताज की बात करें तो यहां छह हजार लीटर प्रति घंटे क्षमता के आरओ प्लांट लगे हुए हैं। प्रत्येक प्लांट की क्षमता एक हजार लीटर प्रति घंटा है। इनके 24 प्वॉइंट्स हैं। यह ताज देखने आने वाले सैलानियों के लिए पर्याप्त साबित होंगे। अगर एक या दो आरओ प्लांट काम भी नहीं करते हैं, तब भी काफी पेयजल उपलब्ध रहेगा। फिलहाल विदेशी पर्यटकों को एडीए द्वारा 500 मिली पानी की बोतल टिकट के साथ निश्शुल्क दी जाती है, जबकि भारतीय पानी की बोतल खरीदते हैं।

मैट लगाने पर भी विचार : ताज में प्लास्टिक बोतल सहित कचरे की दूसरी वजह शू-कवर हैं। संस्कृति मंत्रालय के अधिकारी ताज पर पूर्व की तरह मुख्य मकबरे व चमेली फर्श पर मैट लगाकर शू-कवर बंद करने पर विचार कर रहे हैं। सैलानी जूते उतारकर जाएंगे तो स्मारक में गंदगी नहीं पहुंचेगी। करीब दो दशक पहले तक स्मारक में यही व्यवस्था थी।

बोतल रोकी तो हुआ विरोध

ताज पर चार जून को एएसआइ ने सैलानियों के बोतल अंदर ले जाने पर रोक लगाई थी। इस पर पर्यटकों ने ऐतराज जताया, जिसके बाद एक घंटे में ही एएसआइ बैकफुट पर आ गया।

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